पाली नगर निगम चुनाव को लेकर शहर का सियासी तापमान तेजी से चढ़ रहा है। चुनावी मैदान में उतरने के इच्छुक उम्मीदवार अपनी-अपनी बिसात बिछाने में जुट गए हैं। नगर निगम कार्यालय में बनाए गए विशेष हेल्प डेस्क पर नामांकन फॉर्म लेने के लिए दावेदारों की लगातार भीड़ उमड़ रही है। अब तक शहर के अलग-अलग वार्डों के लिए 516 संभावित प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र प्राप्त कर लिए हैं। हालांकि, इसके मुकाबले आधिकारिक तौर पर पर्चा दाखिल करने वालों का आंकड़ा अभी बेहद कम है और महज 13 उम्मीदवारों ने ही अपने फॉर्म जमा कराए हैं।
पर्चों की भारी मांग लेकिन जमा हुए बेहद कम
हेल्प डेस्क से 516 पर्चे लिए जाने के बावजूद केवल 13 फॉर्म जमा होना इस बात का संकेत है कि अधिकांश प्रत्याशी अभी सही समय का इंतजार कर रहे हैं। नामांकन पत्र खरीदने वालों की लंबी कतारों ने पाली में निकाय चुनाव के माहौल को गरमा दिया है। विभिन्न वार्डों में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं, और कार्यकर्ता घर-घर जाकर अपनी जमीन मजबूत करने में लगे हैं। इसके बावजूद आधिकारिक पर्चा दाखिल करने में देरी का मुख्य कारण राजनीतिक पार्टियों का रुख तय न होना है।
प्रमुख दलों की देरी से बढ़ी नेताओं की बेचैनी
नगर निगम चुनाव में मुख्य राजनीतिक दलों की ओर से टिकट बंटवारे में हो रही देरी सबसे बड़ा कारण बनी हुई है। शहर के कई प्रमुख वार्डों में पार्टियों ने अभी तक अपने अधिकृत प्रत्याशियों के नामों का ऐलान नहीं किया है। इस वजह से टिकट की दौड़ में शामिल दावेदारों के बीच भारी असमंजस और घबराहट का माहौल देखा जा रहा है। अपना टिकट पक्का कराने के लिए संभावित प्रत्याशी लगातार वरिष्ठ नेताओं के चक्कर काट रहे हैं और स्थानीय संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों से संपर्क साध रहे हैं। हर कोई पार्टी हाईकमान तक अपनी दावेदारी मजबूती से पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।
स्थानीय समीकरण और नाम वापसी का गणित
टिकट वितरण को अंतिम रूप देने के लिए राजनीतिक दलों के भीतर मैराथन बैठकों और विचार-विमर्श का दौर चल रहा है। एक तरफ जहां दावेदार अपने-अपने वार्डों में जनसंपर्क अभियान चलाकर समर्थन जुटा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टियां उम्मीदवार तय करने के लिए कई तरह के मानकों पर विचार कर रही हैं। चयन प्रक्रिया के दौरान जीत की प्रबल संभावना, स्थानीय सामाजिक समीकरणों और वार्ड में दावेदार की व्यक्तिगत राजनीतिक पकड़ का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि 516 फॉर्म लेने वालों में से वास्तव में कितने लोग चुनावी रण में उतरते हैं। इसके अलावा, नामांकन पत्र जमा होने के बाद भी चुनावी तस्वीरें बदलती रहेंगी। पर्चे वापस लेने की अंतिम तिथि समाप्त होने तक कई वार्डों में प्रत्याशियों का अंतिम आंकड़ा और मुकाबले का रूप पूरी तरह से बदल सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें राजनीतिक दलों द्वारा जारी की जाने वाली आधिकारिक सूची पर टिकी हैं। जैसे-जैसे नाम फाइनल होंगे और नामांकन में तेजी आएगी, पाली के इस निकाय चुनाव की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।





















