राजस्थान के मेवाड़ अंचल में स्थित श्री सांवलिया सेठ मंदिर अपनी अलौकिक आस्था और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली अनूठी भेंटों के लिए देश भर में विख्यात है। यहां आने वाले भक्त अपनी श्रद्धा और मनोकामनाएं पूरी होने पर भगवान को तरह-तरह की कीमती वस्तुएं अर्पित करते हैं। इसी कड़ी में दिल्ली के एक ज्वेलरी व्यवसायी ने भगवान के दरबार में एक बेहद अनोखी भेंट पहुंचाई है, जो हर किसी के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है। व्यवसायी ने अपने व्यापार से जुड़ी मनोकामना पूरी होने की खुशी में चांदी से बने दो शानदार शोरूम सांवलिया सेठ को समर्पित किए हैं।
दिल्ली के व्यवसायी ने की अनोखी भेंट
यह विशेष भेंट दिल्ली की प्रसिद्ध फर्म गिरी जेवर महल की तरफ से श्री सांवलिया सेठ के चरणों में अर्पित की गई है। इस भेंट की सबसे बड़ी विशेषता इसका अनूठा स्वरूप है, क्योंकि आमतौर पर श्रद्धालु मंदिरों में चांदी के मुकुट, छत्र, सिक्के या आभूषण ही चढ़ाते हैं, लेकिन इस बार चांदी से बने दो पूरे शोरूम बनवाकर चढ़ाए गए हैं। इन दोनों चांदी के शोरूमों का कुल वजन 3 किलो 370 ग्राम है। इतनी भारी मात्रा में चांदी से तैयार किए गए इन कलात्मक शोरूमों की बनावट और सुंदरता देखने लायक है, जो मंदिर आने वाले अन्य श्रद्धालुओं को भी अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
व्यापारियों की आस्था का प्रमुख केंद्र
मेवाड़ का यह पवित्र धाम देश के कोने-कोने से आने वाले व्यापारियों और कारोबारियों के बीच गहरी आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है। व्यापारी वर्ग के लोग अपने व्यवसाय में तरक्की, नए वेंचर्स की शुरुआत और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना लेकर इस दरबार में पहुंचते हैं। ऐसी गहरी मान्यता है कि जब भगवान भक्तों की मुरादें पूरी कर देते हैं, तो उन्हें अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार मंदिर में भेंट चुकानी चाहिए। इससे पहले भी इस प्रसिद्ध मंदिर में भक्तों की तरफ से जमीन के टुकड़े, टावर और सोलर मॉडल जैसी कई अनोखी और हैरान करने वाली भेंटें चढ़ाई जा चुकी हैं, जो इस स्थान के प्रति लोगों के अगाध विश्वास को दर्शाती हैं।
भक्ति और आभार का अनूठा संगम
भगवान सांवलिया सेठ के दरबार में आने वाली इन बेशकीमती भेंटों का मूल्य केवल बाजार में आंकी जाने वाली सोने या चांदी की कीमत तक सीमित नहीं होता है, बल्कि इसके पीछे भक्तों की सच्ची भावना, अटूट विश्वास और मुराद पूरी होने का आनंद छिपा होता है। दिल्ली के इस व्यवसायी द्वारा अर्पित किए गए चांदी के शोरूम भी इसी भावना का जीवंत उदाहरण हैं। इस तरह की अनोखी परंपराएं इस मंदिर की ख्याति को और अधिक बढ़ा देती हैं, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लोग अपने आराध्य के प्रति समर्पण भाव से अनूठे तरीके से आभार प्रकट करते नजर आते हैं।

















