करौली उपखंड क्षेत्र के परीता गांव में आयोजित हुए विशाल कुश्ती दंगल ने हजारों खेल प्रेमियों को रोमांचित कर दिया। हर साल की तरह इस बार भी भादो महीने की अमावस्या के शुभ अवसर पर इस भव्य खेल आयोजन की परंपरा को जीवंत रखा गया। अखाड़े की पारंपरिक मिट्टी में जब विभिन्न क्षेत्रों से आए पहलवानों ने अपनी ताकत और फुर्ती का प्रदर्शन किया, तो दर्शकों के उत्साह से पूरा परिसर गूंज उठा। इस पारंपरिक दंगल का आनंद लेने के लिए करौली और आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे, जिससे कार्यक्रम स्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई।
बाल और महिला पहलवानों ने जीता दर्शकों का दिल
इस भव्य खेल महोत्सव का शुभारंभ नन्हें बाल पहलवानों के बीच हुए मुकाबलों से हुआ। मिट्टी के इस मैदान में छोटे बच्चों ने जिस सूझबूझ और फुर्ती के साथ एक-दूसरे को चुनौती दी, उसने वहां मौजूद हर दर्शक का दिल जीत लिया। बच्चों के बाद महिला पहलवानों ने अखाड़े में कदम रखकर अपने हुनर का प्रदर्शन किया। महिला वर्ग में हुए मुकाबले बेहद कड़े और रोमांचक थे। उनकी असाधारण ताकत और बेहतरीन दांव-पेंच देखकर दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजाईं और उनका हौसला बढ़ाया। इस पारंपरिक आयोजन में महिलाओं की इस सक्रिय भागीदारी ने दंगल को और भी गरिमामयी बना दिया।
विभिन्न राज्यों से जुटे 300 से अधिक धाकड़ पहलवान
आयोजन समिति की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस एक दिवसीय खेल प्रतियोगिता के दौरान छोटी और बड़ी मिलाकर 300 से अधिक कुश्तियां कराई गईं। इस विशाल दंगल में केवल स्थानीय प्रतिभाएं ही शामिल नहीं हुईं, बल्कि राजस्थान के करौली, सवाई माधोपुर, भरतपुर, दौसा और धौलपुर जिलों से आए बेहतरीन पहलवानों ने भी हिस्सा लिया। इसके अलावा, पड़ोसी राज्यों और क्षेत्रों जैसे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा से आए नामी पहलवानों ने अखाड़े में उतरकर अपनी खेल कौशल का परिचय दिया। पहलवानों ने विभिन्न प्रकार के पारंपरिक दांव-पेंच आजमाकर अपने विरोधियों को परास्त किया। सभी विजयी पहलवानों को आयोजन समिति द्वारा नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
एक लाख ग्यारह हजार की अंतिम कुश्ती में जोरदार टक्कर
इस पूरे आयोजन का सबसे मुख्य और रोमांचक मुकाबला दंगल के अंत में देखने को मिला। यह अंतिम जंग हाथरस के हरिकेश पहलवान और दिल्ली के भारत पहलवान के बीच लड़ी गई। पूरे 1.11 लाख रुपये की भारी-भरकम इनामी राशि के लिए आयोजित इस महामुकाबले में दोनों पहलवानों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। दोनों के बीच कांटे की टक्कर हुई और काफी समय तक चले इस संघर्ष के बाद भी कोई किसी को चित नहीं कर सका। अंततः यह मुकाबला बराबरी पर समाप्त हुआ। आयोजन समिति ने दोनों उत्कृष्ट पहलवानों का फूल-माला पहनाकर स्वागत किया और इनामी राशि को दोनों में बराबर-बराबर बांटकर सौंप दिया।
युवाओं को व्यसनों से दूर रखने की एक सराहनीय पहल
आयोजन मंडल के सदस्यों ने बताया कि इस वार्षिक कुश्ती दंगल का आयोजन हर वर्ष बड़िये बाबा के मेले के पावन अवसर पर किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को नशे और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रखना और उन्हें खेलों की तरफ आकर्षित करना है। इस भव्य और सफल आयोजन के दौरान क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं, जिनमें अंकुर परीता, सरपंच प्रतिनिधि अजय, सरपंच राजन्ती देवी, महादेवा पटेल, प्रधानाचार्य रामाधार और राजेंद्र शामिल हैं। यह मेला और कुश्ती दंगल अब इस पूरे क्षेत्र की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और खेल भावना का एक अटूट हिस्सा बन चुके हैं।



















