झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ शहर में रेलवे स्टेशन के पास श्री रूप स्मारक परिसर में एक अत्यंत प्राचीन शिवालय स्थित है, जो अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और अनूठे पारदर्शी शिवलिंग के कारण पूरे इलाके में विशेष पहचान रखता है। करीब 96 साल पुराना यह मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस पवित्र शिवालय की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित बिल्लौरी या स्फटिक पत्थर से निर्मित पारदर्शी शिवलिंग है। सफेद रंग के चमकीले स्फटिक से बना यह शिवलिंग मंदिर का मुख्य आकर्षण है, जिसके अलौकिक दर्शन करने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
वर्ष 1930 में हुआ था इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण
इस ऐतिहासिक शिवालय के निर्माण का कार्य वर्ष 1930 में संपन्न हुआ था। नवलगढ़ के शासक ठाकुर रूपसिंह के निधन के पश्चात उनकी पावन स्मृति में उनके दत्तक पुत्र रावल मदनसिंह ने इस मंदिर की स्थापना करवाई थी। उस दौर की निर्माण शैली और वास्तुकला को संजोए यह मंदिर आज भी अपनी प्राचीन स्थापत्य कला और गहरे धार्मिक महत्व को पूरी तरह बरकरार रखे हुए है। मौजूदा समय में श्री रूप स्मारक परिसर के भीतर पिछले कई वर्षों से श्री रूप राजपूत छात्रावास का सफल संचालन किया जा रहा है, जिससे इस पूरे परिसर में हमेशा चहल-पहल बनी रहती है और इसकी बेहतर देखभाल भी सुनिश्चित होती है।
गर्भगृह की भव्यता और शानदार भित्तिचित्र
मंदिर के गर्भगृह के भीतर स्फटिक शिवलिंग के अलावा भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान कार्तिकेय और नंदी महाराज की बेहद सुंदर प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। गर्भगृह के ठीक ऊपर बनी खूबसूरत छतरी भी आने वाले भक्तों का मन मोह लेती है। इस छतरी के चारों कोनों में शीशे से जड़ी हुई भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण, हनुमानजी और भगवान गरुड़ की आकर्षक प्रतिमाएं सुशोभित हैं। इसके अतिरिक्त गर्भगृह में नवलगढ़ के पूर्व शासकों के चित्र भी टांगे गए हैं, जो इस मंदिर के पुराने शाही और ऐतिहासिक महत्व को बखूबी दर्शाते हैं। शिवालय के गर्भगृह के चारों तरफ बने बरामदे की दीवारें बेहद आकर्षक भित्तिचित्रों से सजी हुई हैं। इन पुरानी कलाकृतियों में शेखावाटी कला और बेहतरीन शिल्प का अनूठा संगम देखने को मिलता है। सावन के पवित्र महीने में इस मंदिर के भीतर रुद्राभिषेक समेत कई विशेष अनुष्ठान और पूजा-अर्चना के कार्यक्रम धूमधाम से आयोजित किए जाते हैं।
राजस्थान में केवल तीन स्थानों पर हैं ऐसे दुर्लभ शिवलिंग
राजपूत छात्रावास के वार्डन धन्नेसिंह शेखावत के मुताबिक, पूरे राजस्थान राज्य में बिल्लौरी पत्थर से बने इस तरह के दुर्लभ शिवलिंग केवल तीन चुनिंदा स्थानों पर ही स्थापित हैं। इनमें पहला स्थान मंडावा गढ़ का प्रसिद्ध शिवालय है, दूसरा स्थान नाथद्वारा का ऐतिहासिक शिवालय है और तीसरा स्थान नवलगढ़ के श्री रूप स्मारक परिसर में मौजूद यह प्राचीन शिवालय है। यही अनोखी और दुर्लभ विशेषता इस मंदिर को धार्मिक तथा ऐतिहासिक दोनों ही दृष्टियों से बेहद खास बनाती है। इस प्रकार नवलगढ़ का यह शिवालय केवल पूजा-पाठ का एक केंद्र नहीं है, बल्कि यह शेखावाटी की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, राजपरिवार की यादों और प्राचीन कला की एक अमूल्य धरोहर है, जिसे लगभग एक सदी से संभाल कर रखा गया है।

















