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छत्तीसगढ़ की घुंघुटा नदी में बहे केरल के पर्यटक, शमसुद्दीन खान ने बचाई युवती की जानछत्तीसगढ़
31 अग॰ 2026, 12:08 pm (1 दिन पहले)· 2

छत्तीसगढ़ की घुंघुटा नदी में बहे केरल के पर्यटक, शमसुद्दीन खान ने बचाई युवती की जान

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में घुंघुटा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से केरल से आए दो पर्यटक बह गए। स्थानीय निवासी शमसुद्दीन खान ने अपनी जान जोखिम में डालकर युवती को सुरक्षित बाहर निकाला, जबकि युवक की डूबने से मौत हो गई।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक झकझोर देने वाली और मानवता को जिंदा रखने वाली घटना सामने आई है। यहां प्रवाहित होने वाली घुंघुटा नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने के कारण केरल से घूमने आए एक युवक और एक युवती तेज बहाव की चपेट में आ गए। नदी के तेज बहाव में दोनों बहने लगे और उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास हड़कंप मच गया। इसी दौरान बाजारों में व्यापार का काम करने वाले स्थानीय युवक शमसुद्दीन खान ने अपनी जान की परवाह किए बिना इंसानियत की एक अनोखी मिसाल पेश की और अपनी सूझबूझ से युवती की जिंदगी बचा ली। हालांकि, काफी प्रयासों के बावजूद वे युवक को नहीं बचा सके और बाद में उसका शव बरामद किया गया।

पिकअप में रखी रस्सी लेकर नदी की ओर दौड़े शमसुद्दीन खान

घटना के समय शमसुद्दीन खान अपने घर पर जरूरी कामकाज में व्यस्त थे। तभी कुछ स्थानीय लड़कों ने उनके पास आकर शोर मचाया और जानकारी दी कि नदी के तेज बहाव में एक लड़का और एक लड़की बहते हुए आ रहे हैं। इस बात को सुनते ही बिना एक पल गंवाए शमसुद्दीन तुरंत अपने घर से बाहर निकले और अपनी पिकअप गाड़ी में रखी रस्सी उठाई। चूंकि वे बाजार से जुड़ा काम करते हैं, इसलिए उनकी गाड़ी में रस्सी हमेशा मौजूद रहती थी। वे उसी रस्सी को लेकर फौरन नदी के तट की तरफ दौड़ पड़े ताकि डूब रहे लोगों तक समय रहते मदद पहुंचाई जा सके।

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दो किलोमीटर तक पीछा कर युवती को सुरक्षित निकाला बाहर

शमसुद्दीन के अनुसार जब वे नदी के किनारे पहुंचे, तो उन्होंने डूब रहे युवक का हाथ पानी के ऊपर दिखाई देते देखा, लेकिन कुछ ही पलों में वह पानी के तेज बहाव में ओझल हो गया। वहीं दूसरी तरफ युवती खुद को बचाने के लिए पानी में संघर्ष कर रही थी और तैरने की कोशिश में आगे बढ़ रही थी। शमसुद्दीन ने अपनी तरफ से कई बार रस्सी को युवती की ओर फेंका, लेकिन तेज बहाव और घबराहट के कारण वह शुरुआती प्रयासों में रस्सी नहीं पकड़ पाई। युवती पानी के बहाव के साथ बहते हुए पुल के दूसरी तरफ जा पहुंची, जिसके बाद शमसुद्दीन भी लगातार नदी के किनारे-किनारे रस्सी लेकर दौड़ते रहे। आखिरकार छठी या सातवीं बार में युवती ने हिम्मत करके रस्सी को पकड़ लिया और इसके बाद शमसुद्दीन ने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए उसे खींचकर सुरक्षित बाहर निकाल लिया। उन्होंने इस रेस्क्यू के दौरान करीब एक से दो किलोमीटर तक दौड़ लगाई थी।

बाहर आते ही युवती ने पूछा- मेरा सिभू कहां है?

