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पार्टनर की बांह पर धीमा स्पर्श सुधार सकता है खराब मूड, हंगरी की स्टडी में 50% तक सुधार का दावारिश्ते
13 अग॰ 2026, 1:19 pm (31 दिन पहले)· 0

पार्टनर की बांह पर धीमा स्पर्श सुधार सकता है खराब मूड, हंगरी की स्टडी में 50% तक सुधार का दावा

एक नई रिसर्च के मुताबिक पार्टनर द्वारा बांह पर 5 सेंटीमीटर प्रति सेकंड की धीमी गति से हाथ फेरने से खराब मूड 40 से 50 प्रतिशत तक बेहतर हो सकता है।

रिश्तों में आपसी गर्माहट और भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखने के लिए हर बार महंगे तोहफे, भव्य डेट या बड़े सरप्राइज देना जरूरी नहीं होता। कई बार सिर्फ एक छोटा सा, सहज और प्रेमपूर्ण स्पर्श भी गहरे तनाव को दूर करने में सक्षम होता है। यूरोप में हुए एक नए मनोवैज्ञानिक अध्ययन से यह बात सामने आई है कि पार्टनर का बेहद धीमा और हल्का स्पर्श किसी व्यक्ति के खराब मूड को तेजी से बेहतर बना सकता है। जब कोई साथी अपनी पार्टनर की बांह के अंदरूनी हिस्से पर बहुत धीमी और नियंत्रित गति से हाथ फेरता है, तो इसका असर मानसिक शांति के रूप में तुरंत देखने को मिलता है। इस अध्ययन की सबसे खास बात यह रही कि इसका सकारात्मक प्रभाव उन जोड़ों में भी देखा गया जो अपने वर्तमान रिश्ते से पूरी तरह संतुष्ट या खुश नहीं थे।

करोलि गैस्पार यूनिवर्सिटी का अध्ययन और प्रयोग की रूपरेखा

यह महत्वपूर्ण शोध हंगरी की प्रसिद्ध करोलि गैस्पार यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं द्वारा पूरा किया गया है। इस अध्ययन में कुल 110 पुरुषों और महिलाओं को प्रतिभागी के रूप में शामिल किया गया था। प्रयोग की शुरुआत करने से पहले शोधकर्ताओं ने सभी 110 प्रतिभागियों से उनके निजी रिश्ते की स्थिति, आपसी समझ और रिलेशनशिप सैटिस्फैक्शन के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई, ताकि उनके व्यक्तिगत संबंधों का असर आंकड़ों में स्पष्ट देखा जा सके।

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इसके बाद वैज्ञानिकों ने प्रयोगात्मक प्रक्रिया शुरू की। प्रत्येक प्रतिभागी की दाहिनी बांह के अंदरूनी हिस्से पर कलाई से लेकर कोहनी की दिशा में सटीक 10 सेंटीमीटर लंबी एक सीधी रेखा अंकित की गई। प्रतिभागियों के शारीरिक बदलावों और हृदय की धड़कनों के पैटर्न को सटीक रूप से मापने के लिए उनके सीने पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रोड सेंसर लगाए गए। इन इलेक्ट्रोडों का मुख्य काम स्पर्श के दौरान हार्ट रिदम में होने वाले सूक्ष्म से सूक्ष्म उतार-चढ़ाव को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड करना था।

चेरी ब्लॉसम पंखुड़ी जैसी गति और तीन मिनट का स्पर्श

प्रयोग के अगले चरण में सभी प्रतिभागियों का मूड कृत्रिम रूप से थोड़ा खराब करने का प्रयास किया गया। इसके लिए उन्हें स्क्रीन पर ऐसी तस्वीरें दिखाई गईं जो मन में नकारात्मक भावनाएं और तनाव पैदा करती हैं। जब प्रतिभागियों की मानसिक स्थिति में गिरावट दर्ज की गई, तब उन्हें तीन अलग-अलग प्रयोगात्मक समूहों में विभाजित किया गया।

पहले समूह में शामिल प्रतिभागियों की बांह पर बने 10 सेंटीमीटर के हिस्से को उनके अपने रोमांटिक पार्टनर द्वारा लगभग तीन मिनट की अवधि तक सहलाया गया। इस दौरान हाथ फेरने की गति को बेहद सटीक रखा गया था, जो कि करीब 5 सेंटीमीटर प्रति सेकंड थी। दूसरे समूह में प्रतिभागियों की बांह पर ठीक उसी गति और अवधि के साथ स्पर्श का कार्य किसी अज्ञात रिसर्चर यानी शोधकर्ता द्वारा किया गया। वहीं तीसरे नियंत्रण समूह के प्रतिभागियों को बिना किसी स्पर्श के केवल तीन मिनट तक अपनी बांह की ओर लगातार देखने के लिए कहा गया।

