राजस्थान भर में मानसून की बेरुखी अब केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रदेश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण जलस्रोतों में गिने जाने वाले बीसलपुर बांध की घटती रफ्तार में साफ दिखाई दे रही है। पिछले एक सप्ताह से राज्यभर में बादलों की आवाजाही सुस्त पड़ी है, जिसके परिणामस्वरूप मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि कुल बारिश का औसत सामान्य से 21 फीसदी नीचे आ गया है। इस पूरे परिदृश्य ने जल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों और आम जनता दोनों की नींद उड़ा दी है।
कम बारिश और बिगड़ता जल संतुलन
आंकड़ों के अनुसार, 23 अगस्त तक राज्य में कुल 336.5 एमएम बारिश दर्ज होनी चाहिए थी, लेकिन वास्तविकता में केवल 265.8 एमएम पानी ही बरस पाया है। इस भारी कमी ने लगभग पूरे प्रदेश को सूखे या कम बारिश वाले क्षेत्रों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है। इसका सीधा असर उन इलाकों पर पड़ रहा है जो अपनी दैनिक जलापूर्ति के लिए पूरी तरह मानसूनी बारिश पर निर्भर रहते हैं। राजधानी जयपुर के साथ-साथ अजमेर और टोंक जैसे घनी आबादी वाले जिलों की प्यास बुझाने वाला बीसलपुर बांध भी इसी जल संकट की चपेट में आ गया है।
बांध का मौजूदा जलस्तर और भंडारण
बीसलपुर बांध की स्थिति पर नजर डालें तो 22 अगस्त तक इसका जलस्तर लगभग 314.6 मीटर दर्ज किया गया था, जिसमें करीब 28.5 टीएमसी पानी का भंडारण मौजूद है। इस प्रमुख जलाशय की कुल भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर तय की गई है। इस हिसाब से देखा जाए तो बांध को पूरी तरह भरने के लिए अभी भी लगभग 10 टीएमसी अतिरिक्त पानी की आवश्यकता है। पिछले साल ठीक इसी समय यानी अगस्त के महीने में बीसलपुर लबालब भर चुका था, लेकिन वर्तमान सीजन में अंतिम सप्ताह की दहलीज पर पहुंचने के बावजूद यह अपने पूर्ण लक्ष्य से काफी दूर है।
अनेक जिलों में गहराता सूखा
प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की स्थिति बेहद असंतुलित रही है। राज्य के कुल 17 जिलों में इसकी मार सबसे ज्यादा महसूस की जा रही है। अगर विशेष आंकड़ों की बात करें तो जालौर में सामान्य से 54 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा पाली में 43 प्रतिशत, बांसवाड़ा में 40 प्रतिशत, जैसलमेर में 38 प्रतिशत और डूंगरपुर में 31 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज हुई है। खुद राजधानी जयपुर के निवासियों को भी सामान्य से 23 प्रतिशत कम मानसूनी बारिश का सामना करना पड़ रहा है।
कुछ अपवाद और घटती आवक
इस व्यापक कमी के बीच केवल दो ऐसे जिले रहे जहां आंकड़े सकारात्मक दिशा में गए। झुंझुनूं में सामान्य से 29 प्रतिशत अधिक पानी गिरा, जबकि भरतपुर में यह आंकड़ा 26 फीसदी ज्यादा रहा। हालांकि इन छिटपुट सकारात्मक आंकड़ों से बड़े जलाशयों की सेहत पर खास फर्क नहीं पड़ा। बीसलपुर बांध में आने वाले पानी की रफ्तार लगातार धीमी बनी हुई है। उदाहरण के लिए, 16 से 19 अगस्त के बीच के चार दिनों में बांध का स्तर मात्र 3 सेंटीमीटर ही ऊपर उठ पाया। इसके कैचमेंट एरिया में बादलों की बेरुखी से त्रिवेणी नदी का जलस्तर भी नीचे आया है, जहां 17 अगस्त को गेज 2.60 मीटर था जो अगले दिन घटकर 2.50 मीटर पर आ गया।
पेयजल संकट की आशंका
बीसलपुर बांध पर केवल जयपुर, अजमेर और टोंक की शहरी आबादी ही नहीं टिकी है, बल्कि इन तीनों जिलों के लगभग 2,491 गांव भी इसी की नहरों और योजनाओं पर निर्भर हैं। टोंक, देवली और उनियारा जैसे शहरों के अलावा टोंक पेयजल परियोजना के जरिए सैकड़ों गांवों तक पानी पहुंचाया जाता है। यदि आने वाले दिनों में कैचमेंट क्षेत्रों में झमाझम बारिश नहीं हुई और त्रिवेणी का बहाव तेज नहीं हुआ, तो इस बार बांध का शत-प्रतिशत भरना बेहद कठिन साबित होगा, जिससे आने वाले महीनों में जलापूर्ति के मोर्चे पर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।



















