राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में पुलिस ने एक बेहद शातिर और सक्रिय अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो पिछले काफी समय से तीन अलग-अलग राज्यों के पशुपालकों की नींद उड़ाए हुए था। निकुम्भ थाना पुलिस ने इस कार्रवाई को अंजाम देते हुए गिरोह के मुख्य सरगना सहित चार बदमाशों को धर दबोचा है। पकड़े गए मुख्य आरोपी की पहचान मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के मुल्तानपुर निवासी आरिफ कालिया के तौर पर हुई है। इस पूरी पुलिस कार्रवाई के बाद राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात की सरहदों पर अंजाम दी गई भैंस चोरी की लगभग चालीस बड़ी वारदातों का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि इन तमाम घटनाओं के दौरान कुल एक सौ बीस भैंसों को निशाना बनाया गया था, जिनकी कुल अनुमानित कीमत करीब दो करोड़ रुपये बैठती है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल होने वाली पिकअप गाड़ियां और मोटरसाइकिलें भी जब्त कर ली हैं।
अनोखा तरीका और संगठित नेटवर्क
पुलिस की गहन पूछताछ में इस गिरोह के काम करने के बेहद शातिर और सुनियोजित तौर-तरीकों का पता चला है। यह पूरा गैंग पिछले दो वर्षों से एक सुव्यवस्थित नेटवर्क के रूप में सक्रिय था और बेहद सावधानी से वारदातों को अंजाम देता था। मध्य प्रदेश के मुल्तानपुर से गिरोह के दो सदस्य सबसे पहले मोटरसाइकिल पर सवार होकर निकलते थे और सुनसान इलाकों की रेकी करते थे। रात के समय करीब नौ से दस बजे के बीच वे चोरी के लिए किसी खास बाड़े या ठिकाने को अंतिम रूप देते थे। इसके बाद पीछे से आ रही पिकअप गाड़ी को सटीक लोकेशन भेजी जाती थी। पिकअप चालक वाहन को किसी गड्ढे या ढलान वाली जगह पर सहेज कर खड़ा करता था और बाड़ों से एक-एक करके तीन-तीन भैंसें वाहन में लाद ली जाती थीं। वापसी के सफर के दौरान पिकअप में केवल चालक अकेला मौजूद रहता था, जबकि गिरोह के बाकी तीन सदस्य सुरक्षा के लिहाज से पीछे बाइक पर साथ चलते थे। चोरी की इन तमाम भैंसों को हर रविवार को मंदसौर जिले के घूंदड़का गांव में लगने वाले साप्ताहिक पशु हाट में ले जाकर बेच दिया जाता था और मिलने वाली रकम को आपस में बांट लिया जाता था।
किन-किन इलाकों में फैला था नेटवर्क
इस शातिर गिरोह का दायरा केवल एक जिले तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने कई राज्यों के दर्जनों जिलों को अपनी आपराधिक गतिविधियों का केंद्र बना रखा था। राजस्थान के भीतर यह गैंग चित्तौड़गढ़ के विजयनगर, भोपालसागर, कपासन, मंगलवाड़, भादसोड़ा, निम्बाहेड़ा, बेंगू और चंदेरिया के अलावा भीलवाड़ा के मांडल व कोटड़ी क्षेत्रों में सक्रिय था। इसके अलावा उदयपुर के खेरोदा, भिंडर व फतेहनगर, तथा बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, जालोर और पाली जिलों से भी मवेशी चुराए गए थे। मध्य प्रदेश की सीमाओं के भीतर उज्जैन, मंदसौर, नीमच, रतलाम, आलोट और पिपलिया मंडी जैसे इलाके इनकी पहुंच में थे। वहीं गुजरात के अहमदाबाद, गांधीनगर, मेहसाणा और गोधरा क्षेत्रों में भी इस गैंग ने सेंधमारी कर चोरी की वारदातों को कबूल किया है। अपनी पहचान छिपाने के लिए ये शातिर अपराधी चोरी के वक्त हमेशा बिना नंबर की पिकअप गाड़ियों का इस्तेमाल करते थे और वाहन चलाने वाला शख्स हमेशा अपना चेहरा ढककर रखता था ताकि सीसीटीवी या किसी की नजर में न आ सके।
हादसे के बावजूद नहीं डगमगाया हौसला
इस पूरे मामले की तह तक पहुंचने की शुरुआत अट्ठाइस जुलाई को निकुम्भ थाना क्षेत्र के गरदाना गांव से पांच भैंसें चोरी होने की घटना के साथ हुई थी। पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह यादव के कड़े निर्देश और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेंद्र सिंह जोधा तथा डीएसपी हरीश चंद्र सिंह चुंडावत के सीधे सुपरविजन में निकुम्भ थानाधिकारी प्रभु सिंह चूंडावत के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया था। पुलिस दल ने आधुनिक तकनीकी साक्ष्यों और अपने मुखबिर तंत्र का जाल बिछाते हुए चोरों के आवागमन के रूट को ट्रैक किया और उनकी तलाश करते हुए मंदसौर तक जा पहुंचे। इसी छानबीन के दौरान गत इकतीस जुलाई दो हजार छब्बीस की रात को आरोपियों के संभावित ठिकानों पर जाल बिछाने का प्रयास चल रहा था। इसी दौरान तड़के करीब साढ़े तीन बजे निम्बाहेड़ा-मंगलवाड़ मार्ग पर धीनवा के पास पुलिस का वाहन एक सामने से आ रहे ट्रेलर से टकरा गया। इस भीषण दुर्घटना में पुलिस टीम के कई सदस्यों को गंभीर चोटें आईं और दो पुलिसकर्मी अभी भी अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे हैं।
दोबारा घेराबंदी कर दबोचे गए बदमाश
इस भयंकर सड़क हादसे में खुद के घायल होने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने अपने हौसले को कमजोर नहीं पड़ने दिया और आरोपियों को पकड़ने का संकल्प बनाए रखा। पुलिस ने एक बार फिर से अपनी रणनीति के तहत नया जाल बिछाया और बदमाशों को किसी अन्य वारदात को अंजाम देने के लिए आते हुए देख लिया। मालनखेड़ी के पास की गई सख्त घेराबंदी के दौरान इन शातिर बदमाशों को अंततः दबोच लिया गया। फिलहाल पुलिस गिरफ्तार किए गए आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है ताकि उनके बाकी साथियों का पता लगाया जा सके और चोरी गई बाकी भैंसों की बरामदगी के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।



















