राजस्थान के भौगोलिक परिदृश्य में दक्षिण-पश्चिम मानसून के वापस लौटने का सिलसिला विधिवत शुरू हो चुका है, लेकिन राज्य के कई हिस्से अब भी बादलों के कड़े पहरे में हैं। पश्चिमी सीमावर्ती अंचलों में हवाओं का रुख शुष्क होने लगा है, जबकि इसके विपरीत दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी इलाकों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का दौर देखने को मिला है। स्थानीय जलभराव और बादलों की तीव्र गड़गड़ाहट के बीच कई क्षेत्रों में सामान्य जीवन की गति प्रभावित हुई है। अगले तीन से चार दिनों के दौरान राज्य के कुछ अन्य हिस्सों से भी मानसूनी हवाओं के पीछे हटने के लिए मौसमी परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बन रही हैं, हालांकि 20 सितंबर को कोटा और उदयपुर संभागों के विभिन्न पॉकेट्स में मेघगर्जन के साथ बरसात का दौर जारी रहने की पूरी संभावना बनी हुई है।
पश्चिमी अंचल से मानसूनी हवाओं की वापसी और विदाई रेखा
मौसम विज्ञान केंद्र के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी रेखा वर्तमान में रामगढ़, मोहनगढ़, फलोदी और खाजूवाला क्षेत्रों से होकर गुजर रही है। कैलेंडर के हिसाब से राज्य में मानसून की विदाई की सामान्य तारीख 17 सितंबर मानी जाती है, लेकिन इस बार वापसी प्रक्रिया सामान्य समय से लगभग दो दिन की देरी से शुरू हुई है। वायुमंडलीय परिस्थितियों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि आने वाले तीन से चार दिनों के भीतर प्रदेश के कुछ और इलाकों से मानसूनी तंत्र पूरी तरह सिमट जाएगा।
वर्तमान में मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से और उससे सटी पूर्वी राजस्थान की सीमा पर एक ऊपरी वायुमंडलीय चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय बना हुआ है। इसके साथ ही उत्तर-पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तर-पूर्वी अरब सागर तक एक विस्तृत द्रोणिका फैली हुई है। इन दो सक्रिय वायुमंडलीय प्रणालियों के आपसी तालमेल की वजह से पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में नमी का प्रवाह लगातार बना हुआ है, जिसके चलते विदाई के समय भी दक्षिणी जिलों में मेघ जमकर बरस रहे हैं।
बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ में बादलों का तांडव, 207 मिमी तक बरसात
पिछले 24 घंटों की मौसमी स्थिति पर नजर डालें तो दक्षिणी राजस्थान के कई जनपदों में मूसलाधार से लेकर अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा बारिश का दबाव बांसवाड़ा जिले के घाटोल में देखा गया, जहां 207 मिलीमीटर पानी बरसा। इसके अलावा बांसवाड़ा के भुंगड़ा इलाके में 173 मिलीमीटर, लोहारिया में 148 मिलीमीटर तथा गढ़ी क्षेत्र में 124 मिलीमीटर वर्षा का मापन हुआ है। भारी बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर आ गए और निचले रिहायशी इलाकों में पानी का जमाव हो गया।
पड़ोसी जिले प्रतापगढ़ में भी बादलों का तीव्र जमावड़ा रहा। प्रतापगढ़ के पीपलखूंट में 190 मिलीमीटर, स्वयं प्रतापगढ़ मुख्यालय पर 103 मिलीमीटर और गडोला में 101 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। झालावाड़ के मनोहरथाना कस्बे में 131 मिलीमीटर पानी बरसा, जबकि डूंगरपुर के गलियाकोट में 101 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बीकानेर के कोलायत में भी 70 मिलीमीटर बारिश मापी गई। इस तीव्र वर्षा से दक्षिणी राजस्थान के चार प्रमुख जिलों बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, झालावाड़ और डूंगरपुर में जलभराव की स्थिति निर्मित हुई है, जिससे स्थानीय प्रशासन को लगातार सतर्कता बरतनी पड़ रही है। जल स्तर में भारी बढ़ोतरी के कारण नवनेरा बैराज के 9 गेट खोल दिए गए हैं, जिनसे करीब 1.02 लाख क्यूसेक पानी की तीव्र निकासी की जा रही है।
