राजस्थान के निकाय चुनावों में पाली नगर निगम के नतीजों ने सबको चौंका दिया है, जहाँ सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद कांग्रेस अपना मेयर नहीं बना पाई। नगर निगम के कुल 65 वार्डों में से कांग्रेस ने 29 सीटों पर परचम लहराया था, जबकि भारतीय जनता पार्टी को केवल 21 वार्डों में कामयाबी मिली थी। इसके बावजूद चुनावी गणित और क्रॉस वोटिंग के फेर में भाजपा की नमिता बुबकिया ने बाजी मारते हुए पाली नगर निगम की पहली निर्वाचित महापौर बनने का गौरव हासिल किया।
त्रिकोणीय मुकाबले में पलटा चुनावी समीकरण
पाली नगर निगम के महापौर चुनाव में मुकाबला काफी कड़ा और दिलचस्प रहा। यहाँ भाजपा प्रत्याशी नमिता बुबकिया, कांग्रेस प्रत्याशी और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच त्रिकोणीय संघर्ष देखने को मिला। नाम वापसी के अंतिम दौर में कुसुम, पुष्पा और रशीदा ने अपने नाम वापस ले लिए थे, जिसके बाद मैदान में नमिता, सुमित्रा और राजबाला के बीच मुख्य मुकाबला तय हुआ। अंतिम नतीजों में नमिता बुबकिया ने निर्दलीय प्रत्याशी को 4 मतों के अंतर से शिकस्त देकर नगर निगम बोर्ड पर भाजपा का परचम लहरा दिया।
कांग्रेस पार्षदों की टूट और भारी क्रॉस वोटिंग
इस चुनाव का सबसे हैरान करने वाला पहलू कांग्रेस पार्टी का वोट बैंक बिखरना रहा। सदन में 29 निर्वाचित पार्षद होने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी को मात्र 3 मत ही हासिल हो सके। सदन में मौजूद 15 निर्दलीय पार्षदों और असंतुष्ट खेमों के रुख ने पूरे मुकाबले का रुख मोड़ दिया। इस भारी क्रॉस वोटिंग और बगावत ने साफ कर दिया कि स्थानीय स्तर पर पार्षद दल अपनी पार्टी के पक्ष में एकजुट नहीं रह सका, जिसका सीधा फायदा भाजपा खेमे को मिला।
राजस्थान के 273 निकायों में हुआ मतदान
पाली के साथ ही राजस्थान भर में स्थानीय स्वशासन के बड़े स्तर पर चुनाव संपन्न हुए। राज्य के कुल 273 नगरीय निकायों में अध्यक्ष और 5 नगर निगमों में महापौर के पदों के लिए वोट डाले गए। कई निकायों में निर्दलीय पार्षदों और बाड़ाबंदी के बीच कड़ा मुकाबला देखा गया, जहाँ 32 निकायों में प्रमुखों का चुनाव पहले ही निर्विरोध संपन्न हो चुका था। पाली में बने इस नए समीकरण ने स्थानीय सियासत में नए समीकरण स्थापित कर दिए हैं।


















