भारतीय रसोई में आम का मीठा अचार केवल एक साइड डिश नहीं, बल्कि हर भोजन का स्वाद बढ़ाने वाला मुख्य आकर्षण होता है। खट्टे कच्चे आम, मीठी चीनी और सुगंधित देसी मसालों का यह बेहतरीन मेल दाल-चावल, गरमा-गरम पराठे, पूरी, थेपला और सादी रोटी के साथ खूब पसंद किया जाता है। बाजार में मिलने वाले अचार की तुलना में घर पर तैयार किया गया मीठा अचार न सिर्फ अधिक ताजा और शुद्ध होता है, बल्कि सही विधि से बनाने पर यह सालों-साल खराब भी नहीं होता। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी की पसंद बनने वाले इस चटपटे मीठे अचार को बहुत ही आसान चरणबद्ध तरीके से रसोई में तैयार किया जा सकता है।
सामग्री की तैयारी और पानी निकालने की प्रक्रिया
स्वादिष्ट और टिकाऊ अचार बनाने के लिए सबसे पहले कच्चे आमों का सही चुनाव और सफाई बेहद जरूरी है। बाजार से लाए गए कच्चे आमों को पानी से अच्छी तरह धो लें और फिर किसी साफ कपड़े से पोंछकर पूरी तरह सुखा लें। इसके बाद आमों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें और अंदर मौजूद गुठली को अलग कर दें। कटे हुए आम के टुकड़ों को एक बड़े बर्तन में निकालें और उनमें स्वादानुसार नमक और हल्दी मिला दें। नमक और हल्दी मिले आमों को 5 से 6 घंटे के लिए ढककर रख दें। इस समयावधि में नमक के संपर्क से आम का अतिरिक्त पानी बाहर निकल जाता है, जो अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और सड़ांध से बचाने का काम करता है।
चाशनी और मसालों का सही मिश्रण
5 से 6 घंटे बाद जब आम का अतिरिक्त पानी निकल जाए, तब अचार पकाने की प्रक्रिया शुरू करें। इसके लिए एक कड़ाही में आम के टुकड़े और चीनी डालें और गैस पर धीमी आंच पर पकने के लिए रखें। धीरे-धीरे गर्म होने पर चीनी पिघलने लगेगी और एक गाढ़ी चाशनी का रूप ले लेगी। इस दौरान मिश्रण को लगातार या बीच-बीच में चलाते रहना चाहिए ताकि चीनी कड़ाही के तले में चिपके या जले नहीं। जब चीनी पूरी तरह पिघल जाए, तब इसमें पिसी या साबुत सौंफ, कलौंजी, जीरा, लाल मिर्च पाउडर और स्वादिष्ट काला नमक डालें। इन सभी मसालों को अच्छी तरह मिलाकर 8 से 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें। जैसे ही चाशनी हल्की गाढ़ी होने लगे, तुरंत गैस बंद कर दें और कड़ाही को उतार लें।
तेल का तड़का और सुरक्षित भंडारण
अचार का स्वाद और उसकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए सरसों का तेल इस्तेमाल किया जाता है। एक अलग पैन में सरसों का तेल डालकर अच्छी तरह गर्म करें और फिर उसे पूरी तरह ठंडा होने दें। गर्म तेल को सीधे अचार में डालने के बजाय, पूरी तरह ठंडा होने पर ही अचार के मिश्रण में मिलाएं। इससे अचार का रंग और जायका दोनों बेहतरीन बनते हैं। अचार जब पूरी तरह ठंडा हो जाए, तो उसे कांच के साफ और बिल्कुल सूखे जार में भरकर रखें। ध्यान रखें कि जार में जरा सी भी नमी न हो, क्योंकि नमी अचार को बहुत जल्दी खराब कर देती है। जार बंद करने के बाद इसे 2 से 3 दिन तक धूप में रखें, जिससे मसालों और चाशनी का स्वाद आम में पूरी तरह रम जाता है और बेहतरीन अचार बनकर तैयार होता है।



















