राजस्थान में शहरी सरकार चुनने की प्रक्रिया अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। सूबे में निकाय चुनाव 2026 के पहले चरण के तहत सुबह 7 बजे से मतदान की शुरुआत हो चुकी है। शहरी निकायों के प्रतिनिधियों को चुनने के लिए सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस, दोनों ही प्रमुख दलों के लिए असंतोष और बगावत सबसे बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं। चुनाव की घोषणा और प्रत्याशी चयन के बाद से ही दोनों खेमों में कार्यकर्ताओं की नाराजगी खुलकर सामने आई थी, जिसे शांत करने की कवायद मतदान के दिन भी जारी है। जहां कांग्रेस पार्टी बागियों के असर को बेअसर कर अपने कैडर वोट को बचाने में लगी है, वहीं बीजेपी ने अपनी रणनीतिक योजना के तहत उन खास इलाकों पर ध्यान केंद्रित किया है जहां उसकी स्थिति थोड़ी नाजुक मानी जा रही है।
टिकट बंटवारे के बाद उपजा असंतोष और मतदान के दिन डैमेज कंट्रोल
निकाय चुनाव के दौरान प्रत्याशी चयन और टिकट वितरण के बाद बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही संगठनों के भीतर भारी असंतोष देखने को मिला था। हालांकि मतदान की तारीख से पहले दोनों दलों के शीर्ष नेताओं ने बागी उम्मीदवारों को मनाने और नाम वापस करवाने की पुरजोर कोशिशें की थीं। इन प्रयासों के बावजूद कई सौ बागी प्रत्याशी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में डटे रहे और पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशियों को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। इसी कारण से वोटिंग डे पर भी दोनों ही पार्टियों की ओर से डैमेज कंट्रोल की रणनीतियां अपनाई जा रही हैं। चुनाव विश्लेषकों के अनुसार, मतदान की इस समयसीमा में हर एक वोट का महत्व बढ़ जाता है, जिसके लिए साम, दाम, दंड और भेद जैसे सभी संभावित प्रशासनिक और राजनीतिक तरीके आजमाए जा रहे हैं।
बागियों को साधने के लिए कांग्रेस का विशेष फॉर्मूला
कांग्रेस पार्टी ने बागियों से होने वाले संभावित राजनीतिक नुकसान को सीमित करने के लिए एक व्यावहारिक नजरिया अपनाया है। पार्टी की रणनीति यह है कि बागी कार्यकर्ताओं और उनके प्रभाव वाले स्थानीय समर्थकों से संपर्क स्थापित किया जाए। जो हो गया सो हो गया की अवधारणा पर चलते हुए पार्टी नेतृत्व अब आगामी नुकसान को न्यूनतम करने में जुटा हुआ है। चूंकि मतदान शुरू हुए अभी चार घंटे ही बीते हैं और कई क्षेत्रों में सुबह के समय मतदाता धीरे-धीरे घरों से बाहर निकल रहे हैं, ऐसे में पार्टी के पास रणनीति लागू करने का पूरा मौका है। मतदान शाम 6 बजे तक जारी रहना है, इसलिए शेष बचे सात घंटों की अवधि में कांग्रेस की टीमें लगातार फोन और व्यक्तिगत बैठकों के जरिए वोट बैंक को अपने अधिकृत उम्मीदवारों की ओर मोड़ने के प्रयास में लगी हुई हैं।
कमजोर 1350 वार्डों में बीजेपी की हाईटेक मोर्चेबंदी
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने एक भिन्न और तकनीकी रूप से समर्थ रणनीति को मैदान में उतारा है। पार्टी ने पहले चरण के अंतर्गत आने वाले लगभग 1350 ऐसे वार्डों को चिन्हित किया है जिन्हें वह अपने आंतरिक आकलन में कमजोर मानकर चल रही थी। इन चिन्हित वार्डों में बीजेपी का प्राथमिक लक्ष्य अपने समर्थक मतदाताओं का अधिक से अधिक मतदान सुनिश्चित कराना है। पार्टी यह सुनिश्चित कर रही है कि उसका कोई भी कैडर वोटर मतदान करने से न चूक जाए। इसके लिए जयपुर स्थिति पार्टी के प्रांतीय मुख्यालय से एक हाईटेक निगरानी तंत्र स्थापित किया गया है। मुख्यालय की टीम ग्राउंड लेवल पर कार्यरत कार्यकर्ताओं को लगातार दिशा-निर्देश भेज रही है। बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि यदि कमजोर वार्डों में भी पार्टी का संगठित वोटर पूरी निष्ठा से पोलिंग बूथ तक पहुंच जाता है, तो पार्टी आसानी से बढ़त बना सकती है।
शीर्ष नेतृत्व की सीधी निगरानी और चुनावी आंकड़ा
इस पूरे मतदान अभ्यास की निगरानी दोनों ही पार्टियों के सर्वोच्च प्रांतीय नेता खुद कर रहे हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और राजस्थान पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा अपनी-अपनी विशेष टीमों के माध्यम से राज्यभर के पोलिंग बूथों से प्रतिपुष्टि प्राप्त कर रहे हैं। इसके साथ ही दोनों राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता और क्षेत्रीय प्रभारी भी अपने-अपने प्रभाव वाले इलाकों में डटे हुए हैं। वे निरंतर प्रदेश मुख्यालय के संपर्क में हैं ताकि धरातल की स्थिति के अनुसार रणनीतिक बदलावों को तुरंत लागू कराया जा सके। राज्य में आज पहले चरण में कुल 309 निकायों में से 162 निकायों के लिए मतदान की प्रक्रिया चल रही है। इन 162 निकायों के तहत आने वाले 5393 वार्डों में नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं, जो राजस्थान की शहरी राजनीति की भावी दिशा तय करेंगे।



















