ऑल इंडिया कोटा से सीकर आयुर्वेदिक कॉलेज में मिलेगा प्रवेश, जारी हुआ आयुष काउंसलिंग का पूरा शेड्यूलभीषण बाढ़ संकट के बीच नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में भारत और चीन के सहयोग की सराहना कीहावर्ड लुटनिक ने सेमीकंडक्टर पर लक्षित टैरिफ का दिया संकेत, वैश्विक बाजारों में बढ़ा रिस्क-ऑफ का रुझानदांतों की आधुनिक चिकित्सा के लिए सीतामढ़ी के 5 प्रमुख क्लिनिक, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम के साथ मिलती हैं खास सुविधाएंजॉन टर्नस ने संभाली ऐपल की कमान, एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बने टिम कुक से मिलेगी अधिक सैलरीगुजरात में नकली दवाओं और मिलावटी खाने पर बड़ा क्रैकडाउन, 50 कंपनियों के बिक्री लाइसेंस रद्दमसूरी में लगातार बारिश और अनियंत्रित निर्माण से गहराया संकट, स्थानीय निवासी बिल्लू ने दी चेतावनीशुक्र और राहु की युति से बदला नक्षत्र चक्र, सितंबर में इन तीन राशियों पर होगी पैसों की बारिशनागालैंड में प्रीमियम कॉफी का दायरा बढ़ाने की तैयारी, राज्यपाल नंद किशोर यादव ने कोहिमा में ली समीक्षा बैठकशुक्र का तुला राशि में प्रवेश: दोपहर 1:51 बजे बदला ग्रह नक्षत्र, अगले 66 दिनों तक इन 7 राशियों को मिलेगा बंपर लाभ
राजस्थान में निकाय चुनाव से पहले बीजेपी और कांग्रेस का बिगड़ा गणित, नाम वापसी और नामांकन रद्द होने से कई उम्मीदवार निर्विरोध जीतेराजस्थान
2 सित॰ 2026, 4:19 pm (53 मिनट पहले)· 1

राजस्थान में निकाय चुनाव से पहले बीजेपी और कांग्रेस का बिगड़ा गणित, नाम वापसी और नामांकन रद्द होने से कई उम्मीदवार निर्विरोध जीते

राजस्थान के शहरी निकाय चुनावों में आरक्षण, प्रत्याशियों की नाम वापसी और पर्चे खारिज होने से नया राजनीतिक परिदृश्य उभरकर सामने आ रहा है। कई वार्डों में प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों की गैरमौजूदगी के कारण निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति बन गई है।

राजस्थान में होने जा रहे शहरी निकाय चुनावों की प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे विभिन्न निकायों में राजनीतिक समीकरण लगातार बदलते दिख रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस, दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने नगरपालिकाओं और नगर निगमों पर कब्जा जमाने के लिए व्यापक योजनाएं बनाई थीं। हालांकि, चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत में आरक्षण लॉटरी के कारण कई सीटों के समीकरण प्रभावित हुए, जबकि बाद में टिकट बंटवारे को लेकर उभरे असंतोष और बगावत ने चुनावी गणित को और उलझा दिया। अब नामांकन पत्रों की जांच के चरण में कागजी खामियों और नाम वापसी के चलते नया मोड़ आ गया है, जिससे कई वार्डों में बिना मतदान ही जीत-हार का फैसला तय हो चुका है।

नामांकन प्रक्रिया में हुई चूक और अचानक नाम वापसी से बदला चुनावी गणित

राजस्थान की शहरी सरकार के इस संग्राम में बीजेपी और कांग्रेस की चिंताएं बढ़ गई हैं। दोनों ही दलों ने चुनाव जीतने के उद्देश्य से जो योजनाएं तैयार की थीं, वे उम्मीदवारों की प्रशासनिक भूलों और रणनीतिक निर्णयों की वजह से प्रभावित हुई हैं। टिकट वितरण के बाद कई निकायों में बागी नेताओं को शांत करने की कोशिशें की जा रही थीं, लेकिन नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के बाद बनी स्थिति ने पूरे चुनाव के पैमाने ही बदल दिए हैं। कहीं प्रत्याशियों ने ऐन वक्त पर अपने कदम पीछे खींच लिए, तो कहीं दस्तावेजों में हुई छोटी सी गलती के कारण नामांकन रद्द हो गए। इसका सीधा फायदा प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों को मिला है और वे बिना किसी मुकाबले के निर्विरोध पार्षद चुन लिए गए हैं।

ये भी पढ़ें

टोंक और सीकर में प्रत्याशियों के पीछे हटने से विरोधी दल को मिला फायदा

उम्मीदवारों द्वारा अचानक नाम वापस लेने का सबसे प्रमुख मामला टोंक जिले की टोडारायसिंह नगरपालिका से सामने आया है। टोडारायसिंह में वार्ड नंबर 23 से कांग्रेस प्रत्याशी शंकर ने अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया। इस अप्रत्याशित कदम से कांग्रेस खेमा हैरान रह गया और वहां भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार संत कुमार जैन निर्विरोध पार्षद निर्वाचित घोषित हो गए। उल्लेखनीय है कि टोडारायसिंह क्षेत्र कैबिनेट मंत्री कन्हैयालाल चौधरी का गृह क्षेत्र माना जाता है, इसलिए यहां कांग्रेस उम्मीदवार का पीछे हटना पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

इसी तरह का एक अन्य वाकया सीकर नगर परिषद क्षेत्र में देखने को मिला। वहां वार्ड नंबर 65 से भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी पिंकी पवार ने अचानक अपना नाम वापस ले लिया। उनके इस फैसले के कारण वहां कांग्रेस पार्टी की उम्मीदवार माया देवी को निर्विरोध पार्षद निर्वाचित घोषित कर दिया गया। इन दोनों ही मामलों में उम्मीदवारों के ऐन मौके पर चुनावी मैदान छोड़ने से संबंधित निकायों में राजनीतिक शक्ति का संतुलन बदल गया है।

