श्रीलंका के खिलाफ पहला टेस्ट गॉल में शुरू: स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण के बाद मैदान में उतरी भारतीय टीम, शुबमन गिल संभाल रहे कप्तानीकोमल रानी स्वर्णकार के साथ 2 फिल्मों में नजर आएंगे गोविंदा, अफेयर की चर्चाओं के बीच आया नया अपडेट80वें स्वतंत्रता दिवस पर गॉल में तिरंगा फहराते नजर आए भारतीय खिलाड़ी, सचिन तेंदुलकर और रोहित शर्मा समेत कई दिग्गजों ने दिए खास संदेशगॉल में 80वें स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराकर मैदान में उतरी टीम इंडिया, खेल रही अपना ऐतिहासिक 600वां टेस्टनागौर में 100 करोड़ रुपये की सिंथेटिक ड्रग लैब का भंडाफोड़, किराए के मकान से आरोपी महावीर गिरफ्तारनल्लामाला के जंगलों में ओखली में बिना सहारे टिकता है मूसल, श्रीशैलम के मल्लम्मा कन्नेरु की अनोखी परंपराजनरेशन जेड को लेकर मोहन भागवत की चेतावनी, कहा सही मार्गदर्शन न मिलने पर युवा बन सकते हैं समाज के लिए चुनौतीचंदौली में गंगा का जलस्तर बढ़ने से प्रशासन चौकस, राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने मारुफपुर में परखा तैयारी का हालउत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में तेंदुए का खौफ, हमले में महिला की जान गई और कई जख्मी, वन विभाग ने तीन तेंदुए पकड़ेसशस्त्र बलों में क्लास-1 अधिकारी पद का रास्ता, खड़कवासला और एझिमाला की ट्रेनिंग में हैं ये बड़े बदलाव
नागौर में 100 करोड़ रुपये की सिंथेटिक ड्रग लैब का भंडाफोड़, किराए के मकान से आरोपी महावीर गिरफ्तारराजस्थान
15 अग॰ 2026, 11:23 am (1 घंटे पहले)· 3

नागौर में 100 करोड़ रुपये की सिंथेटिक ड्रग लैब का भंडाफोड़, किराए के मकान से आरोपी महावीर गिरफ्तार

राजस्थान के नागौर में पुलिस ने एक अवैध एमडीएमए ड्रग फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है। 28 वर्षीय आरोपी महावीर ने नौकरी छोड़कर किराए के मकानों में 100 करोड़ रुपये से अधिक की ड्रग्स और केमिकल का सेटअप तैयार कर रखा था।

राजस्थान के नागौर जिले में पुलिस प्रशासन ने एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले अवैध ड्रग निर्माण नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस की विशेष कार्रवाई में 100 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की अवैध एमडीएमए ड्रग्स, कैफीन और भारी मात्रा में तरल केमिकल बरामद किए गए हैं। इस पूरे गैर-कानूनी खेल का मुख्य सूत्रधार 28 साल का महावीर नाम का युवक बताया जा रहा है, जिसने जल्दी और ज्यादा पैसा कमाने के लालच में अपनी सामान्य नौकरी छोड़ दी थी। किराए के मकानों को लैब में बदलकर वह ऑनलाइन जुटाए गए ज्ञान के आधार पर सिंथेटिक ड्रग्स तैयार करने की कोशिश कर रहा था। पुलिस की तकनीकी जांच और छापेमारी ने इस पूरी साजिश का भंडाफोड़ कर दिया है।

नौकरी छोड़कर अवैध रास्ते पर बढ़ा कदम

जांच अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी महावीर मूल रूप से नागौर के कुचेरा इलाके के लक्ष्मणपुरा का निवासी है और हाल के दिनों में नागौर शहर की दीप कॉलोनी में निवास कर रहा था। वह पहले एक निजी नौकरी में कार्यरत था, लेकिन वहां मिलने वाले वेतन से संतुष्ट नहीं था। कम समय में अकूत संपत्ति कमाने की चाहत में उसने फरवरी 2026 में अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। हालांकि पुलिस पड़ताल में यह बात सामने आई है कि उसने नौकरी छोड़ने से पहले ही यानी दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के मध्य एमडीएमए जैसे खतरनाक नशीले पदार्थ को बनाने की कोशिशें शुरू कर दी थीं। शुरुआती दौर में उसके प्रयोग असफल रहे, जिसके बाद उसने इंटरनेट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए केमिकल रिएक्शन और निर्माण प्रक्रिया की बारीक जानकारी जुटानी शुरू की।

