खेत की मिट्टी और पानी की गुणवत्ता परखने के लिए अब किसानों को दूरदराज के जिला मुख्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलने जा रही है। अब ग्रामीण इलाकों के नजदीक स्थित पीएमश्री स्कूलों में ही मिट्टी और पानी की जांच की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। कृषि विभाग की इस पहल के तहत प्रदेशभर के 549 पीएमश्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। इनमें सीकर जिले के कुल 26 विद्यालय भी शामिल किए गए हैं, जिससे स्थानीय किसानों को समय पर अपनी भूमि की सेहत की सटीक जानकारी मिल सकेगी और वे संतुलित खाद व उर्वरकों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे सकेंगे।
इसी साल दिसंबर तक शुरू होगी जांच सुविधा
कृषि विभाग ने इन चयनित पीएमश्री विद्यालयों में इसी साल दिसंबर महीने तक लैब स्थापित कर विधिवत रूप से जांच सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य तय किया है। प्रत्येक स्कूल के लिए लगभग एक लाख रुपए का वित्तीय बजट स्वीकृत किया गया है। इसी तय राशि के माध्यम से प्रयोगशाला के लिए आवश्यक आधुनिक उपकरण, केमिकल किट और विभिन्न टेस्टिंग रीएजेंट खरीदे जाएंगे। सबसे पहले इन सभी चयनित विद्यालयों को आधिकारिक सॉइल हेल्थ कार्ड पोर्टल के साथ जोड़ा जाएगा, जिसके बाद ही मिट्टी और पानी के नमूनों की जांच का कार्य सुचारू रूप से आगे बढ़ेगा।
छात्रों को मिलेगा व्यावहारिक कृषि विज्ञान का ज्ञान
इस पूरी योजना का एक सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि विद्यालय परिसर में बनने वाली ये लैब केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए भी लर्निंग सेंटर साबित होंगी। स्कूल के कक्षा 7, 8, 9 और 11वीं के विद्यार्थियों को खेतों से मिट्टी और पानी के नमूने एकत्र करने तथा उनकी लैब में जांच करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। संबंधित स्कूलों के शिक्षक और कृषि विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर बच्चों को प्रशिक्षित करेंगे। इससे छात्रों को केवलता किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर कृषि विज्ञान और आधुनिक तकनीकी पहलुओं की गहरी समझ प्राप्त होगी।
डिजिटल तकनीक से लैस होगी पूरी परीक्षण प्रक्रिया
मिट्टी और पानी की जांच व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए इस संपूर्ण प्रक्रिया को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ा जाएगा। जब खेत से सैंपल एकत्र किया जाएगा, तभी एक विशेष मोबाइल एप के जरिए संबंधित किसान का पूरा विवरण और उसकी सटीक जीपीएस लोकेशन दर्ज की जाएगी। इससे यह आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा कि नमूना वास्तव में किस खेत से आया है और उसकी जांच का काम वर्तमान में किस चरण तक पहुंचा है। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी परिणाम ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर दिए जाएंगे और किसान को डिजिटल सॉइल हेल्थ कार्ड सौंप दिया जाएगा।
सीकर जिले में बढ़ेगी जांच की क्षमता और दायरा
सीकर जिले में मिट्टी की जांच की मांग और उसकी मौजूदा स्थिति का अंदाजा इसी आंकड़े से लगाया जा सकता है कि यहां हर साल 30 हजार से ज्यादा किसान अपने खेतों की मिट्टी का सैंपल लेकर जांच केंद्रों पर पहुंचते हैं। हालांकि मौजूदा व्यवस्था में सीमित संसाधनों के चलते इनमें से करीब 12 हजार सैंपलों की ही जांच हो पाती है। जिला मुख्यालयों से काफी दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले अन्नदाताओं के लिए बार-बार वहां जाना, सैंपल जमा कराना और रिपोर्ट हासिल करना एक बेहद समय लेने वाली प्रक्रिया बन जाती है। ऐसे में ग्रामीण विद्यालयों में ही ये लैब शुरू होने से जिले की कुल जांच क्षमता में भारी इजाफा होगा और किसानों को उनके घर के पास ही बड़ी राहत मिलेगी।
संतुलित उर्वरक प्रबंधन से सुधरेगी जमीन की सेहत
समय पर मिट्टी की वैज्ञानिक जांच न हो पाने के अभाव में कई बार किसान जमीन की वास्तविक पोषण संबंधी जरूरतों को जाने बिना ही मनमाने तरीके से रासायनिक खादों और उर्वरकों का इस्तेमाल करने लगते हैं। इससे न केवल खेती की कुल लागत बढ़ती है, बल्कि धीरे-धीरे मिट्टी की प्राकृतिक गुणवत्ता और उपजाऊपन भी प्रभावित होने लगता है। सॉइल हेल्थ कार्ड के माध्यम से किसानों को उनकी मिट्टी में मौजूद विभिन्न पोषक तत्वों और उसकी असल जरूरत के मुताबिक खाद एवं उर्वरक प्रबंधन की सही जानकारी मिल सकेगी। इससे आने वाले समय में संतुलित पोषण प्रबंधन के जरिए बेहतर और उन्नत कृषि उत्पादन हासिल करने में काफी मदद मिलने की पूरी उम्मीद है।



















