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कानपुर में पकड़ा गया सौ करोड़ का साइबर फ्रॉड रैकेट, दुबई से चल रहा था खेल, तीन गिरफ्तारउत्तर प्रदेश
29 अग॰ 2026, 4:46 pm (34 मिनट पहले)· 2

कानपुर में पकड़ा गया सौ करोड़ का साइबर फ्रॉड रैकेट, दुबई से चल रहा था खेल, तीन गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने एक बड़े ऑनलाइन धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो करीब सौ करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े में लिप्त था। फजलगंज थाना पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में एटीएम और क्रेडिट कार्ड बरामद किए हैं।

साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत कानपुर कमिश्नरेट की फजलगंज पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने ऑनलाइन ठगी करने वाले एक संगठित सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए तीन संदिग्धों को दबोच लिया है। शुरुआती तफ्तीश से यह बात सामने आई है कि इस गिरोह की जड़ें कानपुर से लेकर उन्नाव और अन्य क्षेत्रों तक फैली हुई थीं। हालांकि, इस पूरे आपराधिक नेटवर्क का मास्टरमाइंड देश से बाहर दुबई में बैठकर अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के मुताबिक, अब तक की गई जांच-पड़ताल से इस बात के संकेत मिले हैं कि इस संगठित गिरोह के तार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े हुए हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क के जरिए अब तक लगभग 100 करोड़ रुपये से अधिक की रकम की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दिया जा चुका है। पुलिस बल अब बरामद किए गए दस्तावेजों, बैंक पासबुक्स और डिजिटल गैजेट्स की मदद से इस पूरे षड्यंत्र की परतें उधेड़ने में जुटा हुआ है।

दबोचे गए तीन आरोपी और कार्रवाई

कानपुर पुलिस के आधिकारिक बयानों के अनुसार, फजलगंज थाना इलाके में नियमित चेकिंग अभियान के दौरान खुफिया तंत्र से मिली पुख्ता जानकारी पर त्वरित कार्रवाई की गई। पुलिस दस्ते ने शक के आधार पर तीन लोगों को हिरासत में लेकर जब कड़ाई से पूछताछ की, तो इस बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का कच्चा चिट्ठा सामने आ गया। पकड़े गए आरोपियों की शिनाख्त कपिल देव उर्फ संटी, अभय प्रताप और रोहित सिंह उर्फ रुद्र प्रताप सिंह के तौर पर की गई है। स्थानीय थाने की पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और संबंधित गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

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भारी मात्रा में कार्ड और उपकरण बरामद

पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि धरे गए आरोपियों के ठिकानों से साइबर ठगी और अवैध बैंकिंग गतिविधियों से जुड़े भारी संख्या में उपकरण और कागजात हाथ लगे हैं। बरामद सामान में अत्याधुनिक लैपटॉप, कई एंड्रॉइड मोबाइल फोन, पीओएस मशीनें, एटीएम कार्ड, 89 क्रेडिट कार्ड, बड़ी तादाद में सिम कार्ड, चेकबुक्स, पासबुक्स, वित्तीय लेन-देन के रजिस्टर, आधार कार्ड की ज़ेरॉक्स प्रतियां और इंक पैड जैसी संदिग्ध वस्तुएं शामिल हैं। कानपुर पुलिस अब इन तमाम जप्तशुदा डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की गहन फोरेंसिक व तकनीकी जांच कराने की पुख्ता तैयारी कर रही है ताकि धोखाधड़ी के हर एक डिजिटल सुबूत को सुरक्षित किया जा सके।

गरीब और सीधे लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग

जांच के दौरान पुलिस के हाथ जो तथ्य लगे हैं, वे चौंकाने वाले हैं। यह गिरोह मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और सीधे-सादे नागरिकों को अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों में फंसाकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट साइज तस्वीरें हासिल करता था। इन मूल दस्तावेजों के जरिए भोले-भाले लोगों के नाम पर विभिन्न बैंकों में फर्जी खाते खुलवाए जाते थे। आरोप है कि इन खातों की इंटरनेट बैंकिंग डिटेल्स और गोपनीय जानकारियां तुरंत गिरोह के अन्य गुर्गों तक ट्रांसफर कर दी जाती थीं। इसके बाद इन्हीं बैंक खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन साइबर ठगी के जरिए लूटी गई अवैध रकम को मंगाने और आगे ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था।

