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श्रीगंगानगर की बदहाल सड़कें बनी जी का जंजाल, टूटे रास्तों से दोपहिया वाहन चालकों का निकलना हुआ मुहालराजस्थान
29 अग॰ 2026, 4:04 pm (48 मिनट पहले)· 1

श्रीगंगानगर की बदहाल सड़कें बनी जी का जंजाल, टूटे रास्तों से दोपहिया वाहन चालकों का निकलना हुआ मुहाल

राजस्थान के श्रीगंगानगर में मानसून के बाद बारिश और सीवरेज ओवरफ्लो से सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं। जगह-जगह हुए गहरे गड्ढों के कारण दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में मानसून के विदा होने के बाद शहर का बुनियादी ढांचा चरमरा गया है। बारिश का मौसम थमने के बाद अब शहर के अलग-अलग हिस्सों में खराब और टूटी-फूट सड़कें आम नागरिकों के लिए गंभीर समस्या बन चुकी हैं। जलभराव और सीवरेज ओवरफ्लो जैसी समस्याओं के कारण जिला मुख्यालय की मुख्य धमनियों से लेकर अंदरूनी बस्तियों तक की सड़कें अपनी सुध खो बैठी हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि हर तरफ बड़े-बड़े गड्ढे और उखड़ी हुई डामर नजर आती है, जिससे रोजाना इस रास्ते से गुजरने वाले हजारों मुसाफिरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

जल निकासी की कमी और सीवरेज लीकेज से बिगड़े हालात

मानसून के दौरान हुई भारी बरसात और पानी निकासी की मुकम्मल व्यवस्था न होने के कारण कई मोहल्लों में लंबे समय तक जलभराव की स्थिति बनी रही थी। पानी के भारी दबाव और सीवरेज लाइनों के रिसने के कारण डामर और सीमेंटेड सड़कें अंदर से कमजोर होकर खोखली हो गईं। जैसे ही बारिश रुकने के बाद पानी उतरा, सड़कों की ऊपरी परतें उखड़कर बाहर आ गईं और जानलेवा गड्ढे सामने आ गए। क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि हर साल बरसात के मौसम के बाद सड़कों का यही हाल हो जाता है, जिससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी दावों पर बड़े सवाल खड़े होते हैं।

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दोपहिया चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहे गड्ढे

इन खस्ताहाल सड़कों और गहरे गड्ढों की वजह से सबसे अधिक मुसीबत का सामना दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वाले लोगों को करना पड़ रहा है। विशेष तौर पर रात के अंधेरे में या जब स्ट्रीट लाइटें या तो बंद रहती हैं या उनकी रोशनी कम होती है, तब ये गड्ढे दिखाई नहीं देते हैं। कई बार वाहन चलाने वाले लोग अचानक इनमें अपने दोपहिया वाहनों समेत जा गिरते हैं, जिसके चलते वे गंभीर रूप से जख्मी हो रहे हैं। बुजुर्गों और छोटे स्कूली बच्चों के लिए इन रास्तों से पैदल गुजरना भी अब किसी बड़े खतरे से खाली नहीं बचा है। इसके अतिरिक्त, सड़कों की इस बदहाली से ऑटो और चार पहिया वाहन चालकों को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

वाहन हो रहे हैं क्षतिग्रस्त, बढ़ रहा आर्थिक बोझ

सड़कों पर फैले इन जानलेवा गड्ढों के कारण लोगों के वाहन समय से पहले ही खराब होने की कगार पर पहुंच गए हैं। आए दिन गाड़ियों के सस्पेंशन, टायर और रिम टूटने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे वाहन स्वामियों की जेब पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। शहर में रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों और दुकानदारों का कहना है कि इन टूटे-फूटे रास्तों की वजह से उनकी गाड़ियों की मरम्मत और रखरखाव का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। वाहन चालकों का यह भी दर्द है कि वे समय पर सभी प्रकार के टैक्स और अन्य शुल्क अदा करते हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें बुनियादी और सुरक्षित आवागमन के साधन तक मयस्सर नहीं हो पा रहे हैं।

प्रशासन और सरकार से जल्द मरम्मत की पुरजोर मांग

शहर के तमाम बाशिंदों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार के रवैये के खिलाफ गहरा रोष प्रकट करते हुए मांग की है कि क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का कार्य युद्ध स्तर पर जल्द से जल्द शुरू किया जाए। लोगों का स्पष्ट तौर पर कहना है कि यदि समय रहते इन रास्तों पर पेचवर्क या फिर नए सिरे से डामरीकरण का काम नहीं कराया गया, तो कभी भी कोई बड़ा और गंभीर हादसा घटित हो सकता है। स्थानीय जनता ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि जिम्मेदार प्रशासन ने इस ओर तुरंत कदम नहीं उठाया, तो उन्हें मजबूर होकर विरोध प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस गंभीर जनसमस्या पर कब तक संज्ञान लेता है और शहर के लोगों को इन बदहाल सड़कों से कब छुटकारा मिलता है।

सवाल-जवाब

श्रीगंगानगर में सड़कों की स्थिति क्यों खराब हुई है?
मानसून के दौरान हुई भारी बारिश और पानी की उचित निकासी न होने के कारण सड़कें अंदर से खोखली हो गईं।
किन वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है?
खराब सड़कों और गहरे गड्ढों की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को हो रही है।
सड़कों के टूटने का मुख्य तकनीकी कारण क्या है?
जलभराव और सीवरेज लाइनों के लीकेज के कारण डामर और सीमेंट की सड़कें अंदर से खोखली हो गईं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से क्या मांग की है?
स्थानीय लोगों ने जल्द से जल्द युद्ध स्तर पर क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत करवाने की मांग की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·14 मिनट पहले

श्रीगंगानगर की यह स्थिति केवल खराब मौसम का परिणाम नहीं, बल्कि कमजोर बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण है। मानसून के बाद हर साल सड़कों का इस तरह टूटना भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण सामग्री की ओर इशारा करता है। जनता द्वारा समय पर कर चुकाए जाने के बावजूद सुरक्षित आवागमन न मिलना गंभीर शासन संकट है। यदि जिला प्रशासन ने शीघ्र मरम्मत और गुणवत्ता की जांच नहीं की, तो जनता का आक्रोश और बढ़ सकता है, जिससे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन होने की पूरी आशंका है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 मिनट पहले

श्रीगंगानगर की सड़कों की यह दुर्दशा केवल एक नागरिक समस्या नहीं, बल्कि आपराधिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है। जब घटिया निर्माण और सीवरेज लीकेज से नागरिकों की जान जोखिम में पड़ती है, तो यह सार्वजनिक सुरक्षा का उल्लंघन बन जाता है। यदि समय पर इस आपराधिक उदासीनता की जाँच कर दोषियों पर कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता का यह आक्रोश बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।

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