जोधपुर नगर निगम के महापौर पद के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बेहद कड़े मुकाबले के बीच विजय हासिल कर ली है। भाजपा उम्मीदवार प्रसन्नचंद मेहता शहर के नए महापौर निर्वाचित हुए हैं। चुनाव परिणाम घोषित होते ही पार्टी कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई और उन्होंने ढोल-नगाड़ों के साथ विजय का जश्न मनाना शुरू कर दिया। 100 वार्डों वाले इस नगर निगम में मतदान का गणित अंत तक बेहद रोमांचक बना रहा, जहां हर एक मत के लिए दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों में खींचतान देखी गई।
मतदान का गणित और करीबी मुकाबला
जोधपुर नगर निगम में कुल 100 पार्षदों ने महापौर चुनने के लिए अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। मतगणना पूरी होने पर भाजपा उम्मीदवार प्रसन्नचंद मेहता के पक्ष में 53 पार्षदों ने मतदान किया। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी को 47 पार्षदों का समर्थन हासिल हुआ। इस तरह महज 6 मतों के मामूली अंतर से भाजपा प्रत्याशी ने विजयश्री हासिल की। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, 100 सदस्यों वाले सदन में 6 मतों की यह बढ़त बेहद नजदीकी और कड़ा मुकाबला दर्शाती है।
शीर्ष नेतृत्व का आभार और विकास का संकल्प
महापौर पद पर निर्वाचित होने के बाद प्रसन्नचंद मेहता ने अपनी जीत को पार्टी कार्यकर्ताओं और शीर्ष नेतृत्व के भरोसे की जीत बताया। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदनलाल, संगठन महामंत्री अजय कुमार ने मुझ पर भरोसा करके जोधपुर की जनता की सेवा के लिए मुझे महापौर पद के लिए चुना। उनकी अपेक्षाओं और आशाओं पर खरा उतरा हूं। आज हमने 53 मत लेकर विजयश्री को प्राप्त किया है।"
इसके साथ ही उन्होंने सदन के सभी सदस्यों को साथ लेकर काम करने का भरोसा दिलाया। नए महापौर ने स्पष्ट किया कि जीत 53 मतों से मिली हो, लेकिन वे पूरे 100 पार्षदों को अपना परिवार मानते हैं। शहर के बुनियादी विकास के लिए सभी को एकजुट करके प्राथमिकताएं तय की जाएंगी। उपमहापौर के पद को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जिस भी नाम पर मुहर लगाएगा, उसे उपमहापौर की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
दीपावली स्वच्छता और रोशनी पहली प्राथमिकता
नवनिर्वाचित महापौर ने अपनी प्राथमिकताओं का खाका रखते हुए कहा कि त्योहार का समय नजदीक है। आगामी दीपावली पर्व को देखते हुए समूचे जोधपुर शहर में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। प्रमुख सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थलों की सफाई व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी। इसके अलावा शहरभर में रोशनी की पुख्ता और उत्तम व्यवस्था करना उनकी तात्कालिक कार्ययोजना में शामिल है, ताकि नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
निर्दलीय पार्षदों की निर्णायक भूमिका
इस नगर निगम चुनाव को कांटे की टक्कर में बदलने का मुख्य कारण निर्दलीय पार्षदों की मौजूदगी रही। निगम चुनाव में कुल 10 निर्दलीय उम्मीदवारों ने विजय प्राप्त की थी। मतदान से पहले दोनों ही खेमों में इन निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में लाने की होड़ मची हुई थी। कांग्रेस खेमे की ओर से यह दावा किया जा रहा था कि 10 में से 6 निर्दलीय पार्षद उनके बागी हैं। दूसरी ओर भाजपा के भी कुछ बागी उम्मीदवार निर्दलीय के रूप में चुनाव जीतकर आए थे। अंतिम परिणाम में भाजपा को मिले 53 मतों से यह स्पष्ट हो गया कि निर्दलीय पार्षदों का एक बड़ा धड़ा भाजपा के समर्थन में आया, जिसके चलते 6 मतों के फासले से परिणाम तय हुआ।