इस प्रयोग में स्पर्श की गति और दबाव को एक समान बनाए रखना एक बड़ी चुनौती थी। शोधकर्ताओं ने इस 5 सेंटीमीटर प्रति सेकंड की गति की तुलना वसंत के सुहावने मौसम में पेड़ से टूटकर हवा में गिरती हुई चेरी ब्लॉसम फूल की पंखुड़ी की प्राकृतिक गति से की। स्पर्श में किसी भी तरह के मानवीय भिन्नता या अतिरिक्त दबाव से बचने के लिए, इस प्रयोग में पानी के रंगों में इस्तेमाल होने वाले एक बेहद मुलायम पेंटब्रश का उपयोग किया गया था। इस पेंटब्रश तकनीक की मदद से हर प्रतिभागी को ठीक एक समान गति, हल्कापन और स्पर्श की अनुभूति कराई जा सकी।

मूड स्कोर में 40 से 50 प्रतिशत का बड़ा सुधार

जब प्रयोग के बाद एकत्रित किए गए आंकड़ों और दिल की धड़कनों के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया, तो परिणाम बेहद चौंकाने वाले और सकारात्मक निकले। जिन प्रतिभागियों की बांह पर उनके अपने रोमांटिक पार्टनर ने तीन मिनट तक हल्का स्पर्श किया था, उनके मूड स्कोर में लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक का जबरदस्त सुधार दर्ज किया गया। यह सुधार पुरुषों और महिलाओं दोनों में लगभग एक समान स्तर पर देखा गया।

अध्ययन के आंकड़े बताते हैं कि जब कोई व्यक्ति मानसिक रूप से परेशान या उदास होता है, तब उसके साथी का महज एक धीमा स्पर्श उसकी मानसिक स्थिति को बदलने में जादू जैसा काम कर सकता है। जब पार्टनर के स्पर्श की तुलना अज्ञात शोधकर्ता के स्पर्श से की गई, तो पार्टनर का स्पर्श लगभग 20 प्रतिशत अंक अधिक प्रभावी साबित हुआ। इससे यह साफ जाहिर होता है कि केवल स्पर्श की तकनीक ही नहीं, बल्कि स्पर्श करने वाले व्यक्ति के साथ बना भावनात्मक रिश्ता भी मस्तिष्क पर सीधा असर डालता है।

अध्ययन का सबसे आश्चर्यजनक पहलू यह था कि जिन लोगों ने शुरुआती सर्वे में अपने रिश्ते को लेकर कम संतोष जाहिर किया था या जो अपने पार्टनर से थोड़े असंतुष्ट थे, उनकी बांह पर जब पार्टनर ने हाथ फेरा तो उनके मूड में भी स्पष्ट सुधार देखने को मिला। यानी रिश्ते में चाहे थोड़ी दूरी या नाराजगी ही क्यों न हो, एक धीमा और कोमल स्पर्श दिमाग को शांत करने और तनाव को कम करने में अपनी भूमिका निभाता है।

त्वचा में मौजूद सी-टैक्टाइल फाइबर्स का न्यूरोबायोलॉजिकल विज्ञान

वैज्ञानिकों ने इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश की कि आखिर पार्टनर का इतना हल्का स्पर्श दिमाग और मूड पर इतना गहरा प्रभाव कैसे डालता है। शोधकर्ताओं के अनुसार इसका मुख्य कारण इंसान की त्वचा के भीतर मौजूद एक विशेष प्रकार का न्यूरोलॉजिकल तंत्र है, जिसे सी-टैक्टाइल फाइबर्स कहा जाता है।

ये सी-टैक्टाइल फाइबर्स त्वचा में स्थित ऐसी खास नसों के रेशे होते हैं जो केवल बहुत धीमे, हल्के और सुखद स्पर्श के प्रति ही प्रतिक्रिया देते हैं। जब कोई व्यक्ति किसी की बांह या त्वचा पर बहुत धीरे से हाथ फेरता है, तो ये फाइबर्स तुरंत सक्रिय हो जाते हैं और मस्तिष्क के भावनात्मक केंद्रों को सुरक्षा, सामाजिक जुड़ाव, अपनापन और भरोसे के संकेत भेजते हैं। यही वजह है कि जब कोई अपना प्रिय व्यक्ति परेशानी के क्षणों में हमारा हाथ पकड़ता है या कंधे पर हाथ रखता है, तो बिना कुछ कहे भी मन को अचानक बहुत सुकून और शांति महसूस होने लगती है।

