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अजमेर के पुष्कर में ब्रह्मा जी के कमल से बने तीन पवित्र क्षेत्र, जानिए इनकी पौराणिक कथाधर्म
27 अग॰ 2026, 6:24 am (35 दिन पहले)· 3

अजमेर के पुष्कर में ब्रह्मा जी के कमल से बने तीन पवित्र क्षेत्र, जानिए इनकी पौराणिक कथा

राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित धार्मिक नगरी पुष्कर के तीन पवित्र क्षेत्रों ब्रह्म पुष्कर, मध्य पुष्कर और बूढ़ा पुष्कर की उत्पत्ति भगवान ब्रह्मा के कमल पुष्प से मानी जाती है। जानिए इस पौराणिक कथा का रहस्य और धार्मिक महत्व।

राजस्थान के अजमेर जिले में बसा धार्मिक स्थल पुष्कर अपनी अगाध आस्था, समृद्ध पौराणिक मान्यताओं और मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता के लिए पूरी दुनिया में विशेष पहचान रखता है। यहाँ जगतपिता भगवान ब्रह्मा का ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध मंदिर स्थापित है। इसके साथ ही इस पावन नगरी में अनेक ऐसे तीर्थ स्थल विद्यमान हैं, जिनका उल्लेख प्राचीन धर्म ग्रंथों और लोक कथाओं में प्रमुखता से मिलता है। पुष्कर की मुख्य धार्मिक पहचान यहाँ स्थित तीन पावन क्षेत्रों यानी ब्रह्म पुष्कर, मध्य पुष्कर और बूढ़ा पुष्कर से जुड़ी हुई है। सनातन मान्यताओं के अनुसार, इन तीनों पावन क्षेत्रों का निर्माण भगवान ब्रह्मा के कर-कमलों में सुशोभित दिव्य कमल के पुष्प से हुआ था।

महायज्ञ के लिए उपयुक्त स्थान की चिंता

पौराणिक कथाओं के संदर्भ में कपालेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी विस्तृत विवरण देते हैं। वे बताते हैं कि जब जगतपिता ब्रह्मा जी ने संपूर्ण सृष्टि की रचना पूर्ण कर ली, तब उन्होंने पृथ्वी पर प्राणी मात्र के कल्याण और लोक कल्याण की भावना से एक अत्यंत विशाल धार्मिक यज्ञ आयोजित करने का संकल्प लिया। परंतु इस महायज्ञ को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए एक परम पवित्र और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से सर्वथा उपयुक्त स्थान का चयन करना आवश्यक था। ब्रह्मा जी इस बात को लेकर गहरी चिंता में पड़ गए कि संपूर्ण पृथ्वी पर ऐसा कौन सा स्थल है, जो इस महान धार्मिक अनुष्ठान की पवित्रता के अनुकूल हो सके।

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आकाशवाणी का दिव्य संकेत और कमल का गमन

जब भगवान ब्रह्मा यज्ञ स्थल के चुनाव को लेकर विचारमग्न और चिंतित थे, उसी समय उन्हें आकाश से एक दिव्य संदेश यानी आकाशवाणी सुनाई दी। इस आकाशवाणी में ब्रह्मा जी को एक विशेष मार्गदर्शक संकेत प्राप्त हुआ। उन्हें निर्देश दिया गया कि वे अपने हाथ में धारण किए हुए दिव्य कमल के पुष्प को गगन की ओर उछाल दें। दिव्य संकेत के अनुसार, वह कमल का फूल आकाश मार्ग से होकर धरती पर जिस स्थान पर भी गिरेगा, वही भूमि खंड इस महायज्ञ के आयोजन के लिए सबसे पवित्र और सर्वोत्तम माना जाएगा। आकाशवाणी के आदेश को शिरोधार्य करते हुए ब्रह्मा जी ने बिना किसी विलंब के अपने हाथ का कमल आकाश की दिशा में छोड़ दिया।

तीन अलग-अलग स्थानों पर कमल गिरने से बने तीन पुष्कर

भगवान ब्रह्मा द्वारा गगन की ओर छोड़ा गया वह अलौकिक कमल का पुष्प धरती की ओर बढ़ते हुए तीन अलग-अलग स्थानों पर स्पर्श हुआ। मान्यताओं के अनुसार, कमल का पुष्प सर्वप्रथम जिस पहले स्थान पर गिरा, वह क्षेत्र आगे चलकर 'बूढ़ा पुष्कर' के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसके पश्चात वह दिव्य पुष्प जिस दूसरे स्थान पर उतरा, उसे 'मध्य पुष्कर' की संज्ञा दी गई। अंत में, कमल पुष्प के तीसरे स्थान पर गिरने से 'ब्रह्म पुष्कर' का निर्माण हुआ। इस प्रकार केवल एक दिव्य कमल के पुष्प के तीन अलग-अलग स्थलों को स्पर्श करने से पुष्कर के ये तीनों पवित्र तीर्थ क्षेत्र अस्तित्व में आए।

श्रद्धालुओं का आकर्षण और इन तीनों क्षेत्रों का धार्मिक महत्व

पुष्कर के इन तीनों भागों की यह अति प्राचीन और अलौकिक पौराणिक कथा सदियों से देश और दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती रही है। अपनी इसी विशेष पौराणिक पृष्ठभूमि के कारण पुष्कर नगरी का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व संपूर्ण भारतवर्ष सहित पूरे विश्व में स्थापित है। यहाँ आने वाले तीर्थयात्री केवल मुख्य ब्रह्म पुष्कर के दर्शन ही नहीं करते, बल्कि वे मध्य पुष्कर और बूढ़ा पुष्कर की पौराणिक महत्ता और पवित्रता को भी गहराई से समझते हैं तथा इन तीनों स्थलों पर जाकर नमन करते हैं।

सवाल-जवाब

पुष्कर के तीन पवित्र क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
पुष्कर के तीन पवित्र क्षेत्र ब्रह्म पुष्कर, मध्य पुष्कर और बूढ़ा पुष्कर हैं।
इन तीनों पुष्कर क्षेत्रों का निर्माण कैसे हुआ?
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान ब्रह्मा के हाथ में स्थित एक कमल पुष्प को आकाश में छोड़ने पर वह जिन तीन स्थानों पर गिरा, वहीं इन क्षेत्रों का निर्माण हुआ।
भगवान ब्रह्मा ने कमल पुष्प आकाश में क्यों छोड़ा था?
सृष्टि रचना के बाद लोक कल्याण हेतु यज्ञ करने के लिए सबसे उपयुक्त और पवित्र स्थान का चयन करने हेतु ब्रह्मा जी ने आकाशवाणी के निर्देश पर कमल पुष्प छोड़ा था।
इस पौराणिक कथा का उल्लेख किस मंदिर के पुजारी ने किया है?
इस पौराणिक कथा का विवरण अजमेर के पुष्कर स्थित कपालेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी ने दिया है।
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