18 सितंबर से राजकोट के मैदान पर भारत और ऑस्ट्रेलिया की अंडर-19 टीमों के बीच एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला शुरू होने जा रही है। इस महत्वपूर्ण दौरे के लिए भारतीय क्रिकेट टीम में धौलपुर के प्रतिभावान विकेटकीपर और बल्लेबाज रजत बघेल को शामिल किया गया है। अत्यंत विषम आर्थिक परिस्थितियों से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे इस युवा खिलाड़ी की यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के साथ-साथ उनके परिवार के लिए भी अपार गर्व का विषय बनी हुई है।
संघर्षों के बीच संवरा खेल का सपना
रजत बघेल का शुरुआती जीवन बेहद तंगहाली में बीता। उनके पिता धौलपुर स्थित प्रसिद्ध बाबा विशनगिरी मंदिर के मुख्य द्वार पर प्रसादी की छोटी सी ढकेल लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। घरेलू वित्तीय स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार के लिए दैनिक आवश्यकताएं पूरी करना भी एक कठिन चुनौती थी। ऐसी परिस्थिति में रजत की बुआ बचपन में उन्हें अपने साथ सैंपऊ रोड स्थित घर ले आईं। उन्होंने रजत के लालन-पालन के साथ उनकी स्कूली पढ़ाई और क्रिकेट के प्रति जुनून को पूरा सहयोग दिया। रजत अपनी स्कूली शिक्षा के साथ-साथ रोज खेल के मैदान पर घंटों पसीना बहाते थे।
पुलिस लाइन मैदान से राष्ट्रीय शिविर तक की यात्रा
धौलपुर के पुलिस लाइन मैदान पर नियमित अभ्यास करते हुए रजत ने अपनी मजबूत बल्लेबाजी और बेहतरीन विकेटकीपिंग का लोहा मनवाया। हाल ही में बेंगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय विकेटकीपिंग शिविर में भाग लेकर उन्होंने अपने खेल कौशल को और अधिक निखारा है। अपनी इस उपलब्धि के बारे में बात करते हुए रजत ने बताया कि उनके पिता आज भी मंदिर के बाहर प्रसादी बेचने का कार्य जारी रखे हुए हैं और उनके भारतीय टीम में चुने जाने की खबर सुनकर पिता की आंखों में खुशी के आंसू आ गए थे।
घरेलू क्रिकेट में तिहरे शतकों का धमाकेदार रिकॉर्ड
रजत का क्रिकेट करियर शुरुआती दिनों से ही शानदार प्रदर्शनों से भरा रहा है। उन्होंने राजस्थान की अंडर-16 और अंडर-19 टीमों में पदार्पण करते हुए अपने पहले ही मैचों में तिहरे शतक जड़कर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था। इसके अलावा अंडर-23 प्रतियोगिता में मुंबई जैसी मजबूत टीम के खिलाफ भी उन्होंने एक यादगार शतकीय पारी खेली। राजस्थान की ओर से दो बार अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-23 स्तर पर प्रतिनिधित्व करने वाले रजत को राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (NCA) के तीन अलग-अलग प्रशिक्षण शिविरों में भी आमंत्रित किया जा चुका है।
अंतरराष्ट्रीय अनुभव और सफलता का श्रेय
यह पहली बार नहीं है जब रजत भारतीय जूनियर टीम की जर्सी में नजर आएंगे। इससे पहले वे भारतीय अंडर-19 टीम के साथ श्रीलंका के दौरे पर जा चुके हैं, जहां एक एकदिवसीय मैच में उन्होंने 10 रन बनाने के साथ-साथ स्टंप के पीछे दो महत्वपूर्ण कैच भी लपके थे। अपनी इस सफलता का श्रेय वे अपनी बुआ के अलावा धौलपुर क्रिकेट एसोसिएशन (DCA) के सचिव सोमेंद्र तिवारी और अपने कोच सुरजीत सिंह चाहर को देते हैं। रजत का कहना है कि आर्थिक परेशानियों को उन्होंने कभी अपने लक्ष्य में बाधक नहीं बनने दिया और अब ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम के खिलाफ खेलना उनके वर्षों के कड़े परिश्रम का परिणाम है।



















