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धौलपुर कलेक्ट्रेट में बिजली गुल, मोबाइल की टॉर्च में हुए नामांकनराजस्थान
29 अग॰ 2026, 4:23 pm (44 मिनट पहले)· 3

धौलपुर कलेक्ट्रेट में बिजली गुल, मोबाइल की टॉर्च में हुए नामांकन

राजस्थान के धौलपुर कलेक्ट्रेट में नगरीय निकाय चुनाव के नामांकन के दौरान अचानक बिजली गुल हो गई। इसके बाद कर्मचारियों और पहुंचे लोगों ने मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में कागजी कार्रवाई पूरी की।

धौलपुर जिले के कलेक्ट्रेट परिसर में उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब नगरीय निकाय चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के बीच अचानक बिजली गुल हो गई। बिजली जाने से पूरे कार्यालय में अंधेरा छा गया और जरूरी चुनावी कामकाज पर सीधा असर पड़ा। इस दौरान दफ्तर के कर्मचारियों के साथ-साथ नामांकन कराने पहुंचे लोगों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्थिति से निपटने के लिए कर्मचारियों ने अपने मोबाइल फोन निकाले और टॉर्च की रोशनी जलाकर दस्तावेजों की जांच और अन्य औपचारिकताएं पूरी कीं।

नामांकन प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए वहां मौजूद लोगों ने भी कर्मचारियों का पूरा सहयोग किया। दस्तावेजों को जांचने और आगे की प्रक्रिया को गति देने के वास्ते लोगों ने खुद अपने मोबाइल फोन की टॉर्च ऑन कर दी। सामान्य दिनों में जो जरूरी काम तेज रोशनी और कंप्यूटर के सहारे होते हैं, उस दिन वे काम मोबाइल की छोटी सी रोशनी के सहारे किए जाते रहे। प्रशासनिक अमले के पास इस अचानक आई तकनीकी बाधा के समय काम रोके रखने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था, इसलिए मोबाइल टॉर्च का यह अनोखा सहारा लेना पड़ा।

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चुनावी माहौल के बीच बिजली ठप होने की इस घटना से वहां पहुंचे आम नागरिकों और उम्मीदवारों में काफी नाराजगी भी दिखाई दी। चुनाव जैसे महत्वपूर्ण और व्यस्त समय में प्रशासनिक भवन की बिजली व्यवस्था का इस तरह चरमरा जाना कई बड़े सवाल खड़े करता है। लोगों के मन में यह मुख्य सवाल था कि जब इतने बड़े पैमाने पर चुनावी नामांकन की प्रक्रिया चल रही थी, तब कलेक्ट्रेट परिसर में बिजली के लिए कोई पुख्ता वैकल्पिक या जनरेटर जैसी व्यवस्था क्यों नहीं थी। अंधेरा होने की वजह से दस्तावेजों के मिलान और पर्चा दाखिल करने की प्रक्रिया में काफी असुविधा हुई, जिससे लोगों का गुस्सा फूटना स्वाभाविक था।

प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उठ रहे इन सवालों के बीच बड़ी संख्या में उम्मीदवार और उनके समर्थक लगातार कलेक्ट्रेट पहुंच रहे थे। बिजली गुल होने की इस घटना ने जिला प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी है, क्योंकि ऐसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मौकों पर बिजली जैसी बुनियादी सुविधा का निर्बाध चलना बेहद जरूरी होता है। हालांकि इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अंधेरे में भी काम जारी रखा और जनता ने भी पूरा सहयोग दिया, लेकिन इस घटना ने प्रशासनिक लापरवाही को लेकर लोगों के बीच एक बड़ी चर्चा छेड़ दी है।

नगरीय निकाय चुनाव के इस अहम दौर में धौलपुर कलेक्ट्रेट की यह घटना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है। नामांकन दाखिल करने के अंतिम और महत्वपूर्ण दिनों में जब प्रत्याशियों की भारी भीड़ उमड़ती है, तब बिजली गुल होना व्यवस्था की बड़ी चूक को दर्शाता है। मोबाइल की रोशनी में अधिकारियों और आम जनता का यह संघर्ष प्रशासनिक अमले की पोल खोलने के लिए काफी था। चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि भविष्य में इस तरह की बुनियादी समस्याओं का सामना न करना पड़े।

सवाल-जवाब

धौलपुर कलेक्ट्रेट में बिजली क्यों गुल हुई?
नगरीय निकाय चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के दौरान अचानक बिजली गुल होने से कलेक्ट्रेट परिसर में अंधेरा छा गया था।
कर्मचारियों ने अंधेरे में काम कैसे जारी रखा?
कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर दस्तावेजों की जांच और नामांकन की प्रक्रिया पूरी की।
इस घटना से लोगों पर क्या असर पड़ा?
नामांकन कराने पहुंचे लोगों और उम्मीदवारों को भारी परेशानी हुई और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर उनमें काफी नाराजगी देखी गई।
यह घटना किस चुनाव के दौरान सामने आई?
यह घटना राजस्थान में चल रहे नगरीय निकाय चुनाव के नामांकन के दौरान सामने आई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 1

Rohan Verma@rohan-verma·31 मिनट पहले

चुनाव जैसे संवेदनशील दौर में जिला मुख्यालय पर पावर बैकअप का अभाव प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर प्रमाण है। जनरेटर जैसी वैकल्पिक व्यवस्था न होना न केवल निर्वाचन प्रक्रिया की संवेदनशीलता को नजरअंदाज करना है, बल्कि यह नागरिकों और उम्मीदवारों के लोकतांत्रिक अधिकारों में बाधा उत्पन्न करता है। इस तरह की बुनियादी चूकें चुनावी प्रबंधन की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती हैं।

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