आठ जिलों के लिए तेज झोंकेदार हवा और वज्रपात की चेतावनी
मौसमी बदलावों को देखते हुए 20 सितंबर के लिए राज्य के आठ प्रमुख जिलों में येलो अलर्ट प्रभावी किया गया है। इन जिलों में बांसवाड़ा, बारां, डूंगरपुर, झालावाड़, प्रतापगढ़, राजसमंद, सलूम्बर और उदयपुर शामिल हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इन क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज झोंकेदार हवाएं चलने, बिजली गिरने और तेज मेघगर्जन की आशंका है।
कोटा और उदयपुर संभागों के विस्तृत दायरे में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान व्यक्त किया गया है। स्थानीय मौसम तंत्र के अनुसार यह बारिश पूरे संभाग में एक समान होने के बजाय बिखरे हुए रूप में कुछ विशिष्ट स्थानों पर केंद्रित रहेगी। आकाशीय बिजली चमकने और बादलों की तीव्र गड़गड़ाहट के दौरान खेतों में काम करने वाले किसानों, पशुपालकों और खुले में मौजूद मजदूरों को पक्के ढांचों की शरण लेने और सुरक्षित स्थानों पर बने रहने का परामर्श दिया गया है।
जयपुर समेत मध्य और पश्चिमी राजस्थान में शुष्क रहेगा वातावरण
एक तरफ जहां दक्षिणी राजस्थान में भारी बारिश और तूफानी हवाओं का प्रभाव है, वहीं राजधानी जयपुर समेत प्रदेश के मध्यवर्ती और उत्तरी जिलों में मौसम अपेक्षाकृत शांत और सामान्य बना हुआ है। जयपुर के लिए 20 सितंबर को किसी भी तरह की विशेष मौसमी चेतावनी जारी नहीं की गई है। इसी तरह अजमेर, अलवर, भरतपुर, दौसा, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, सीकर, टोंक और झुंझुनूं में भी मौसम सामान्य रूप से शुष्क अथवा आंशिक रूप से बादलों वाला रहने का अनुमान है।
पश्चिमी राजस्थान के सभी 13 जिलों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क और साफ बना रहेगा। बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर, नागौर, पाली और श्रीगंगानगर समेत अन्य मरुस्थलीय जिलों में बारिश की संभावना पूरी तरह क्षीण हो चुकी है। इन क्षेत्रों में दिन के समय धूप खिलने से तापमान में हल्की बढ़ोतरी और उमस के कम होने की स्थिति बन रही है, जो मानसूनी वापसी का एक स्पष्ट संकेत है।
21 सितंबर से बारिश में गिरावट और बंगाल की खाड़ी में नई हलचल
राज्य के मौसम चक्र में 21 सितंबर से बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। 21 सितंबर से राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मानसूनी गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी आने और मौसम के मुख्य रूप से शुष्क हो जाने की संभावना है। 20 सितंबर के बाद पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के सीमित हिस्सों में भी बारिश का यह दौर धीमा पड़ जाएगा।
वायुमंडलीय संकेतों से पता चलता है कि 22 से 24 सितंबर के आसपास बंगाल की खाड़ी में एक नई मौसमी प्रणाली सक्रिय हो सकती है। हालांकि, इस प्रणाली का राजस्थान के मौसम पर सीधा कितना असर पड़ेगा, यह स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। मौसम विज्ञान केंद्र ने 22 से 26 सितंबर के लिए जारी संकेतों को फिलहाल दीर्घकालिक मानकर निरंतर निगरानी की श्रेणी में रखा है। यदि बंगाल की खाड़ी की प्रणाली उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ती है, तभी राजस्थान में बारिश का कोई नया दौर संभव होगा, अन्यथा प्रदेश में मानसून की रवानगी की प्रक्रिया और अधिक तेज हो जाएगी।


















