राजस्थान के ग्रामीण अंचलों में स्थानीय सत्ता चुनने की चौसर बिछ चुकी है, जहां प्रतापगढ़ जिले के भीतर पंचायती राज संस्थाओं के गठन की प्रशासनिक रूपरेखा पूरी तरह साफ हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा औपचारिक घोषणा किए जाने के उपरांत समूचे जिले में चुनावी हलचल चरम पर पहुंच गई है। जिले की 8 पंचायत समितियों के दायरे में बसी 277 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण इस बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इस पूरी चुनावी कवायद के जरिए जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, ग्राम प्रधान (सरपंच) तथा वार्ड पंच के प्रतिनिधियों का चयन सुनिश्चित किया जाएगा। समूची प्रक्रिया को शांतिपूर्ण माहौल में पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से पूरा कराने के मकसद से स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक तंत्र ने अपनी व्यापक तैयारियां धरातल पर उतारनी शुरू कर दी हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो इन आठों समितियों में कुल 138 पंचायत समिति वार्ड तथा 2,203 वार्ड पंच हल्के निर्धारित किए गए हैं, जिनके लिए कुल 693 पोलिंग बूथ स्थापित किए गए हैं।
तीसरे चरण के तहत चार पंचायत समितियों में मतदान कार्यक्रम
प्रतापगढ़ जिले के भीतर सुचारू और व्यवधान रहित मतदान प्रक्रिया संचालित करने की दृष्टि से पूरे जिले को राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम अनुसार तीसरे एवं चौथे चरण में बांटा गया है। तीसरे चरण के अंतर्गत जिले की छोटीसादड़ी, धमोतर, धरियावद एवं दलोट पंचायत समितियों को शामिल किया गया है। निर्धारित समय सारिणी के मुताबिक इन चारों इलाकों में जिला परिषद तथा पंचायत समिति सदस्यों के पदों के लिए 4 नवंबर के दिन वोट डाले जाएंगे। इसके ठीक दो दिन बाद, यानी 6 नवंबर को इन्हीं चारों समितियों की ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव हेतु मतदान आयोजित होगा। जमीनी स्तर पर लोकतंत्र के इस पर्व में तत्परता बरतते हुए सरपंच और पंच पदों के नतीजे मतदान का समय समाप्त होते ही उसी दिन घोषित कर दिए जाएंगे। इसके उपरांत 7 नवंबर की तारीख को संबंधित ग्राम पंचायतों में उपसरपंच चुनने की औपचारिकता पूरी कराई जाएगी।
चौथे चरण में शेष चार समितियों का चुनावी समीकरण
निर्वाचन कार्यक्रम के चतुर्थ चरण में प्रतापगढ़, अरनोद, पीपलखूंट और सुहागपुरा पंचायत समितियों के इलाके शामिल किए गए हैं। इन चारों क्षेत्रों में जिला परिषद तथा पंचायत समिति सदस्य पदों के लिए 14 नवंबर को मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग करेंगे। इसके पश्चात 16 नवंबर को ग्रामीण मतदाता सरपंच और वार्ड पंच प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करने मतदान केंद्रों पर पहुंचेंगे। पूर्व चरण की भांति इस चरण में भी वोटिंग खत्म होने के तुरंत बाद उसी दिन सरपंच और वार्ड पंच के परिणामों का आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा। अगले दिन यानी 17 नवंबर को इन पंचायतों में उपसरपंच का चयन संपन्न होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सभी 693 मतदान केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े पहरे का बंदोबस्त किया जा रहा है, ताकि हर नागरिक बिना किसी दबाव के मतदान कर सके।
नामांकन, संवीक्षा और नाम वापसी की समय सीमा
जिला परिषद सदस्यों के चुनाव की औपचारिक शुरुआत 8 अक्टूबर को अधिसूचना तथा लोकसूचना के प्रकाशन के साथ होगी, जिसके तुरंत बाद पूर्वाह्न 11 बजे से पर्चे दाखिल करने की प्रक्रिया आरंभ हो जाएगी। नामांकन पत्र स्वीकार करने की आखिरी मियाद 13 अक्टूबर को अपराह्न 3 बजे तक रखी गई है। अगले दिन 14 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच यानी संवीक्षा की जाएगी। यदि कोई प्रत्याशी मैदान से हटना चाहता है, तो वह 15 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे तक अपनी उम्मीदवारी वापस ले सकता है। नाम वापसी का समय खत्म होते ही उसी रोज शेष उम्मीदवारों को चुनाव चिह्नों का आवंटन कर दिया जाएगा। दूसरी ओर, पंचायत समिति सदस्यों के लिए नामांकन दाखिल करने का दौर तीसरे चरण में 19 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक चलेगा, जबकि चौथे चरण में यह प्रक्रिया 31 अक्टूबर से 4 नवंबर तक चलेगी। इसके अतिरिक्त सरपंच व पंच पदों के लिए नामांकन, संवीक्षा और प्रतीक आवंटन की सारी औपचारिकताएं तीसरे चरण के लिए 5 नवंबर को और चौथे चरण के लिए 15 नवंबर को पूरी की जाएंगी।
ईवीएम और मतपेटी का संगम, 20 नवंबर को अंतिम परिणाम
इस बार मतदान के दौरान आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक तकनीक और पारंपारिक व्यवस्था का अनोखा समन्वय देखने को मिलेगा। उच्च स्तर के पदों यानी जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मल्टी पोस्ट मल्टी वोट मॉडल वाली ईवीएम का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके विपरीत ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच और वार्ड पंच के निर्वाचन के लिए पारंपरिक मतपत्र और मतपेटी प्रणाली लागू रहेगी। मतदान का वक्त सभी चरणों में प्रातः 7 बजे से सायं 6 बजे तक तय किया गया है। जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्यों के मतों की गिनती 20 नवंबर को सुबह 8 बजे से प्रारंभ होगी और उसी दिन अंतिम नतीजे सामने आ जाएंगे। शीर्ष पदों के गठन की कड़ी में 25 नवंबर को जिला प्रमुख तथा 26 नवंबर को उप जिला प्रमुख का चुनाव होगा। अंत में 27 नवंबर को प्रधान और 28 नवंबर को उप प्रधान के निर्वाचन के साथ पंचायती राज संस्थाओं के गठन का यह महासमर संपन्न हो जाएगा।
