फर्जी फर्मों के सहारे छिपाए जाते थे पैसों के स्रोत

कानपुर पुलिस की तफ्तीश में यह बात भी खुलकर सामने आई है कि यह संगठित गिरोह फर्जी कंपनियों और फर्मों के नाम पर चालू खाते खुलवाने के अवैध धंधे में भी संलिप्त था। साइबर अपराध से आने वाली काली कमाई को एक साथ कई बैंक खातों में घुमाकर उसके मूल स्रोत का पता लगाना बेहद जटिल बना दिया जाता था। कानून प्रवर्तन एजेंसियां अब यह पता लगाने में पूरी ताकत झोंक रही हैं कि आखिर इस सिंडिकेट ने कुल कितने फर्जी खाते खुलवाए, किन-किन मजबूर लोगों के कागजातों का दुरुपयोग किया गया और इन संदिग्ध खातों के माध्यम से कुल कितनी धनराशि का अवैध आदान-प्रदान किया गया है।

दुबई से संचालित हो रहा था पूरा नेटवर्क

खुफिया और तकनीकी जांच से यह बात स्पष्ट हुई है कि इस विशालकाय साइबर नेटवर्क का मुख्य सरगना सुल्तान मिर्जा है, जो फिलहाल दुबई में बैठकर इस आपराधिक साम्राज्य की रूपरेखा तैयार कर रहा था और वहीं से निर्देश दे रहा था। कानपुर और उन्नाव के अलावा कई अन्य जिलों में इस गिरोह के तमाम गुर्गे और स्थानीय मददगार सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। पुलिस अब इस पूरे तंत्र से जुड़े अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका की भी बारीकी से जांच कर रही है। मुख्य आरोपी सुल्तान मिर्जा के अलावा पुलिस महकमा जावेद, केपी और अमित समेत अन्य फरार चल रहे आरोपियों की सरगर्मी से तलाश कर रहा है।

वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल जारी

पुलिस कमिश्नर के अनुसार, अब तक की गई प्राथमिक जांच में सौ करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध लेन-देन के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। हालांकि, इस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने का काम अभी भी युद्ध स्तर पर जारी है। जब्त किए गए बैंक खातों, कंप्यूटर डेटा और अन्य वित्तीय अभिलेखों की मुकम्मल जांच के बाद ही ठगी की कुल वास्तविक रकम और इस नेटवर्क के भौगोलिक विस्तार का सही आंकड़ा सामने आ सकेगा। फिलहाल फजलगंज थाने की पुलिस गिरफ्त में आए आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रही है और उनके विदेशी संपर्कों को खंगालने में जुटी है।

सवाल-जवाब

कानपुर में पकड़े गए साइबर फ्रॉड नेटवर्क का कुल कितने करोड़ का अनुमान है?
पुलिस जांच के अनुसार इस नेटवर्क के जरिए करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी किए जाने की आशंका है।
इस मामले में पुलिस ने किन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है?
पुलिस ने कपिल देव उर्फ संटी, अभय प्रताप और रोहित सिंह उर्फ रुद्र प्रताप सिंह को गिरफ्तार किया है।
गिरोह का कथित मुख्य सरगना कहां बैठकर नेटवर्क चला रहा था?
गिरोह का कथित मुख्य सरगना सुल्तान मिर्जा वर्तमान में दुबई में रहकर पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था।
आरोपियों के कब्जे से कुल कितने क्रेडिट कार्ड बरामद हुए हैं?
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 89 क्रेडिट कार्ड समेत कई अन्य बैंकिंग उपकरण बरामद किए हैं।
यह कार्रवाई किस पुलिस थाने के अंतर्गत की गई है?
यह कार्रवाई कानपुर कमिश्नरेट के फजलगंज थाना क्षेत्र में चेकिंग के दौरान की गई है।
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