राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल खाटूश्यामजी की नगरपालिका राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. लंबे समय से चल रही खींचतान, कानूनी दांव-पेच और राजनीतिक शह-मात के खेल के बाद 25 वर्षीय विनिता पूनिया ने अध्यक्ष पद का चुनाव जीतकर कांग्रेस का बोर्ड बना दिया है. भारतीय जनता पार्टी के प्रभाव वाले इस क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी की इस जीत को स्थानीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है. चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह देखा गया.
कानूनी दांव-पेच और कांटे के मुकाबले के बीच विनिता पूनिया की जीत
अध्यक्ष पद पर निर्वाचन के पश्चात मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए विनिता पूनिया ने अपनी इस सफलता पर खुशी जताई. उन्होंने कहा कि आखिरकार सत्य की विजय हुई है. उन्होंने स्थानीय नागरिकों से लगातार अपना समर्थन बनाए रखने की अपील की और आश्वासन दिया कि वे खाटूश्यामजी क्षेत्र की हर समस्या को हल करने का पूर्ण प्रयास करेंगी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी वीडियो में विनिता पूनिया ने जनता के प्रति अपना आभार व्यक्त किया.
कौन हैं 25 साल की विनिता पूनिया?
महज 25 वर्ष की उम्र में नगरपालिका अध्यक्ष बनने वाली विनिता पूनिया सीकर जिले के खाटूश्यामजी क्षेत्र के एक सामाजिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय परिवार से संबंध रखती हैं. विनिता ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत खाटूश्यामजी नगर पालिका के वार्ड नंबर 11 से पार्षद का चुनाव जीतकर की थी. उस चुनाव में उन्हें 219 वोट हासिल हुए थे और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार रामगोपाल सिंहमार को 88 मतों के अंतर से पराजित किया था. वार्ड स्तर पर मिले इस मजबूत जनादेश के बाद से ही निकाय स्तर की राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाने लगी थी. खाटूश्यामजी नगर क्षेत्र में सफाई व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सहूलियत, धार्मिक पर्यटन और स्थानीय निवासियों तथा दुकानदारों की मांगों को लेकर वे लगातार अपनी आवाज उठाती रही हैं. पार्षदों के बीच सहमति बनाने की उनकी क्षमता के आधार पर ही कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाया था.
नगर पालिका का समीकरण: 20 सदस्यों में बराबरी का मुकाबला
खाटूश्यामजी नगरपालिका की कुल 20 सीटों का राजनीतिक समीकरण बेहद रोचक बना हुआ था. कुल 20 वार्डों वाली इस पालिका में भारतीय जनता पार्टी के पास 8 पार्षद थे और कांग्रेस के पास भी 8 ही पार्षद मौजूद थे. इनके अलावा 3 निर्दलीय पार्षद और 1 पार्षद राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) का चुनाव जीतकर आया था. ऐसे में अध्यक्ष पद पर जीत हासिल करने के लिए 11 पार्षदों के स्पष्ट बहुमत की आवश्यकता थी. दोनों ही प्रमुख दलों के लिए एक-एक पार्षद का समर्थन हासिल करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुका था.
21 सितंबर का मतदान और राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला
अध्यक्ष पद के निर्वाचन के लिए 21 सितंबर को मतदान की प्रक्रिया आयोजित की गई थी. हालांकि, मतदान के दौरान वार्ड नंबर 10 की कांग्रेस पार्षद लक्ष्मी देवी वोट डालने के लिए मतदान केंद्र नहीं पहुंच सकीं. इसके चलते कुल 20 में से केवल 19 पार्षदों ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया. मतदान पूरा होने के बाद चुनाव प्रक्रिया और परिणामों की घोषणा को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जिसके चलते मामला राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंच गया. विनिता पूनिया ने राजस्थान हाईकोर्ट याचिका दायर कर मांग की कि पहले से डाले जा चुके 19 वोटों की ही गिनती करवाकर परिणाम घोषित किए जाएं. उच्च न्यायालय ने पुनर्मतदान कराने की मांग पर रोक लगाते हुए पूर्व में डाले गए 19 वोटों की गणना करने का स्पष्ट निर्देश दिया. इसके बाद हुई मतगणना में परिणाम कांग्रेस के पक्ष में गया.
महज 1 वोट के अंतर से तय हुआ फैसला
उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार जब वोटों की गिनती की गई, तो विनिता पूनिया ने बेहद करीबी मुकाबले में जीत दर्ज की. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी प्रेम देवी को मात्र 1 वोट के मामूली अंतर से मात दी. इस 1 वोट की बढ़त ने खाटूश्यामजी नगरपालिका में कांग्रेस के बोर्ड गठन का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया. इस जीत ने यह स्पष्ट कर दिया कि निर्दलीय और अन्य पार्षदों का समर्थन हासिल करने में विनिता पूनिया और उनकी टीम सफल रही.
खाटूश्यामजी के धार्मिक महत्व और स्थानीय मुद्दों का प्रभाव
खाटूश्यामजी देश और विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं का एक प्रमुख धार्मिक आस्था केंद्र है. यहां हर महीने और विशेष अवसरों पर भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. इस कारण स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचे का विकास, क्राउड मैनेजमेंट यानी भीड़ प्रबंधन, नियमित सफाई और नागरिक सुविधाओं का रखरखाव बेहद संवेदनशील विषय रहा है. स्थानीय निवासियों में प्रशासनिक स्तर की ढिलाई और नागरिक समस्याओं के समाधान में देरी को लेकर जो असंतोष था, उसका लाभ चुनाव में विनिता पूनिया और कांग्रेस को मिला.
शेखावाटी अंचल में राजनीतिक संदेश और स्थानीय चुनाव का परिदृश्य
सीकर जिला राजस्थान के शेखावाटी अंचल का केंद्र बिंदु माना जाता है. राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार होने के बावजूद धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण खाटूश्यामजी जैसे निकाय में कांग्रेस का कब्जा होना शेखावाटी क्षेत्र में पार्टी के जमीनी संगठन की मजबूती को दर्शाता है. यह नतीजा दर्शाता है कि स्थानीय निकाय चुनावों में मतदाता दलीय प्राथमिकताओं से ऊपर उठकर स्थानीय चेहरों और विकास के वादों को प्राथमिकता देते हैं. इसके साथ ही राजस्थान में आगामी पंचायत चुनावों की तैयारियां भी तेज हो गई हैं, जहां 2026 के पंचायत चुनावों के तहत 4 जिलों में सभी सरपंच पद अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित किए गए हैं और 7,200 महिलाएं शासन की कमान संभालने जा रही हैं.



