ये भी पढ़ें

ऑनलाइन अध्ययन और सामग्री जुटाने के बाद महावीर ने राजस्थान के स्थानीय इलाकों में किराए पर मकान लेना शुरू किया। इन मकानों को बाहर से साधारण रिहायशी ठिकाना दिखाया जाता था, लेकिन भीतर अवैध केमिकल लैब की पूरी व्यवस्था खड़ी की जा रही थी। धीरे-धीरे उसने बाजार से रासायनिक पदार्थ, लैब में इस्तेमाल होने वाले वैज्ञानिक उपकरण और प्रोसेसिंग मशीनरी जुटा ली।

किराए के मकानों में तैयार किया गया अवैध सेटअप

पुलिस रेड के दौरान किराए के परिसरों से जो उपकरण और सामग्री बरामद हुई, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। दीप कॉलोनी और जोधपुर रोड स्थित परिसरों से सिर्फ तैयार नशीला पदार्थ ही नहीं मिला, बल्कि पूरा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित पाया गया। पुलिस टीमों ने मौके से अत्याधुनिक मिक्सिंग मशीन, डिजिटल थर्मामीटर, मैग्नेटिक स्टेयरर, पीएच मीटर, विशेष ग्लास बीकर, कांच के बड़े जार, प्लास्टिक की कड़ाइयां और एमडीएमए को सुखाकर तैयार करने वाली बड़ी-बड़ी ट्रे और प्लेटें जब्त कीं।

इन उपकरणों की मौजूदगी स्पष्ट तौर पर यह दर्शाती है कि आरोपी सिर्फ ड्रग्स की तस्करी या खरीद-फरोख्त में शामिल नहीं था, बल्कि वह कच्चे माल से तैयार एमडीएमए बनाने की पूरी इंडस्ट्रियल प्रक्रिया खुद संचालित कर रहा था। नशीले पदार्थ की शुद्धता जांचने से लेकर उसके तापमान और पीएच स्तर को नियंत्रित करने के लिए प्रयोगशाला स्तर के उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

10 अगस्त की छापेमारी और जोधपुर रोड का दूसरा ठिकाना

मामले में सबसे बड़ा मोड़ 10 अगस्त 2026 को आया, जब नागौर की जिला विशेष टीम यानी डीएसटी (DST) को इस अवैध गतिविधि की गुप्त सूचना प्राप्त हुई। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने दीप कॉलोनी स्थित मकान पर अचानक दबिश दी और महावीर को हिरासत में ले लिया। प्राथमिक कार्रवाई के दौरान ही पुलिस को लगभग 20 करोड़ रुपये मूल्य की सामग्री और संदिग्ध रसायन मिले थे।

इसके बाद जब आरोपी से कड़ी पूछताछ की गई और उसके तकनीकी डेटा का विश्लेषण हुआ, तो एक अन्य ठिकाने का सुराग मिला। पुलिस टीमों ने जोधपुर रोड स्थित एक दूसरे किराए के मकान पर तुरंत रेड मारी। इस दूसरे ठिकाने से पुलिस के हाथ अवैध ड्रग्स का मुख्य जखीरा लगा, जिसने मामले के पैमाने को कई गुना बढ़ा दिया।

100 करोड़ रुपये का जखीरा और पुलिस की बरामदगी

जोधपुर रोड वाले परिसर की तलाशी में पुलिस को 5.418 किलोग्राम तैयार एमडीएमए बरामद हुई। इसके साथ ही 2.744 किलोग्राम कैफीन पाउडर, 24 अलग-अलग श्रेणियों के रसायनिक पदार्थ और लगभग 210 लीटर तरल केमिकल जब्त किए गए। जांच एजेंसियों और नारकोटिक्स विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब्त की गई एमडीएमए और रसायनों की कुल अनुमानित कीमत 100 करोड़ रुपये से भी अधिक है।

कैफीन पाउडर का इस्तेमाल अक्सर ड्रग्स की मात्रा बढ़ाने और उसे अधिक तीखा बनाने में मिलावट के तौर पर किया जाता है। इतनी विशाल मात्रा में कैफीन और तरल रसायनों की मौजूदगी से यह साबित होता है कि बड़े पैमाने पर नशीली गोलियों और पाउडर की सप्लाई चेन तैयार की जा रही थी। इस बरामदगी के बाद अब राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां कच्चे माल के मुख्य सप्लायरों का पता लगाने में जुट गई हैं।

12 सिम कार्ड और डिजिटल पहचान बदलने का पैंतरा

आरोपी की डिजिटल गतिविधियों की जांच में पुलिस के सामने चौकने वाले तथ्य आए हैं। महावीर के पास से लगभग 10 से 12 मोबाइल सिम कार्ड पाए गए हैं। कानून प्रवर्तन एजेंसियों की नजर से बचने के लिए वह किसी भी एक मोबाइल नंबर का इस्तेमाल लंबे समय तक नहीं करता था। वह हर 10 दिन के भीतर अपना सिम कार्ड और फोन नंबर बदल देता था ताकि कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर उसकी लोकेशन ट्रेस न हो सके।

