राजस्थान के टोंक में स्थित सरकारी सआदत अस्पताल की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। अस्पताल परिसर के भीतर नर्सिंग ऑफिसर्स के निर्धारित दायित्वों को बाहरी व्यक्तियों द्वारा निभाए जाने और रात के वक्त भी ऐसे लोगों की बेरोक-टोक मौजूदगी ने कई तरह की प्रशासनिक खामियों को उजागर कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अस्पताल प्रबंधन की तरफ से एक अंतिम चेतावनी आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत सआदत अस्पताल और जनाना अस्पताल के सभी नर्सिंग ऑफिसर्स को यह सख्त हिदायत दी गई है कि वे किसी भी बाहरी व्यक्ति से अस्पताल का काम न करवाएं।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर इन बाहरी लोगों को अस्पताल के संवेदनशील परिसरों में प्रवेश करने और काम करने की अनुमति किसने दी थी। जब अस्पताल की इस अव्यवस्था और नियमों के उल्लंघन की पुख्ता जानकारी प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (PMO) डॉ. प्रतीक सालोदिया तक पहले ही पहुंच चुकी थी, तो शुरुआती दौर में ही कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अब जबकि अंतिम चेतावनी का यह आदेश सामने आ चुका है, तो लोगों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर इस तरह के सख्त कदम उठाने में इतनी देर क्यों लगाई गई। हालांकि, इन तीखे सवालों के जवाब में अस्पताल प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक और विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है, जिससे आदेश के पीछे की असल वजहों का पता चल सके।
आठ बिंदुओं वाला चेतावनी आदेश और बढ़ते सवाल
सआदत अस्पताल और जनाना अस्पताल के नर्सिंग ऑफिसर्स के वास्ते जारी किए गए इस अंतिम चेतावनी आदेश में कुल आठ महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है। इन बिंदुओं के सार्वजनिक होने के बाद से ही स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था को लेकर चर्चाएं और बहस तेज हो गई हैं। आदेश में मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया गया है कि नर्सिंग कर्मियों के काम को कोई बाहरी शख्स अंजाम न दे। अब स्थानीय लोगों और जानकारों के बीच यह सवाल तैर रहा है कि अगर अस्पताल के भीतर ऐसी व्यवस्था लंबे समय से चल रही थी, तो इसे रोकने के लिए पूर्व में कौन-से प्रशासनिक कदम उठाए गए थे। इसके अलावा, रात के समय अस्पताल के कमरों और वार्डों में बाहरी व्यक्तियों की संदिग्ध मौजूदगी पर भी सुरक्षा और निगरानी तंत्र की कार्यशैली कटघरे में खड़ी हो रही है।
प्रमुख चिकित्सा अधिकारी की भूमिका पर संदेह
इस पूरे प्रकरण का केंद्रबिंदु पीएमओ डॉ. प्रतीक सालोदिया की भूमिका और उनकी कार्यशैली को माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं और बाहरी लोगों के दखल से जुड़ी शिकायतें सीधे तौर पर पीएमओ के संज्ञान में लाई जा चुकी थीं। इसके बावजूद समय रहते उचित कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई अमल में न लाया जाना कई तरह की प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है। अब जब अंतिम चेतावनी का यह आदेश जारी किया गया है, तो इस बात पर भी मंथन हो रहा है कि क्या प्रशासन ने शुरुआती शिकायतों को महज कागजी औपचारिकता मानकर नजरअंदाज कर दिया था। यदि अस्पताल के कर्मचारियों की जगह बाहरी लोग कामकाज संभाल रहे थे, तो इसकी प्रत्यक्ष जिम्मेदारी किसकी बनती है और यह अवैध व्यवस्था किसकी शह पर फल-फूल रही थी, इन तमाम बिंदुओं के स्पष्ट उत्तर केवल उच्चस्तरीय जांच और अस्पताल प्रशासन के आधिकारिक बयानों के बाद ही मिल पाएंगे।
प्रतिबंधित दवा चोरी और गिरफ्तारी के बाद गरमाया मामला
सआदत अस्पताल की साख को तब और अधिक धक्का लगा जब वहां प्रतिबंधित दवाओं की चोरी का मामला उजागर हुआ और इस सिलसिले में एक नर्सिंग ऑफिसर को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया। इस सनसनीखेज घटना के बाद से ही अस्पताल के भीतर आंतरिक कामकाज, निगरानी प्रणालियों और सुरक्षा व्यवस्था की कलई खुल गई है। मरीज अपनी बीमारियों का इलाज कराने और जीवन की उम्मीद लेकर सरकारी अस्पतालों का रुख करते हैं, ऐसे में यदि वहां तैनात स्वास्थ्य कर्मियों के स्थान पर अनधिकृत बाहरी लोग कामकाज करते नजर आएं, तो उनकी वास्तविक पहचान, जवाबदेही और प्रवेश की वैधता की गहन जांच होना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। रात्रि के समय अस्पताल परिसर में बाहरी व्यक्तियों के ठहरने और घूमने के उद्देश्य को लेकर भी पुलिस और प्रशासन को पूरी सच्चाई जनता के सामने रखनी चाहिए।
क्या प्रशासनिक जवाबदेही से बचने की एक चाल है यह आदेश?
अंतिम चेतावनी आदेश के जारी होने के बाद से यह तीखी आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि क्या पीएमओ डॉ. प्रतीक सालोदिया ने अपनी प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदारी से जुड़े सवालों से खुद को बचाने के लिए यह महज एक औपचारिकता के रूप में आदेश जारी किया है। हालांकि, यह फिलहाल जनता और विभिन्न हलकों में उठाया जा रहा एक सवाल मात्र है, जिसे साबित करने के लिए अभी तक कोई ठोस दस्तावेज या अकाट्य प्रमाण सार्वजनिक नहीं हुआ है। यही कारण है कि इस आदेश के जारी होने के पीछे की असली मंशा को समझने के लिए अस्पताल प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बेहद जरूरी है। फिलहाल, दोनों अस्पतालों के नर्सिंग स्टाफ के लिए जारी यह आठ सूत्रीय आदेश एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है, और अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस आदेश के बाद बाहरी लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए जमीन पर क्या ठोस कदम उठाता है।






















