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कोटा ग्रामीण में सांसद जन सेवा शिविर का आयोजन, ओम बिरला ने किया औचक निरीक्षणराजस्थान
31 अग॰ 2026, 11:20 am (57 मिनट पहले)· 2

कोटा ग्रामीण में सांसद जन सेवा शिविर का आयोजन, ओम बिरला ने किया औचक निरीक्षण

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कोटा ग्रामीण के गंदीफली में आयोजित जन सेवा शिविर का अचानक निरीक्षण किया। इस पहल से ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे आधार और स्वास्थ्य जैसी कई सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है।

सुदूर ग्रामीण अंचलों तक सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत परखने के उद्देश्य से एक विशेष पहल के तहत कोटा ग्रामीण के गंदीफली इलाके में सांसद जन सेवा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अचानक वहां पहुंचकर औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने शिविर में पहुंचे आम नागरिकों की समस्याओं को खुद ध्यान से सुना और मौके पर मौजूद अधिकारियों को मामलों के त्वरित निपटारे के सख्त निर्देश दिए। मध्य प्रदेश की सीमा से लगे इन ग्रामीण क्षेत्रों के हर पात्र व्यक्ति तक सरकारी सहायता पहुंचाने के लिए यह पूरा अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत सिलसिलेवार ढंग से अलग-अलग गांवों में शिविर लगाए जा रहे हैं।

एक ही छत के नीचे मिल रही सभी प्रशासनिक और जनकल्याणकारी सुविधाएं

गंदीफली में लगाए गए इस शिविर में स्थानीय लाभार्थियों की भारी भीड़ देखने को मिली। इस अनूठी पहल का मुख्य मकसद नागरिकों को अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के अनगिनत चक्कर काटने की परेशानी से पूरी तरह बचाना है। इन आयोजनों के माध्यम से लोगों को विभिन्न विभागों की तमाम सेवाएं और सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जा रही हैं। शिविर स्थल पर विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी आपसी बेहतर तालमेल के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे पात्र परिवारों के दस्तावेजों का मौके पर ही सत्यापन, त्रुटियों में सुधार और नए पंजीकरण की प्रक्रिया बेहद आसान हो गई है। आम जनता को विभिन्न सरकारी योजनाओं से सीधे तौर पर जोड़ने के लिए यह अभियान एक बेहद असरदार जरिया साबित हो रहा है।

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गंदीफली शिविर में स्थापित किए गए थे कई उपयोगी सहायता काउंटर

ग्रामीण इलाकों के लोगों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए इस शिविर में कई महत्वपूर्ण काउंटर बनाए गए थे, जहां एक ही स्थान पर कई तरह की सेवाएं प्रदान की गईं। पहचान और दस्तावेजों से जुड़ी सेवाओं के तहत शिविर में आधार कार्ड बनवाने और उनमें संशोधन कराने के साथ-साथ जन आधार कार्ड बनवाने और उनके नाम-पते की गलतियों को ठीक करने की विशेष सुविधा दी गई। खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा पात्रता का मौके पर ही सत्यापन किया गया। इसके अलावा वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांगजन पेंशन जैसी तमाम सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए नए पंजीकरण भी किए गए।

निशुल्क स्वास्थ्य जांच और दवा वितरण की विशेष व्यवस्था

शिविर में स्वास्थ्य विभाग की सक्रिय भागीदारी के चलते वहां पहुंचने वाले लाभार्थियों की निशुल्क स्वास्थ्य जांच की गई। चिकित्सकों की टीम ने मरीजों की जांच करने के बाद उनके परामर्श के आधार पर जरूरतमंद लोगों को आवश्यक दवाइयां भी बिल्कुल मुफ्त में वितरित कीं। निरीक्षण के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रशासनिक अधिकारियों को बेहद स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि सरकार की मंशा समाज के अंतिम छोर पर खड़े आखिरी व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की है और इसमें किसी भी स्तर पर प्रशासनिक ढिलाई या देरी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने शिविर में आए बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं से सीधे बातचीत करके योजनाओं की जमीनी स्थिति की जानकारी जुटाई। ऐसे जन सेवा शिविरों के आयोजन से दूरदराज के गांवों में रहने वाले नागरिकों का समय और पैसा दोनों बच रहा है, और इसके साथ ही सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुंच रहा है।

सवाल-जवाब

कोटा ग्रामीण में जन सेवा शिविर का आयोजन कहाँ किया गया था?
यह जन सेवा शिविर कोटा ग्रामीण के गंदीफली गांव में आयोजित किया गया था।
इस शिविर का औचक निरीक्षण किसने किया?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गंदीफली शिविर का औचक निरीक्षण किया।
शिविर में कौन-सी दस्तावेज सेवाएं उपलब्ध थीं?
शिविर में आधार कार्ड और जन आधार कार्ड बनवाने के साथ-साथ उनमें नाम और पते की त्रुटियों को सुधारने की सुविधा दी गई।
शिविर में स्वास्थ्य से जुड़ी क्या सुविधा दी गई?
स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से लाभार्थियों की निशुल्क स्वास्थ्य जांच की गई और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त दवाइयां दी गईं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·42 मिनट पहले

लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गंदीफली शिविर का औचक निरीक्षण प्रशासनिक जवाबदेही तय करने का एक मजबूत प्रशासनिक कदम है। जब देश के शीर्ष विधायी पद पर बैठे व्यक्ति सीधे तौर पर ग्रामीण इलाकों में जन कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और दस्तावेजों के त्वरित सत्यापन की निगरानी करते हैं, तो इससे स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और लालफीताशाही की गुंजाइश कम होती है। ऐसे जमीनी निरीक्षण यह सुनिश्चित करते हैं कि आधार और पेंशन जैसी बुनियादी सेवाएं कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि दूरदराज के पात्र नागरिकों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचें।

Rohan Verma@rohan-verma·42 मिनट पहले

इस तरह के औचक निरीक्षण और एक ही छत के नीचे आधार, पेंशन व स्वास्थ्य सेवाओं का मिलना गवर्नेंस मॉडल में एक बड़ा बदलाव है। जब प्रशासनिक अमला सीधे मैदान में उतरकर ऑन-द-स्पॉट सत्यापन और पंजीकरण करता है, तो दफ्तरों के चक्कर काटने की मजबूरी खत्म होती है। हालांकि, इस व्यवस्था की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि शिविरों के बाद शिकायतों का फॉलो-अप कितना मजबूत रहता है और क्या दूरदराज के हर पात्र व्यक्ति तक ये सुविधाएं निरंतर पहुंच पाती हैं या नहीं।

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