बूंदी और बीकानेर में निरस्त हुए पर्चे, भाजपा और कांग्रेस दोनों को लगे झटके

नामांकन पत्रों की जांच के दौरान कागजी त्रुटियों के कारण भी दलों को बड़े नुकसान उठाने पड़े हैं। बूंदी जिले की हिंडौली नगरपालिका के वार्ड नंबर 20 में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार जितेंद्र सिंह का नामांकन पत्र खारिज हो गया। पर्चा रद्द होने के बाद चुनावी मैदान में केवल कांग्रेस प्रत्याशी हनुमान व्यास ही शेष रह गए, जिससे वे निर्विरोध चुनाव जीत गए।

बीकानेर नगर निगम के वार्ड नंबर 69 में कांग्रेस प्रत्याशी ममता का नामांकन पत्र खारिज होने का कारण प्रशासनिक हड़बड़ी और भ्रम की स्थिति रही। ममता ने शुरुआत में पार्टी सिंबल मिलने के संशय में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से अपना पर्चा दाखिल कर दिया था। बाद में कांग्रेस की ओर से उन्हें आधिकारिक सिंबल जारी कर दिया गया, लेकिन राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी का सिंबल नहीं मिलने और दोहरी स्थिति बनने के कारण उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया। इसका सीधा लाभ भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी लीला गहलोत को मिला, जो इस वार्ड से निर्विरोध पार्षद निर्वाचित हो गईं।

डूंगरपुर में आपराधिक मामले से पर्चा रद्द, कई निकायों में सिंबल की देरी बनी वजह

डूंगरपुर नगर परिषद के वार्ड नंबर 23 में भी कांग्रेस को ऐसे ही प्रशासनिक झटके का सामना करना पड़ा। यहां कांग्रेस उम्मीदवार गणेश कटारा का नामांकन पत्र उन पर दर्ज एक आपराधिक मामले के चलते निरस्त कर दिया गया। इसके परिणामस्वरूप भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी मनन कलासुआ निर्विरोध पार्षद चुन लिए गए।

डूंगरपुर, बूंदी, बीकानेर और टोडारायसिंह की ये घटनाएं केवल उदाहरण मात्र हैं। राज्य के कई अन्य निकायों में भी कांग्रेस प्रत्याशियों के पास समय पर आधिकारिक पार्टी सिंबल न पहुंचने के कारण नामांकन खारिज हो गए, जिससे पार्टी के स्थानीय चुनावी समीकरण बिगड़ गए। इसी प्रकार की तकनीकी भूलों और समय प्रबंधन की कमी की वजह से कई स्थानों पर भारतीय जनता पार्टी को भी अप्रत्याशित चुनावी असफलताओं का सामना करना पड़ा है।

सवाल-जवाब

टोंक की टोडारायसिंह नगरपालिका के वार्ड 23 में क्या हुआ?
वार्ड 23 में कांग्रेस उम्मीदवार शंकर के नाम वापस लेने के बाद भारतीय जनता पार्टी के संत कुमार जैन निर्विरोध पार्षद निर्वाचित हुए।
सीकर नगर परिषद के वार्ड 65 में किस प्रत्याशी की जीत हुई?
बीजेपी उम्मीदवार पिंकी पवार द्वारा नाम वापस लेने के कारण कांग्रेस की माया देवी निर्विरोध पार्षद चुनी गईं।
बीकानेर नगर निगम वार्ड 69 में कांग्रेस प्रत्याशी का पर्चा क्यों निरस्त हुआ?
सिंबल मिलने के संशय में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी और कांग्रेस दोनों से जुड़े कागजी भ्रम के कारण नामांकन निरस्त हुआ, जिससे बीजेपी की लीला गहलोत निर्विरोध जीतीं।
डूंगरपुर नगर परिषद के वार्ड 23 में नामांकन रद्द होने की क्या वजह थी?
कांग्रेस प्रत्याशी गणेश कटारा का नामांकन आपराधिक मामला दर्ज होने के कारण निरस्त हुआ, जिसके बाद बीजेपी के मनन कलासुआ निर्विरोध निर्वाचित हुए।
बूंदी के हिंडौली में बीजेपी प्रत्याशी का नामांकन क्यों खारिज हुआ?
हिंडौली वार्ड 20 में कागजी जांच के दौरान बीजेपी के जितेंद्र सिंह का पर्चा रद्द होने से कांग्रेस के हनुमान व्यास निर्विरोध चुने गए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·36 मिनट पहले

रोहन वर्मा की रिपोर्टिंग के अनुसार, राजस्थान निकाय चुनावों में नाम वापसी और कागजी त्रुटियों से निर्विरोध जीत का यह ट्रेंड दोनों दलों की आंतरिक कमजोरी उजागर करता है। यह स्थिति दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर टिकिट वितरण के बाद असंतोष को संभालने में स्थानीय नेतृत्व कितना लाचार साबित हुआ है, जिसका सीधा नुकसान चुनावी रणनीति को भुगतना पड़ रहा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·36 मिनट पहले

रोहन की इस रिपोर्ट से प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक कुप्रबंधन का एक गंभीर पहलू सामने आता है। जब तकनीकी खामियों या दबाव के कारण बड़े दलों के प्रत्याशी मैदान छोड़ देते हैं, तो यह केवल अंदरूनी कलह नहीं बल्कि जमीनी तंत्र की विफलता है। इस तरह के घटनाक्रम अक्सर चुनाव बाद की जोड़-तोड़ और प्रशासनिक शिकायतों को जन्म देते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता पर भी दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR