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राजस्थान में ग्राम पंचायत चुनाव की बिसात बिछी, चार आदिवासी जिलों में सारे पद एसटी के नामराजस्थान
25 सित॰ 2026, 4:08 pm (40 मिनट पहले)· 0

राजस्थान में ग्राम पंचायत चुनाव की बिसात बिछी, चार आदिवासी जिलों में सारे पद एसटी के नाम

राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 में परिसीमन और आरक्षण निर्धारण के बाद चार जिलों में पंच और सरपंच के सभी पद एसटी वर्ग के खाते में चले गए हैं, जबकि 7,200 पंचायतों का नेतृत्व महिलाएं करेंगी।

राजस्थान के ग्रामीण अंचलों में वर्ष 2026 के पंचायत चुनावों की तैयारी अब अपने निर्णायक मोड़ पर आ चुकी है। राज्य भर में ग्राम पंचायतों के आरक्षण निर्धारण की लॉटरी का काम संपन्न होते ही स्थानीय राजनीति की तस्वीर बिल्कुल बदल गई है। नए परिसीमन और जातिगत आरक्षण के लागू होने से ग्रामीण सत्ता के पुराने समीकरण पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं। इस चुनाव का सबसे अभूतपूर्व प्रभाव दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी इलाकों में नजर आ रहा है, जहाँ चार प्रमुख जिलों में सामान्य और अन्य वर्गों के लिए सरपंच अथवा वार्ड पंच पद की कोई गुंजाइश नहीं बची है।

चार जिलों में शत-प्रतिशत पद अनुसूचित जनजाति के लिए तय

नए प्रशासनिक नक्शे और नियमों के तहत प्रदेश के चार आदिवासी बहुल जिलों बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर में स्थानीय सत्ता पूरी तरह अनुसूचित जनजाति यानी एसटी वर्ग के प्रतिनिधियों के हाथ में रहेगी। इन चारों जिलों की प्रत्येक ग्राम पंचायत में सरपंच और सभी वार्ड पंचों के पद शत-प्रतिशत एसटी वर्ग के लिए ही आरक्षित किए गए हैं। इस निर्णय के चलते इन जिलों के चुनावी दंगल में सभी राजनीतिक दलों और स्थानीय गुटों को केवल इसी वर्ग के उम्मीदवारों के बीच से अपने चेहरे चुनने होंगे, जिससे यहाँ का शक्ति संतुलन पूरी तरह नए ढांचे में ढल चुका है।

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महिला नेतृत्व की अभूतपूर्व भागीदारी

नया परिसीमन लागू होने के बाद राजस्थान में ग्राम पंचायतों का कुल दायरा बढ़कर 14,403 तक पहुंच गया है। पंचायती राज कानून के तहत महिलाओं को मिलने वाले 50 प्रतिशत आरक्षण के चलते इस बार करीब 7,200 ग्राम पंचायतों की बागडोर महिला सरपंच संभालेंगी। पिछले चुनावों में 5,670 महिला सरपंच जीतकर आई थीं, जिसके मुकाबले इस बार महिला मुखियाओं की संख्या में 1,500 से अधिक का इजाफा हुआ है। इसी तरह वार्ड स्तर पर भी महिला प्रतिनिधित्व में बड़ा उछाल देखा जा रहा है। प्रदेश में करीब 65 हजार महिलाएं वार्ड पंच चुनकर पंचायत सदनों में बैठेंगी, जबकि पिछले कार्यकाल में यह संख्या लगभग 54 हजार तक ही सीमित थी।

सरपंच पदों का जातिवार आरक्षण ब्योरा

राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कुल 14,403 सरपंच पदों का वर्गीकरण पूरा हो चुका है। कुल पदों में से अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए 3,058 ग्राम पंचायतें आरक्षित की गई हैं। अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के हिस्से में 2,493 सरपंच पद आए हैं। इसके अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 1,961 पदों का कोटा निर्धारित किया गया है। शेष सामान्य श्रेणी सहित सभी आरक्षित श्रेणियों में महिलाओं के लिए निर्धारित 50 फीसदी हिस्सेदारी को पूरी कड़ाई से लागू किया गया है।

