राजस्थान के उदयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई के तहत एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप के एडिशनल एसपी मुकेश कुमार सोनी के नाम पर भारी-भरकम रकम वसूलने वाले एक बिचौलिए को गिरफ्तार किया है। आरोपी बिचौलिया सज्जन कुमार दो करोड़ रुपये की नकद रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा गया है। शुरुआती जानकारियों के अनुसार, यह বিপুল रकम किसी चल रहे मुकदमे में पक्ष में मदद करने और राहत दिलाने के नाम पर मांगी गई थी। इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद से ही प्रशासनिक और पुलिस महकमे में भारी हड़कंप मच गया है और तरह-तरह की चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
मुकदमे में राहत देने के नाम पर हुई थी डील
जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि यह पूरी रिश्वत किसी कानूनी मामले या मुकदमे में राहत दिलाने के एवज में तय की गई थी। पीड़ित पक्ष की तरफ से शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने सबसे पहले इस पूरे मामले का गोपनीय तरीके से सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान मामला सही पाए जाने के बाद ब्यूरो की टीम ने जाल बिछाकर आरोपी को दबोचने की योजना तैयार की। तय योजना के मुताबिक जब बिचौलिया सज्जन कुमार दो करोड़ रुपये की भारी रकम ले रहा था, तभी सतर्क एसीबी टीम ने उसे मौके पर ही धर दबोचा। यह रकम किसके इशारे पर और किस विशिष्ट मामले को रफा-दफा करने के लिए ली जा रही थी, इस बात की तह तक जाने के लिए अब जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं।
शीर्ष अधिकारियों के निर्देशन में हुई पूरी कार्रवाई
इस सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम का नेतृत्व सीआई डॉ. सोनू शेखावत और एएसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा ने किया। यह पूरा अभियान डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के सीधे सुपरविजन में चलाया गया, जबकि इसकी हर गतिविधि की मॉनिटरिंग एंटी करप्शन ब्यूरो के मुख्यालय स्तर पर भी की जा रही थी। इस सफल ऑपरेशन के पीछे महानिदेशक गोविंद गुप्ता और अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव के निर्देश विशेष रूप से शामिल रहे। उनके आदेशों के बाद ही टीम ने इतनी बड़ी कार्रवाई को पूरी गोपनीयता और मुस्तैदी के साथ पूरा किया।
आगे की कड़ियों को जोड़ने में जुटी जांच एजेंसी
फिलहाल एंटी करप्शन ब्यूरो की पूरी टीम इस मामले की जड़ों तक पहुंचने के लिए गहन पूछताछ और जांच-पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि इस दो करोड़ रुपये की रिश्वत की डील को तय करने में पर्दे के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल थे। इसके अलावा यह भी खंगाला जा रहा है कि यह अवैध वसूली का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें किस-किस के नाम पर पहले भी ऐसे सौदे किए गए हैं। उदयपुर में हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद से भ्रष्ट तत्वों में हड़कंप मचा हुआ है और जांच आगे बढ़ने के साथ कई नए और चौंकाने वाले खुलासे होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।


















