राजस्थान के अलवर जिले अंतर्गत आने वाले रामगढ़ इलाके में सरसों की बुआई की शुरुआत होते ही डाई अमोनियम फॉस्फेट यानी डीएपी खाद की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। शुक्रवार की भोर से ही बस स्टैंड के पास स्थित बहुउद्देश्यीय प्राथमिक ग्राम सेवा सहकारी समिति परिसर के बाहर सैकड़ों काश्तकार एकत्रित हो गए थे। खेतों में बीज डालने की तय समय सीमा नजदीक आने के कारण किसान जल्द से जल्द पोषक तत्व जुटाने की जद्दोजहद में जुटे थे, लेकिन सहकारी केंद्र का शटर खुलते ही सीमित रसद ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। केंद्र पर केवल छह सौ बोरी खाद उपलब्ध थी, जबकि वहां जुटी भीड़ इस आंकड़े से कहीं ज्यादा बड़ी थी।
सीमित खेप से बढ़ी किसानों की बेचैनी और हुआ विवाद
सहकारी समिति के केंद्र पर मौजूद खाद का कोटा बेहद सीमित होने की जानकारी जैसे ही लाइन में लगे लोगों तक पहुंची, वहां अफरातफरी का माहौल बनने लगा। हर कोई अपनी बारी जल्दी आने की उम्मीद में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा था, जिसकी वजह से कतार में खड़े लोगों के बीच कई मर्तबा जोरदार कहासुनी हुई और बात धक्का-मुक्की तक जा पहुंची। खेतों में मिट्टी तैयार होने के कारण बुआई का काम बीच में रुका हुआ था, जिससे किसानों का सब्र टूटता दिखाई दिया। केंद्र पर मौजूद कर्मियों के लिए इतनी बड़ी तादाद को अकेले संभालना लगभग नामुमकिन साबित हो रहा था, क्योंकि बैग्स की तादाद महज 600 थी और दावेदार सैकड़ों में थे।
पुलिस बल की निगरानी में कराया गया वितरण कार्य
हंगामे और गहमागहमी की सूचना मिलते ही रामगढ़ थाने से पुलिस का एक दल मौके पर पहुंच गया। सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) चंद्रपाल चौधरी और कांस्टेबल महमूद खान ने केंद्र पर पहुंचकर सबसे पहले अनियंत्रित हो रही भीड़ को नियंत्रित किया। दोनों पुलिसकर्मियों ने उत्तेजित किसानों से बातचीत की और उन्हें समझा-बुझाकर कतारों को दोबारा सीधी और व्यवस्थित करवाया। पुलिस बल की सीधी निगरानी में खिड़की से खाद की बोरियां बांटने की प्रक्रिया फिर से बहाल कराई गई। खाकी की मौजूदगी के बाद वहां शांति कायम हुई और लाइन में खड़े लोग क्रमबद्ध होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करने लगे।
कोटा समाप्त होते ही मायूसी के साथ घर लौटे काश्तकार
शांतिपूर्ण तरीके से बांटी जा रही खाद की खेप कुछ ही घंटों के भीतर पूरी तरह खत्म हो गई। जैसे ही 600वें कट्टे की पर्ची कटी, समिति के कर्मचारियों ने भंडार रिक्त होने का ऐलान कर दिया। इसके बाद कतार में पीछे खड़े दर्जनों किसानों में मायूसी और आक्रोश फैल गया, क्योंकि वे भोर की पहली किरण फूटने से पहले ही लाइन में अपनी जगह बनाकर खड़े थे। खाली हाथ लौटने को मजबूर हुए ग्रामीणों ने रोष जताते हुए कहा कि जब विभाग को मालूम है कि यह सरसों की बुआई का मुख्य समय है, तब आपूर्ति की पूर्व तैयारी इतनी लचर क्यों रखी गई। अब इन वंचित किसानों के सामने अगले लॉट के आने तक इंतजार करने के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

