पुलिस अब महावीर के सभी पुराने और नए सिम कार्डों के कॉल रिकॉर्ड्स, इंटरनेट प्रोटोकॉल विवरण और डिजिटल चैट की फॉरेंसिक जांच कर रही है। इन तकनीकी सुरागों के माध्यम से उन सफेदपोश और आपराधिक तत्वों की पहचान की जा रही है जो महावीर को रासायनिक कच्चे माल की आपूर्ति कर रहे थे या उससे तैयार माल खरीदने के वादे कर चुके थे।

चार सहयोगियों की भूमिका और जांच का दायरा

पुलिस जांच का दायरा अब केवल महावीर तक सीमित नहीं रहा है। शुरुआती पूछताछ और मोबाइल डेटा के आधार पर चार अन्य सहयोगियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। पुलिस की विशेष टीमें इन चारों व्यक्तियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और उनकी सक्रिय भागीदारी की पड़ताल की जा रही है।

जांच अधिकारी मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं: पहला, प्रतिबंधित रसायनों की अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय डिलीवरी किसने कराई; दूसरा, लैब के लिए जरूरी वैज्ञानिक उपकरण किस माध्यम से खरीदे गए; और तीसरा, तैयार एमडीएमए को किन शहरों या नाइटक्लबों में खपाने की योजना थी। पुलिस प्रशासन का कहना है कि पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश जांच पूरी होने के बाद किया जाएगा।

सवाल-जवाब

नागौर ड्रग्स केस में गिरफ्तार मुख्य आरोपी कौन है?
मुख्य आरोपी 28 वर्षीय महावीर है, जो कुचेरा के लक्ष्मणपुरा का रहने वाला है और नागौर की दीप कॉलोनी में रह रहा था।
पुलिस ने छापेमारी में कितनी संपत्ति और ड्रग्स जब्त की है?
पुलिस ने 5.418 किलो एमडीएमए, 2.744 किलो कैफीन, 24 तरह के केमिकल और 210 लीटर तरल रसायन बरामद किए हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक है।
आरोपी महावीर ने एमडीएमए बनाना कैसे सीखा?
नौकरी छोड़ने के बाद महावीर ने ऑनलाइन माध्यमों और गूगल के जरिए एमडीएमए बनाने की प्रक्रिया सीखी और जरूरी केमिकल व उपकरण जुटाए।
पकड़े जाने से बचने के लिए आरोपी क्या पैंतरा अपनाता था?
आरोपी महावीर के पास 10 से 12 सिम कार्ड थे और वह पुलिस की सर्विलांस से बचने के लिए हर 10 दिन में अपना मोबाइल नंबर बदल देता था।
क्या इस मामले में अन्य आरोपी भी शामिल हैं?
हाँ, पुलिस पूछताछ के आधार पर चार अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है और केमिकल सप्लाई चेन का पता लगा रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 मिनट पहले

नागौर की यह घटना इस बात का गंभीर प्रमाण है कि कैसे इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी का दुरुपयोग करके अकेले व्यक्ति भी खतरनाक सिंथेटिक ड्रग्स का निर्माण कर सकते हैं। किराए के मकानों में ऐसा इंडस्ट्रियल सेटअप खड़ा करना और एमडीएमए जैसी ड्रग्स का उत्पादन करना स्थानीय खुफिया तंत्र और मकान मालिकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। आगे की जांच में यह खंगालना जरूरी होगा कि इस 100 करोड़ के नेटवर्क के पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट या वित्तीय मददगार तो नहीं था।

Rohan Verma@rohan-verma·1 मिनट पहले

सहकर्मी के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह रेखांकित करना आवश्यक है कि 28 वर्षीय आरोपी द्वारा नौकरी छोड़कर इस तरह की गुप्त लैब का संचालन करना आधुनिक संगठित अपराध की बदलती प्रकृति को दर्शाता है। ऑनलाइन माध्यमों से तकनीकी ज्ञान हासिल कर किराए के मकानों को उत्पादन केंद्र में बदलना यह स्पष्ट करता है कि अब अपराधियों को बड़े बुनियादी ढांचे की आवश्यकता नहीं है। इस मामले में पुलिस के लिए यह पता लगाना सबसे बड़ी चुनौती होगी कि इस भारी-भरकम रासायनिक आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय स्तर के नेटवर्क के पीछे कौन लोग वित्तपोषण कर रहे थे।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR