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रामदेवरा मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब: गुजरात के भक्तों ने तैयार किए 11,000 लड्डू, पंजाब के लोहार समाज ने नशा मुक्ति के लिए आयोजित किया कुश्ती दंगलराजस्थान
12 सित॰ 2026, 10:31 am (57 मिनट पहले)· 0

रामदेवरा मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब: गुजरात के भक्तों ने तैयार किए 11,000 लड्डू, पंजाब के लोहार समाज ने नशा मुक्ति के लिए आयोजित किया कुश्ती दंगल

राजस्थान के जैसलमेर में बाबा रामदेव के भादवा मेले में जहाँ श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा है, वहीं गुजरात के सेवादारों ने ११,००० लड्डुओं का महाप्रसाद तैयार किया है और पंजाब के लोहार समाज ने युवाओं को नशे से बचाने के लिए अखाड़ा सजाया है।

पश्चिमी राजस्थान के रेतीले धोरों के बीच स्थित जैसलमेर जिले का छोटा सा कस्बा रामदेवरा इन दिनों आस्था के विशाल सागर में तब्दील हो चुका है। यहाँ लोक देवता बाबा रामदेव का ऐतिहासिक भादवा मेला पूरे शबाब पर है, जिसे पश्चिमी राजस्थान का महाकुंभ भी कहा जाता है। देश के अलग-अलग कोनों से यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं का ताँता लगा हुआ है और हर दिन लगभग चार लाख भक्त बाबा के दरबार में पहुँचकर शीश नवा रहे हैं। रामदेवरा का पूरा वातावरण इन दिनों बाबा के जयकारों और भजनों से गुंजायमान है। पोकरण से रामदेवरा तक के पूरे राजमार्ग पर सिर्फ पदयात्री ही पदयात्री नजर आ रहे हैं, जो मीलों का लंबा सफर तय करके यहाँ पहुँच रहे हैं। पैदल यात्रा कर रहे इन श्रद्धालुओं के पैरों के छालों पर मरहम लगाने और उन्हें राहत देने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से आए अनगिनत सेवा संगठन चौबीसों घंटे सक्रिय हैं, जो इस विशाल मेले में आस्था, भक्ति और निस्वार्थ सेवा का एक अनोखा संगम प्रस्तुत कर रहे हैं। यह धार्मिक उत्सव न केवल लोगों की श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द और अनेकता में एकता का एक बड़ा जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है।

आस्था और सेवा का अद्भुत संगम: अहमदाबाद के भक्तों की बड़ी पहल

गुजरात के अहमदाबाद शहर से आए सेवादारों का एक बड़ा समूह इस मेले में विशेष रूप से ध्यान आकर्षित कर रहा है। लगभग चार दर्जन से अधिक लोगों की यह टोली खास तौर पर रामदेवरा पहुँचकर पदयात्रियों की सेवा में लीन है। इन सेवादारों ने पोकरण और रामदेवरा के बीच सड़क के किनारे अपना एक विशाल शिविर लगाया हुआ है। इस शिविर में इन दिनों बेहद पवित्र वातावरण में ११ हजार शुद्ध देसी घी के स्वादिष्ट लड्डू तैयार किए जा रहे हैं। ये साधारण लड्डू नहीं हैं, बल्कि इन्हें बनाने में भरपूर मात्रा में सूखे मेवे और मोतीचूर का उपयोग किया जा रहा है। गुजरात से आए एक दर्जन से अधिक कुशल कारीगर पिछले तीन दिनों से दिन-रात एक करके इन स्वादिष्ट लड्डुओं के निर्माण में जुटे हुए हैं। आयोजन से जुड़े लोगों ने बताया कि इन ११ हजार लड्डुओं को तैयार करने के बाद सबसे पहले इन्हें बाबा रामदेव की पवित्र समाधि पर चढ़ाया जाएगा, जहाँ बाबा को इसका मुख्य भोग लगाया जाएगा। इसके बाद, इस महाप्रसाद को पोकरण-रामदेवरा मार्ग पर पैदल चल रहे हजारों श्रद्धालुओं के बीच पूरी श्रद्धा के साथ बाँटा जाएगा।

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इस सेवा कार्य से जुड़े अहमदाबाद के स्वयंसेवकों का उत्साह देखते ही बनता है। वे सड़क किनारे बने अपने शिविर में आने-जाने वाले हर भक्त का बड़े आदर-सत्कार के साथ स्वागत करते हैं। इन सेवादारों ने बताया कि वे कोई पहली बार यहाँ नहीं आए हैं, बल्कि पिछले १० वर्षों से अधिक समय से उनका यह सेवा अभियान लगातार जारी है। हर साल भादवा मेले के दौरान वे लोग यहाँ खिंचे चले आते हैं। उनका मानना है कि मीलों का सफर तय करके आए थके-हारे और पैरों के दर्द से परेशान भक्तों की सेवा करने से जो मानसिक और आत्मिक शांति मिलती है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। इस वर्ष उनके द्वारा तैयार किए गए ११,००० लड्डुओं का यह भव्य पड़ाव मेले में आने वाले लोगों के लिए भारी कौतूहल और आकर्षण का विषय बना हुआ है। मार्ग पर इसके अलावा भी कई स्थानों पर स्थानीय लोग और अन्य राज्यों से आए संगठन राहगीरों को रोक-रोककर भोजन, पानी, चाय और दवाइयाँ उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे पूरे मार्ग का माहौल भक्तिमय हो गया है।