कपल्स थेरेपी में संभावनाएं और आपसी सहमति का नियम

अध्ययन में शामिल वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह के धीमे और वैज्ञानिक रूप से प्रभावी स्पर्श का उपयोग उन कपल्स की मदद के लिए किया जा सकता है जो आपसी तनाव या मुश्किल भावनात्मक दौर से गुजर रहे हैं। सही मार्गदर्शन और परिस्थितियों के तहत इस स्पर्श तकनीक को कपल्स थेरेपी और मैरिज काउंसलिंग के दौरान एक सहायक माध्यम के रूप में अपनाया जा सकता है।

हालांकि शोधकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी भी दी है कि हल्के स्पर्श को रिश्ते की हर गंभीर समस्या का रामबाण इलाज नहीं माना जाना चाहिए। यदि किसी जोड़े के बीच लगातार झगड़े, गंभीर मतभेद, धोखेबाजी या भरोसे की बुनियादी कमी बनी हुई है, तो केवल हाथ सहलाने या स्पर्श करने से समस्या सुलझ नहीं सकती। एक स्वस्थ और दीर्घकालिक रिश्ते की वास्तविक नींव हमेशा आपसी सम्मान, पारदर्शी बातचीत, गहरा भरोसा और एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता पर ही टिकी होती है।

इसके अलावा, स्पर्श का सबसे बुनियादी और अटूट नियम आपसी सहमति और सहजता है। यदि पार्टनर किसी भी कारण से उस समय स्पर्श के लिए तैयार या सहज महसूस नहीं कर रहा है, तो उसकी व्यक्तिगत सीमा और इच्छा का सम्मान करना सबसे जरूरी है। अंततः, प्रेम और देखभाल व्यक्त करने के लिए हमेशा शब्दों की जरूरत नहीं होती; कई बार एक छोटा सा, धीमा और सच्चा स्पर्श भी पार्टनर को यह अहसास कराने के लिए काफी होता है कि वह आपकी जिंदगी में कितना मायने रखता है।

सवाल-जवाब

क्या पार्टनर का बांह सहलाना सचमुच खराब मूड सुधार सकता है?
हां, रिसर्च के अनुसार पार्टनर द्वारा बांह के अंदरूनी हिस्से पर 5 सेंटीमीटर प्रति सेकंड की गति से हाथ फेरने पर पुरुषों और महिलाओं का मूड 40 से 50 प्रतिशत तक सुधर सकता है।
इस रिसर्च में किस गति से हाथ फेरने को सबसे प्रभावी माना गया?
रिसर्च में कलाई से कोहनी की ओर 5 सेंटीमीटर प्रति सेकंड की धीमी गति को सबसे प्रभावी पाया गया, जिसकी तुलना वसंत में गिरती चेरी ब्लॉसम पंखुड़ी की गति से की गई है।
क्या यह स्पर्श उन लोगों पर भी असर करता है जो रिश्ते से खुश नहीं हैं?
हां, अध्ययन में पाया गया कि जो लोग अपने रिश्ते से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे, उन पर भी पार्टनर के इस हल्के स्पर्श का सकारात्मक असर देखा गया।
पार्टनर के स्पर्श का असर किसी अनजान व्यक्ति के स्पर्श से कितना अलग होता है?
शोध में पाया गया कि अनजान रिसर्चर के स्पर्श की तुलना में रोमांटिक पार्टनर का स्पर्श करीब 20 प्रतिशत अंक अधिक प्रभावी था।
त्वचा में मौजूद सी-टैक्टाइल फाइबर्स क्या काम करते हैं?
सी-टैक्टाइल फाइबर्स त्वचा में स्थित ऐसी नसें हैं जो केवल बहुत धीमे और हल्के स्पर्श को महसूस करती हैं और मस्तिष्क को सुरक्षा, सामाजिक जुड़ाव और अपनापन का अहसास कराती हैं।
क्या केवल हाथ सहलाने से रिश्ते की हर समस्या हल हो सकती है?
नहीं, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि गंभीर मतभेद या भरोसे की कमी को केवल स्पर्श से खत्म नहीं किया जा सकता; उसके लिए आपसी बातचीत, भरोसा और सम्मान जरूरी है।
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