हॉर्मूज जलडमरूमध्य के पास स्थित लार्क द्वीप पर अमेरिकी बलों द्वारा दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाए जाने के बाद वाशिंगटन और तेहरान के बीच सैन्य संघर्ष नए सिरे से भड़क उठा है। जुलाई के अंत के बाद से यह पहला मौका है जब अमेरिकी सेना ने ईरान की धरती पर सीधी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के अनुसार, इन हमलों में दो लोगों की मौत हो गई जबकि दो अन्य घायल हो गए। इस घटना के बाद ईरानी सैन्य अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस कदम को रणनीतिक भूल करार दिया है और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।
लार्क द्वीप पर कार्रवाई और रणनीतिक महत्व
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस सैन्य कार्रवाई को सीमित और सटीक कदम बताते हुए कहा कि यह हॉर्मूज जलडमरूमध्य में आसन्न खतरे का कारण बन रही माइन बिछाने वाली ताकतों के खिलाफ उठाया गया कदम था। लार्क द्वीप के आसपास इन दिनों कमर्शियल टैंकर ट्रैफिक की जांच की जा रही है और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वहां से गुजरने वाले जहाजों पर भारी फीस थोपी जा रही है। इस इलाके से दुनिया भर का करीब बीस प्रतिशत तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस का व्यापार गुजरता है, जिसके कारण यह क्षेत्र भू-राजनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है।
ईरान का पलटवार और क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएं
अमेरिकी हमले का जवाब देते हुए ईरान ने क्षेत्रीय स्तर पर ताबड़तोड़ जवाबी कार्रवाई की। ईरानी सेना ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। जॉर्डन की सेना ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सोमवार सुबह शुरुआती घंटों में आसमान में आठ मिसाइलों को हवा में ही रोक लिया। इसके अलावा, ईरानी सरकारी मीडिया ने यह भी दावा किया कि उनके ड्रोन ने संयुक्त अरब अमीरात स्थित एक एयर बेस को भी सफलतापूर्वक अपना निशाना बनाया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने लार्क द्वीप पर अमेरिकी सैन्य आक्रमण की कड़ी निंदा करते हुए जॉर्डन के ठिकानों पर हुए हमलों को आत्मरक्षा का वैध अधिकार बताया है।
नेतृत्व के तीखे बयान और जुबानी जंग
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता हुसैन मोहेब्बी ने अमेरिकी कार्रवाई को एक रणनीतिक और घातक गलती करार देते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन पर करारा हमला बोला। उन्होंने चेतावनी दी कि दुश्मन को इस गलत गणना की भारी कीमत चुकानी होगी और इसका असर सैन्य तथा आर्थिक दोनों क्षेत्रों पर साफ दिखाई देगा। वहीं दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अपने एक आधिकारिक बयान में कहा कि वे युद्ध की शुरुआत नहीं चाहते हैं, लेकिन हमलावरों को कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। तेहरान की तस्लीम न्यूज एजेंसी ने पहले ही यह जानकारी दी थी कि लार्क द्वीप पर यह हमला ड्रोन के जरिए किया गया था।
सोशल मीडिया पर वीडियो और तेल बुनियादी ढांचे की बहस
घटनाक्रम के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI तकनीक से तैयार किए गए कुछ वीडियो साझा किए, जिनमें तेल के बुनियादी ढांचे में भीषण विस्फोट होते हुए दिखाई दे रहे थे। इनमें से एक वीडियो के कैप्शन में लिखा गया था कि खारग द्वीप को मलबे में बदला जा रहा है। खारग द्वीप ईरान के तट के पास एक प्रमुख तेल टर्मिनल है, जिसे अपने नियंत्रण में लेने की धमकी अमेरिकी राष्ट्रपति पहले भी दे चुके हैं। हालांकि, ईरान के उप विदेश मंत्री काज़म घरिबबादी ने अमेरिकी नेता के इन दावों कोरी प्रोपेगेंडा और जनता को गुमराह करने वाला प्रयास करार दिया है। ईरानी अधिकारियों और सरकारी मीडिया का मानना है कि मौजूदा अमेरिकी अभियान दरअसल उनकी पिछली आर्थिक नीतियों और संघर्ष के दौरान हासिल विफलताओं का ही एक दूसरा रूप है।



