नशा मुक्ति का संदेश: पंजाब के लोहार समाज का अनोखा प्रयास

रामदेवरा का यह भादवा मेला केवल पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस बार यहाँ से समाज सुधार और एक बेहतर भविष्य की रचना का एक बहुत बड़ा संदेश भी दिया जा रहा है। इस सामाजिक बदलाव की सूत्रधार बनी है पंजाब से आई लोहार समाज की एक विशाल बिरादरी। पंजाब के इस समुदाय के लगभग १० हजार लोग इन दिनों रामदेवरा पहुँचे हुए हैं और उन्होंने खुले आसमान के नीचे अपना एक बहुत बड़ा डेरा स्थापित किया है। इस समाज के प्रबुद्ध लोगों और युवाओं ने मिलकर मेले के इस पावन मंच का उपयोग अपनी युवा पीढ़ी को एक नई दिशा देने के लिए किया है। पंजाब में नशे की गंभीर समस्या को देखते हुए, लोहार समाज ने अपने युवाओं को नशे के चंगुल से बचाने और उनके भीतर खेलों के प्रति रुचि जगाने के उद्देश्य से रामदेवरा में एक भव्य कुश्ती दंगल का आयोजन किया। इस पारंपरिक अखाड़े के जरिए उन्होंने अपनी आने वाली पीढ़ी को यह संदेश देने की कोशिश की कि वे हानिकारक नशीले पदार्थों से दूर रहें, और इसकी जगह पौष्टिक खान-पान अपनाकर अपने शरीर और मस्तिष्क को बलवान बनाएँ।

सद्भावना और समानता की अनूठी मिसाल

इस कुश्ती प्रतियोगिता के दौरान समाज के बुजुर्गों ने एक बहुत ही व्यावहारिक बात पर जोर दिया। उनका कहना था कि परिवार और समाज में जो बड़े लोग आचरण करते हैं, बच्चे भी उसी को देखकर बड़े होते हैं और वैसा ही व्यवहार अपनाते हैं। इसलिए यदि हम अपनी युवा पीढ़ी को सुदृढ़ देखना चाहते हैं, तो बड़ों को खुद भी एक आदर्श और स्वच्छ जीवन शैली पेश करनी होगी। खुले मैदान में आयोजित इस कुश्ती दंगल को देखने के लिए रामदेवरा मेले में आए हजारों दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिसने तालियाँ बजाकर पहलवानों का हौसला बढ़ाया। वास्तव में, बाबा रामदेव का यह दरबार और यह वार्षिक मेला भारत की अनूठी सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है। यहाँ देश के अलग-अलग हिस्सों से भिन्न-भिन्न संस्कृतियों, भाषाओं, वेशभूषाओं और मान्यताओं के लोग एक जगह एकत्रित होते हैं। इस दरबार में न तो कोई अमीर होता है और न ही कोई गरीब; न कोई ऊँच-नीच की भावना होती है और न ही जाति-पाति का कोई स्थान। सभी भक्त आपसी भेदभाव को पूरी तरह से भुलाकर केवल बाबा रामसापीर की पावन समाधि के समक्ष नतमस्तक होते हैं। बाबा के इस पावन प्रांगण में केवल इंसानियत और आपसी प्रेम को ही सबसे बड़ा धर्म माना जाता है।

सवाल-जवाब

बाबा रामदेव का ऐतिहासिक भादवा मेला कहाँ आयोजित हो रहा है?
यह ऐतिहासिक मेला राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित रामदेवरा में आयोजित हो रहा है।
इस मेले में प्रतिदिन लगभग कितने श्रद्धालु पहुँच रहे हैं?
इस मेले में देश के कोने-कोने से हर दिन लगभग चार लाख श्रद्धालु पहुँच रहे हैं।
गुजरात के सेवादारों द्वारा मेले में क्या विशेष व्यवस्था की गई है?
गुजरात के अहमदाबाद से आए सेवादारों ने श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध देसी घी और सूखे मेवों से ११,००० लड्डू तैयार किए हैं, जिन्हें महाप्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा।
पंजाब के लोहार समाज ने रामदेवरा मेले में क्या अनूठी पहल की है?
पंजाब के लोहार समाज ने अपनी युवा पीढ़ी को नशे की लत से दूर रहने का संदेश देने के लिए रामदेवरा में एक विशाल कुश्ती दंगल का आयोजन किया है।
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