मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित गौरिहार तहसील का महाराजपुर गांव एक विशेष धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां स्थित बिदेही बाबा मंदिर को स्थानीय लोग सर्प मंदिर के नाम से भी पहचानते हैं। इस पवित्र स्थान को लेकर यह गहरा विश्वास है कि यदि किसी व्यक्ति को जहरीला सांप काट ले और उसे जीवित अवस्था में यहां लाया जाए, तो वह पूरी तरह स्वस्थ होकर ही लौटता है। नागपंचमी के पवन पर्व पर इस धाम में भक्तों का तांता लगा रहता है, जहां लोग बाबा की कृपा प्राप्त करने के लिए दूर-दूर से यात्रा करके पहुंचते हैं।
राजाओं के दौर की समाधि और मंदिर की उत्पत्ति
मंदिर के पुजारी राजकुमार तिवारी के अनुसार, इस स्थल का इतिहास प्राचीन राजशाही के समय से जुड़ा हुआ है। अतीत में एक राजा अपने राजसी जीवन को त्यागकर एकांतवास की खोज में इस घने जंगल में आए थे। यहां उन्होंने लंबे समय तक साधना की और बाद में जीवित समाधि ले ली। समय बीतने के साथ उसी पवित्र समाधि स्थल के ऊपर भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया, जिसे आज बिदेही बाबा मंदिर के रूप में पूजा जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि राजा की आध्यात्मिक ऊर्जा और आशीर्वाद आज भी इस स्थान पर जीवित है, जिससे यहां आने वाले हर पीड़ित को कष्टों से मुक्ति मिलती है।
सर्पदंश के बाद अपनाए जाने वाले नियम और पारंपरिक उपचार विधि
सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति के उपचार के लिए मंदिर में एक निश्चित पारंपरिक प्रक्रिया का पालन किया जाता है। पुजारी राजकुमार तिवारी बताते हैं कि जैसे ही किसी व्यक्ति को सांप काटता है, सबसे पहले बैदेही बाबा की जय का उद्घोष करते हुए बालों में एक मजबूत गांठ बांधी जाती है। इसके पश्चात पीड़ित को देसी घी और काली मिर्च का मिश्रण पिलाया जाता है। इस दौरान मरीज को पानी पीने की सख्त मनाही होती है।
इन शुरुआती चरणों के तुरंत बाद पीड़ित व्यक्ति को बिना किसी देरी के महाराजपुर स्थित बैदेही बाबा मंदिर लाया जाता है। मंदिर परिसर में पहुंचकर मरीज फिर से बाबा का जयकारा लगाता है और समाधि की परिक्रमा करता है। मान्यता है कि सांप कितना भी जहरीला क्यों न हो, बाबा के दरबार में आने पर मरीज की जान बच जाती है। विशेष रूप से बरसात के मौसम में हर दिन 20 से 25 सर्पदंश के मरीज यहां पहुंचते हैं। कई बार देर रात में भी पीड़ित लोग मंदिर आते हैं, जिसके लिए पुजारी स्वयं अपने घर से भागकर मंदिर पहुंचते हैं और रात में ही परिक्रमा करवाकर उपचार प्रक्रिया संपन्न कराते हैं।
नागपंचमी पर उमड़ती है मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की भीड़
नागपंचमी का त्यौहार इस मंदिर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर होता है। इस दिन मध्य प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु महाराजपुर पहुंचते हैं। मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगती हैं। भक्तगण बैदेही बाबा को प्रसन्न करने के लिए मुख्य रूप से पान, बताशा और नारियल का चढ़ावा चढ़ाते हैं और सुख-समृद्धि तथा आरोग्य का आशीर्वाद मांगते हैं।



















