राजस्थान के सीकर जिले में स्थित सुप्रसिद्ध खाटू धाम में सप्ताहांत के दौरान आस्था और श्रद्धा का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। शनिवार की अलसुबह मंगला आरती के समय से ही देश भर से आए श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था, जो रविवार को भी लगातार जारी रहा। भक्तों के अपार जनसैलाब को ध्यान में रखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने सामान्य दिनों में दोपहर के वक्त होने वाले कपाट बंदी के नियम को स्थगित कर दिया, जिससे दिनभर दोनों दिन दर्शन का सिलसिला बिना किसी रुकावट के चलता रहा। श्रद्धालुओं की भारी तादाद को सुगमता से दर्शन कराने के लिए 14 समानांतर कतारों की व्यवस्था अमल में लाई गई, साथ ही भीषण गर्मी से बचाव के लिए श्री श्याम मंदिर कमेटी ने भक्तों की सुख-सुविधा से जुड़े विशेष बंदोबस्त किए।
श्रृंगार दर्शन और रूट डायवर्जन के पुख्ता इंतजाम
सप्ताहांत की इस विशेष भीड़ के बीच बाबा श्याम का अलौकिक और मनमोहक श्रृंगार आकर्षण का केंद्र बना रहा। इस दिव्य श्रृंगार के लिए देश की राजधानी दिल्ली से खास तौर पर सफेद, हरे और गुलाबी रंग के सुगंधित ताजे फूल मंगवाए गए थे। बाबा को श्रृंगार आरती के साथ-साथ संध्या आरती के दौरान भी भव्य रूप से सुसज्जित किया गया। सोमवार को आने वाले दर्शनार्थियों के लिए सुगम मार्ग प्रबंधन सुनिश्चित किया गया है। भक्तों को तोरणद्वार, अस्पताल चौराहा, शनि मंदिर और लामियां तिराहा के तयशुदा रास्ते से होते हुए मुख्य प्रवेश द्वार तक पहुंचाया जा रहा है।
मंदिर परिसर के भीतर 75 फीट चौड़े विशाल मार्ग पर 14 पंक्तियों में कतारबद्ध होकर श्रद्धालु गर्भगृह के सामने पहुंच रहे हैं। व्यवस्था को नियंत्रित रखने के मकसद से कतार प्रबंधन, मजबूत बैरिकेडिंग और सुरक्षा कर्मियों की चाक-चौबंद तैनाती की गई है। व्यवस्था बनाए रखने के लिए सामान्य वीआईपी दर्शन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है, और केवल प्रोटोकॉल श्रेणी के अंतर्गत आने वाले व्यक्तियों को ही इस मार्ग से प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।
जलझूलनी एकादशी पर 24 घंटे दर्शन और विशेष पूजन
आगामी 22 सितम्बर को जलझूलनी एकादशी का पावन पर्व मनाया जाएगा, जिसको लेकर खाटूश्याम जी में अगले दो से तीन दिनों तक श्रद्धालुओं की संख्या में और भी भारी इजाफा होने का अनुमान लगाया गया है। इस पावन तिथि पर बाबा श्याम के विशेष श्रृंगार के बीच भगवान श्री कृष्ण के बाल गोपाल स्वरूप को भी प्रतिष्ठित किया जाएगा। उत्सव के दिन आयोजित होने वाली पांचों आरतियों में बाल गोपाल की विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न होगी। भोग आरती के शुभ अवसर पर बाबा श्याम और बाल गोपाल को पारंपरिक माखन, मिश्री और मावे का महाभोग अर्पित किया जाएगा।
उत्सव के आकर्षण को बढ़ाने के लिए देश-विदेश से जुटाए गए दुर्लभ खुशबूदार फूलों से मंदिर और विग्रह का मनमोहक श्रृंगार किया जाएगा, जबकि बाबा श्याम को नवरत्न जड़ित स्वर्ण निर्मित नया मुकुट भी धारण कराया जाएगा। श्रद्धालुओं की संभावित प्रचंड भीड़ को संभालने के लिए मंदिर प्रबंधन ने निर्णय लिया है कि जलझूलनी एकादशी पर मंदिर के कपाट पूरे 24 घंटे खुले रखे जाएंगे। सामान्य दिनों में दोपहर 2:00 बजे से लेकर 4:00 बजे तक मंदिर के पट बंद रहते हैं, सिवाय शनिवार, रविवार तथा शुक्ल पक्ष की एकादशी एवं द्वादशी के। इसके अलावा आम रातों में रात्रि 10.30 बजे शयन आरती के उपरांत मंदिर बंद हो जाता है, लेकिन इस उत्सव पर दिन अथवा रात में कपाट बिल्कुल बंद नहीं होंगे।
हारे का सहारा बनने की पौराणिक गाथा
धार्मिक मान्यताओं में बाबा श्याम को कलयुग में हारे का सहारा माना जाता है और उन्हें साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का अवतार मानकर पूजा जाता है। महाभारत काल के प्रसंग के अनुसार, महाबली भीम के पौत्र बर्बरीक कौरवों के पक्ष से युद्ध भूमि में उतरने की तैयारी कर रहे थे। उसी समय भगवान श्रीकृष्ण ने एक ब्राह्मण का रूप धारण कर उनसे शीश का दान मांग लिया। वीर बर्बरीक ने बिना किसी संकोच अथवा हिचकिचाहट के अपना शीश काटकर भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया। उनके इस सर्वोच्च बलिदान और समर्पण से अत्यंत प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान प्रदान किया कि कलयुग के समय में वे उनके ही स्वरूप यानी श्याम नाम से पूजे जाएंगे और संसार में हर हारे हुए एवं निराश व्यक्ति का संबल बनेंगे। इसी दैवीय वरदान के कारण सदियों से बाबा श्याम को श्रद्धालु हारे के सहारे के रूप में भजते आ रहे हैं।

















