राजस्थान के टोंक जिले के निवाई क्षेत्र में खाद की कालाबाजारी और अवैध भंडारण की शिकायतों पर सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने व्यापक छापेमारी की है। जिला विशेष टीम (DST) और कृषि विभाग के अधिकारियों ने झिलाय रोड पर स्थित रिको इंडस्ट्रियल एरिया सहित कई अलग-अलग ठिकानों पर खाद-बीज के गोदामों में औचक दबिश दी। इस दौरान बिना किसी वैध रिकॉर्ड के रखे गए यूरिया और डीएपी खाद का विशाल स्टॉक पकड़ा गया, जिसके बाद कुल 12 गोदामों को सील कर दिया गया है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक इन सीज किए गए गोदामों से लगभग 7 हजार कट्टे अवैध उर्वरक बरामद किए गए हैं।
रिकॉर्ड और भौतिक स्टॉक में मिला भारी अंतर
जिला विशेष टीम के प्रभारी ओमप्रकाश चौधरी की अगुवाई में संचालित इस व्यापक अभियान के दौरान अधिकारियों ने गोदामों में मौजूद यूरिया और डीएपी की बोरियों, बिक्री से जुड़े कागजात, लाइसेंस और स्टॉक रजिस्टरों की बारीकी से जांच की। जांच प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों को पोश मशीन में दर्ज आंकड़ों और मौके पर मौजूद भौतिक स्टॉक के बीच बहुत बड़ा अंतर देखने को मिला। कई गोदामों में मशीनी आंकड़ों से कहीं अधिक मात्रा में उर्वरक का भंडारण करके रखा गया था, जो सीधे तौर पर कालाबाजारी की ओर इशारा करता है। इसके अतिरिक्त, कुछ जगहों पर बिना वैध लाइसेंस के ही खाद और बीज बेचने की गैर-कानूनी गतिविधियां भी उजागर हुई हैं।
कार्रवाई के दौरान अधिकारियों के बीच तीखी झड़प
दबिश की कार्रवाई के दौरान मौके पर माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब पुलिस बल और कृषि विभाग के कर्मचारियों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीएसटी प्रभारी ओमप्रकाश चौधरी और कृषि विभाग के कर्मचारी रामनिवास जाट के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी और बहस देखने को मिली। हालांकि इस कहासुनी के बाद भी जांच प्रक्रिया रुकी नहीं और दोनों टीमों ने मिलकर गोदामों की तलाशी तथा दस्तावेजों के मिलान का काम जारी रखा। पुलिस और कृषि विभाग के कर्मचारियों के बीच हुई इस बहस का मामला पूरे प्रशासनिक हलके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
गोयल और केके एंटरप्राइजेज में पकड़ा गया बड़ा अवैध स्टॉक
संयुक्त टीम द्वारा की गई सघन जांच के दौरान गोयल इंटरप्राइजेज नामक फर्म के गोदाम से 1,729 कट्टे अवैध यूरिया तथा 155 कट्टे अवैध डीएपी बरामद किए गए। इसी तरह केके एंटरप्राइजेज के परिसर में बने गोदाम की जांच करने पर लगभग एक हजार कट्टे बिना रिकॉर्ड के रखे हुए यूरिया के पाए गए। अन्य गोदामों में भी इसी प्रकार बिना हिसाब-किताब के रखे गए खाद के बड़े-बड़े ढेर मिले। अधिकारियों ने मौके पर उपलब्ध उर्वरक की गिनती की और उसे पोश मशीन में दर्ज प्रविष्टियों से मिलाया, जिसमें गंभीर अनियमितताएं साबित हुईं।
व्यापारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी
कार्रवाई पूरी होने के बाद कृषि विभाग ने इन सभी गोदामों में मौजूद खाद के भंडारण को पूरी तरह गैर-कानूनी करार दिया है। इसके बाद संयुक्त टीम ने तत्परता दिखाते हुए कुल 12 गोदामों को सीज कर 7 हजार के करीब कट्टों को जब्त कर लिया। अब दोषी खाद कारोबारियों और फर्म मालिकों के खिलाफ नियमानुसार एफआईआर दर्ज कराने की विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कृषि विभाग के उच्च अधिकारियों को नियमों के तहत सख्त धाराओं में मामला दर्ज कराने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों और व्यापारियों के बीच सांठगांठ की जांच
इस पूरे मामले ने कृषि विभाग के स्थानीय अधिकारियों और खाद कारोबारियों के बीच कथित मिलीभगत के आरोपों को भी जन्म दे दिया है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि अवैध भंडारण का यह पूरा खेल अधिकारियों की अनदेखी या शह के बिना संभव नहीं था। हालांकि, जांच में जुटे अधिकारियों का कहना है कि इन आरोपों की सच्चाई पूरी तरह से विस्तृत जांच प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही सामने आ पाएगी। फिलहाल पुलिस और कृषि विभाग की अलग-अलग टीमें पोश मशीन के डिजिटल डेटा, विक्रेताओं के लाइसेंस और गोदामों से जब्त कागजातों का गहन विश्लेषण कर रही हैं।
स्थानीय खाद कारोबारियों में हड़कंप का माहौल
निवाई क्षेत्र में हुई इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद से ही पूरे जिले के खाद और बीज व्यापारियों में हड़कंप मचा हुआ है। विशेष रूप से वे कारोबारी अत्यधिक भयभीत हैं जिनके गोदामों में रखा स्टॉक सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता है या जिन्होंने बिना लाइसेंस के स्टॉक जमा कर रखा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नियमों के उल्लंघन, अवैध भंडारण और कालाबाजारी में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। 12 गोदामों को बंद किए जाने और 7 हजार कट्टे जब्त किए जाने के बाद अब एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी पूरी कर ली गई है।


