नदी के ठंडे और तेज बहाव से बाहर निकाले जाने के बाद युवती बुरी तरह डरी और सहमी हुई थी। उसकी मानसिक स्थिति बेहद तनावपूर्ण थी और वह लगातार कांपते हुए शमसुद्दीन से सिर्फ एक ही सवाल पूछ रही थी कि उसका साथी सिभू कहां है और उसे बचा लिया जाए। हालांकि, तब तक वह युवक पानी में पूरी तरह ओझल हो चुका था और मौके पर उसकी कोई खोजखबर नहीं मिल पा रही थी। बाद में चले आधिकारिक रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान उस युवक का शव बरामद कर लिया गया, जिससे इस दुखद हादसे की पुष्टि हो गई।

पुल पर खड़े होकर सिर्फ तमाशा देखते रहे लोग

इस पूरी आपदा के दौरान एक बेहद निराशाजनक पहलू यह भी सामने आया कि घटना स्थल पर कई अन्य लोग भी मौजूद थे। शमसुद्दीन ने बताया कि वे सभी लोग केवल पुल के ऊपर खड़े होकर चिल्ला रहे थे और मदद के नाम पर केवल शोर मचा रहे थे। यदि उनमें से कुछ लोग हिम्मत करके नीचे नदी की तरफ आते और बचाव कार्य में थोड़ा सहयोग करते, तो शायद स्थिति अलग होती और शमसुद्दीन को अकेले संघर्ष नहीं करना पड़ता। लोगों के सहयोग न मिलने के कारण वे चाहकर भी उस युवक की जान नहीं बचा सके, जिसका उन्हें बेहद गहरा मलाल है।

मदद करते वक्त नहीं आया जाति और धर्म का ख्याल

जब शमसुद्दीन से यह सवाल किया गया कि क्या उन्होंने उस युवती की मदद करने से पहले उसकी जाति या धर्म के बारे में सोचा था, तो उनका जवाब बेहद स्पष्ट था। उन्होंने दो टूक कहा कि उस संकट के क्षण में उनके दिमाग में ऐसा कोई भी विचार नहीं आया था। उनके मन में केवल एक ही बात चल रही थी कि नदी के तेज बहाव में बह रहे दोनों इंसानों की किसी तरह जान बचाई जानी चाहिए। सोशल मीडिया पर मिल रही सराहना और तारीफों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि वे लोगों के शुक्रगुजार हैं जो उनकी हौसलाअफजाई कर रहे हैं, लेकिन उनके दिल में इस बात का हमेशा दुख रहेगा कि वे उस युवक की जान बचाने में असफल रहे।

सवाल-जवाब

यह घटना कहां घटी?
यह घटना छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में बहने वाली घुंघुटा नदी के पास घटी।
पर्यटक कहां से आए थे?
नदी में बहने वाले पर्यटक केरल से घूमने आए थे।
युवती की जान किसने बचाई?
स्थानीय व्यवसायी शमसुद्दीन खान ने अपनी पिकअप की रस्सी की मदद से युवती की जान बचाई।
क्या युवक को बचाया जा सका?
नहीं, युवक को नहीं बचाया जा सका और बाद में उसका शव बरामद किया गया।
शमसुद्दीन ने युवती को कितनी दूर तक रेस्क्यू किया?
शमसुद्दीन ने करीब एक से दो किलोमीटर तक दौड़कर और नदी के बहाव के साथ पीछा करके युवती को बाहर निकाला।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

यह घटना सार्वजनिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के मोर्चे पर गंभीर सवाल खड़े करती है। छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों और जलस्रोतों के पास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, चेतावनी बोर्ड और स्थानीय गोताखोरों या लाइफगार्ड्स की तैनाती न होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। यदि समय पर आधिकारिक सुरक्षा तंत्र सक्रिय होता, तो शायद एक अमूल्य जान बचाई जा सकती थी। भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए जिला प्रशासन को तुरंत सख्त गाइडलाइन और सुरक्षा दल तैनात करने चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

यह त्रासदी दर्शाती है कि हमारे पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र कितना लाचार है। जब बाहरी राज्यों से पर्यटक आते हैं, तो स्थानीय भूगोल और अचानक आने वाली बाढ़ के खतरों से अनजान होना स्वाभाविक है। ऐसे में केवल स्थानीय नागरिकों के भरोसे जीवन रक्षा छोड़ देना प्रशासन की विफलता है। पर्यटन स्थलों पर एकीकृत चेतावनी प्रणाली और आपदा मोचन दल की स्थायी तैनाती अब एक अनिवार्य प्रशासनिक आवश्यकता बन चुकी है, ताकि शमसुद्दीन जैसे लोगों को हर बार अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े।

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