राजस्थान के टोंक शहर में एक बड़े अंतरराज्यीय ठग गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है जो बैंकों को अपनी ठगी का शिकार बनाता था। टोंक की कोतवाली थाना पुलिस ने इस गिरोह के सात सदस्यों को दबोचने में सफलता हासिल की है। यह शातिर गिरोह बैंक में असली सोने के नाम पर नकली आभूषण गिरवी रखता था और इसके एवज में भारी-भरकम राशि का गोल्ड लोन स्वीकृत करा लेता था। पुलिस ने इन बदमाशों के पास से नकली सोने की आठ चूड़ियां और वारदात में इस्तेमाल की जाने वाली दो गाड़ियां भी जब्त की हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इन अपराधियों का नेटवर्क केवल राजस्थान के विभिन्न जिलों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह दूसरे राज्यों में भी इसी तरह की धूर्तता भरी वारदातों को अंजाम दे चुका है।
बैंक मैनेजर की सतर्कता से खुला पूरा राज
इस शातिर खेल का खुलासा तब हुआ जब गिरोह का एक सक्रिय सदस्य अंकित शर्मा टोंक के एक निजी बैंक में दोबारा ऋण लेने के लिए पहुंचा। वह इससे पहले भी इसी बैंक में नकली सोने की चार चूड़ियां गिरवी रखकर चार लाख चालीस हजार रुपये का लोन ले चुका था। जब वह दूसरी बार लोन लेने के लिए बैंक के अंदर दाखिल हुआ, तो बैंक मैनेजर को उसकी हरकतों और उसके द्वारा लाए गए गहनों की चमक-दमक पर संदेह हुआ। मैनेजर ने बिना कोई वक्त गंवाए इसकी सूचना तुरंत कोतवाली पुलिस को दी। खबर मिलते ही कोतवाली थानाधिकारी भंवरलाल वैष्णव के निर्देशन में पुलिस दल ने फौरन बैंक पहुंचकर मोर्चा संभाला और घेराबंदी करते हुए आरोपी को दबोच लिया। इसके बाद पुलिस ने कड़ी पूछताछ की और तफ्तीश का दायरा बढ़ाते हुए गिरोह के बाकी छह साथियों को भी धर दबोचा। पकड़े गए अन्य आरोपियों की शिनाख्त अजहरूद्दीन, भंवर सिंह, दीपक शर्मा, सिकंदर कुमावत, शहजाद और भंवरलाल खारोल के रूप में हुई है।
उत्तर प्रदेश के मेरठ से लाते थे नकली आभूषण
पुलिस की पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कबूल किया कि वे इस धोखाधड़ी के लिए खास तैयारी करते थे। वे उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर से तांबा या अन्य धातु पर सोने की मोटी पॉलिश चढ़ी हुई कृत्रिम चूड़ियां खरीदकर लाते थे। इन नकली चूड़ियों को इस तरीके से तैयार किया जाता था कि पहली नजर में कोई भी इन्हें असली सोने का समझ ले। इसके बाद आरोपी इन्हें अलग-अलग बैंकों में असली सोना बताकर जमा करवाते थे और गोल्ड लोन की आसान नीतियों का गलत फायदा उठाकर लाखों रुपये ऐंठ लेते थे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह टोंक शहर के भीतर पहले ही दो अलग-अलग बैंकों को चूना लगा चुका था। इतना ही नहीं, ये शातिर अपराधी किसी तीसरे बैंक में भी ऐसे ही नकली आभूषण रखकर ऋण लेने की फिराक में थे, लेकिन बैंक मैनेजर की चौकसी के कारण उनकी यह साजिश समय रहते नाकाम हो गई।
पूछताछ में और बड़े खुलासे होने की उम्मीद
कोतवाली थानाधिकारी भंवरलाल वैष्णव ने मीडिया को बताया कि पुलिस हिरासत में मौजूद सभी सातों आरोपियों से गहराई से पूछताछ की जा रही है। जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना है कि इस संगठित गिरोह ने राजस्थान के किन-किन अन्य जिलों और देश के कौन-से दूसरे राज्यों में वित्तीय संस्थानों को ठगा है। पुलिस इन बदमाशों के पुराने आपराधिक इतिहास और विभिन्न बैंकों के लोन रिकॉर्ड को भी खंगालने में जुटी हुई है। आरोपियों के पास से बरामद की गई आठ नकली चूड़ियों और दो कारों को सबूत के तौर पर जब्त कर लिया गया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ की यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़ी अन्य आपराधिक वारदातों और उनके अन्य सहयोगियों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।



