वार्ड पंचों का गणित और घड़साना में विरोध

ग्राम पंचायतों के वार्डों के स्तर पर लगभग 1.30 लाख पंच पदों के लिए आरक्षण लॉटरी निकाली गई है। वार्ड पंचों में एससी वर्ग के लिए 21,962 वार्ड, एसटी वर्ग के लिए 19,117 वार्ड तथा ओबीसी वर्ग के लिए तकरीबन 15 हजार वार्ड तय किए गए हैं। इस लॉटरी प्रक्रिया के दौरान श्रीगंगानगर जिले के घड़साना क्षेत्र में किसानों ने कड़ा ऐतराज जताया और विरोध प्रदर्शन किया, जिसकी वजह से कुछ देर के लिए आरक्षण निर्धारण का काम रोकना पड़ गया था। हालांकि बाद में प्रशासनिक अधिकारियों की समझाइश और बातचीत के बाद प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा करा लिया गया।

15 नवंबर तक पूरी होगी निर्वाचन प्रक्रिया

हाई कोर्ट के कड़े दिशा-निर्देशों के मद्देनजर राज्य में पंचायत चुनाव का पूरा कार्यक्रम 15 नवंबर तक संपन्न कराया जाना अनिवार्य है। शनिवार या सोमवार तक पंचायत समिति सदस्यों, जिला परिषद सदस्यों, वार्ड पंचों और सरपंचों के आरक्षण का अंतिम विवरण राज्य निर्वाचन आयोग को सौंप दिया जाएगा। इस ब्योरे की समीक्षा के एक से दो दिन बाद निर्वाचन आयोग विधिवत चुनावी तिथियों की घोषणा कर देगा। माना जा रहा है कि नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया अक्टूबर के पहले हफ्ते से शुरू कर दी जाएगी।

सवाल-जवाब

राजस्थान में परिसीमन के बाद ग्राम पंचायतों की कुल संख्या कितनी हो गई है?
नए परिसीमन के बाद राज्य में कुल ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़कर 14,403 हो गई है।
किन जिलों में सरपंच और वार्ड पंच के सभी पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं?
बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिलों में सभी सरपंच और पंच पद शत-प्रतिशत एसटी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं।
इस बार कितनी ग्राम पंचायतों की कमान महिला सरपंचों के हाथों में होगी?
पचास प्रतिशत आरक्षण के तहत इस बार लगभग 7,200 ग्राम पंचायतों की कमान महिला सरपंच संभालेंगी।
सरपंच पदों के लिए जातिवार आरक्षण का आंकड़ा क्या है?
एसटी वर्ग के लिए 3,058, एससी के लिए 2,493 और ओबीसी वर्ग के लिए 1,961 सरपंच पद आरक्षित किए गए हैं।
वार्ड पंच के कुल कितने पदों के लिए लॉटरी निकाली गई है?
प्रदेश भर में वार्ड पंचों के लगभग 1.30 लाख पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली गई है।
आरक्षण प्रक्रिया के दौरान विरोध प्रदर्शन कहाँ देखने को मिला?
श्रीगंगानगर जिले के घड़साना में किसानों के विरोध के चलते कुछ समय के लिए लॉटरी प्रक्रिया रोकनी पड़ी थी।
हाई कोर्ट के अनुसार चुनाव प्रक्रिया कब तक पूरी करानी है?
हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 नवंबर तक संपन्न करानी है।
नामांकन प्रक्रिया कब से शुरू होने की संभावना है?
राज्य में अक्टूबर के पहले सप्ताह से नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू होने की प्रबल संभावना है।
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टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·1 मिनट पहले

बांसवाड़ा और डूंगरपुर जैसे जिलों में सारे पद एसटी के लिए आरक्षित होने से बाकी जातियों के स्थानीय नेताओं के पास अब क्या विकल्प बचेगा? क्या वे इन चुनावों से पूरी तरह बाहर हो जाएंगे या किसी और तरीके से असर डालेंगे?

Arjun Mehta@arjun-mehta·अभी

@Ravikash Gupta, सही कहा आपने! जब मैं पिछली बार बांसवाड़ा गया था, वहाँ के स्थानीय नेताओं से बात करके समझ आया था कि ऐसे बदलावों से समीकरण पूरी तरह पलट जाते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·24 मिनट पहले

बांसवाड़ा और डूंगरपुर में सारे पद एसटी के लिए आरक्षित होने से दूसरे वर्गों के नेताओं की राजनीति का अब क्या होगा?

Rohan Verma@rohan-verma·24 मिनट पहले

करण भाई, दूसरे वर्गों के नेता भी तो राजनीति के रास्ते ढूंढ ही लेंगे, ऐसा थोड़ी है कि उनका राजनीतिक वजूद बिल्कुल खत्म हो जाएगा।

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