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अमरनाथ यात्रा का समापन और चंद्र ग्रहण का साया: 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा पर बनेगा अद्भुत और दुर्लभ संयोगधर्म
22 अग॰ 2026, 12:03 pm (2 घंटे पहले)· 2

अमरनाथ यात्रा का समापन और चंद्र ग्रहण का साया: 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा पर बनेगा अद्भुत और दुर्लभ संयोग

28 अगस्त 2026 को सावन पूर्णिमा के दिन अमरनाथ यात्रा का समापन और चंद्र ग्रहण का दुर्लभ योग बन रहा है। भारत में ग्रहण न दिखने के कारण सूतक काल मान्य नहीं होगा।

धार्मिक और खगोलीय हलचलों से भरा एक बेहद खास दिन इस बार सावन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर देखने को मिलने वाला है। इस साल 28 अगस्त को शुक्रवार के दिन सावन पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा, जो कई मायनों में ऐतिहासिक और अनोखा रहने वाला है। इस खास तिथि पर एक तरफ जहां देश की प्रसिद्ध धार्मिक अमरनाथ यात्रा का अंतिम चरण पूरा होगा, वहीं दूसरी तरफ आकाश में चंद्र ग्रहण का दुर्लभ खगोलीय नजारा भी देखने को मिलेगा। ज्योतिषीय और धार्मिक दोनों दृष्टियों से इस एक ही दिन कई बड़े आयोजनों का एक साथ पड़ना इस तिथि को बेहद खास बना रहा है। अमरनाथ यात्रा अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुकी है और 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा के पावन अवसर पर छड़ी मुबारक की मौजूदगी में बाबा अमरनाथ की गुफा में विशेष पूजा-अर्चना के बाद यह यात्रा पूरी तरह संपन्न हो जाएगी। इस स्थिति के बीच आम जनमानस और श्रद्धालुओं के मन में लगातार यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस खगोलीय ग्रहण का अमरनाथ यात्रा के समापन और अन्य अनुष्ठानों पर कोई असर पड़ेगा या नहीं।

3 घंटे 18 मिनट का आंशिक चंद्र ग्रहण और सूतक की स्थिति

इस बार 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा के मौके पर लगने वाला चंद्र ग्रहण एक आंशिक ग्रहण होगा। भारतीय समयानुसार इस खगोलीय घटना का आंशिक चरण सुबह करीब 8:04 बजे से शुरू होकर पूर्वाह्न 11:22 बजे तक सक्रिय रहेगा, जबकि ग्रहण का सबसे ज्यादा प्रभाव सुबह करीब 9:43 बजे के आसपास दर्ज किया जाएगा। इस पूरे चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 18 मिनट लंबी रहने वाली है। हालांकि सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि उस समय भारत में दिन का समय होगा और चंद्रमा क्षितिज के नीचे स्थित रहेगा, जिसकी वजह से इस अद्भुत खगोलीय घटना को यहाँ की धरती से खुली आँखों से देख पाना संभव नहीं हो पाएगा। चूंकि भौगोलिक स्थिति के कारण यह ग्रहण भारत में बिल्कुल भी नजर नहीं आएगा, इसलिए इसका कोई भी सूतक काल यहाँ मान्य नहीं माना जाएगा। भारत में इसके दृश्यमान न होने की वजह से अमरनाथ यात्रा के समापन पर होने वाली पूजा-पाठ और भाई-बहन के पवित्र प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन के पर्व पर इसका किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष या नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगेगा साल का आखिरी चंद्र ग्रहण

पंचांग और ज्योतिष की गणनाओं के अनुसार, सावन पूर्णिमा के दिन घटने वाली साल की यह आखिरी चंद्र ग्रहण की घटना कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र के अंतर्गत संपन्न होगी। इस विशेष खगोलीय अवधि के दौरान चंद्रमा का एक बहुत बड़ा हिस्सा पृथ्वी की विशाल छाया के पीछे छिप जाएगा। इस प्रक्रिया के चलते चंद्रमा का रंग सामान्य सफेद की बजाय गहरे लाल या तांबे के रंग जैसा नजर आने लगेगा, और इसी अद्भुत रंगत के कारण इसे ब्लड मून के नाम से भी पुकारा जाता है। इस बार सावन पूर्णिमा का धार्मिक महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है क्योंकि ठीक इसी दिन रक्षाबंधन का लोकप्रिय पर्व भी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। सनातन धर्म में सावन पूर्णिमा की तिथि भाई और बहन के आपसी प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प से जुड़े पावन पर्व के रूप में एक बहुत ही खास स्थान रखती है, जहाँ बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

छड़ी मुबारक के साथ 28 अगस्त को पूरी होगी अमरनाथ यात्रा

पवित्र छड़ी मुबारक पहले ही यात्रा के मुख्य पड़ाव के लिए श्री अमरनाथ गुफा की तरफ रवाना हो चुकी है, जिसकी शुरुआत 22 अगस्त दिन शनिवार को हुई थी। इसके पारंपरिक और तय कार्यक्रम के अनुसार, 22 और 23 अगस्त की दरमियानी रात पहलगाम में, 24 अगस्त को चंदनवाड़ी में, 25 अगस्त को खूबसूरत शेषनाग स्थल पर तथा 26 और 27 अगस्त की दो रातों के लिए पंचतरणी में रात्रि विश्राम का चरण पूरा होगा। इसके बाद ठीक 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा के पावन पर्व पर बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा के भीतर भव्य पूजा और दर्शन के साथ छड़ी मुबारक यात्रा का आधिकारिक समापन हो जाएगा। साल 2026 की यह श्रीअमरनाथजी यात्रा अपने तय शेड्यूल के मुताबिक 3 जुलाई को आरंभ हुई थी और 28 अगस्त तक अनवरत चलती रही। सावन के पूरे महीने के दौरान देश के कोने-कोने से आने वाले लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के अलौकिक दर्शन पाने के लिए बेहद कठिन पहाड़ी रास्तों को पार करते हुए गुफा तक पहुँचते हैं।

प्राकृतिक हिम शिवलिंग और कठिन पहाड़ी यात्रा के रास्ते

अमरनाथ की पवित्र और रहस्यमयी गुफा के भीतर मौसम के अनुसार प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग को सीधे तौर पर भगवान शिव का ही साक्षात स्वरूप मानकर देश-विदेश से आने वाले भक्त पूरी श्रद्धा के साथ दर्शन और पूजन करते हैं। अमरनाथ यात्रा का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध मुख्य रूप से सावन मास और पूर्णिमा की तिथि के साथ गहराई से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस कठिन यात्रा के दौरान श्रद्धालु पारंपरिक रूप से पहलगाम मार्ग या फिर बालटाल मार्ग का चयन करके पवित्र गुफा तक पहुँचने का कठिन सफर तय करते हैं। आधिकारिक और प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, पहलगाम का मुख्य मार्ग चंदनवाड़ी, प्रसिद्ध पिस्सू टॉप, शेषनाग और पंचतरणी जैसे दुर्गम स्थलों से गुजरते हुए सीधे पवित्र गुफा तक पहुँचता है, जबकि इसके अलावा बालटाल के रास्ते से भी श्रद्धालु पैदल या अन्य माध्यमों से गुफा तक आसानी से पहुँचते हैं।

धार्मिक पंचांग के लिहाज से बेहद खास है यह दुर्लभ संयोग

इस प्रकार से देखा जाए तो 28 अगस्त को एक ही दिन सावन पूर्णिमा, रक्षाबंधन का पर्व, अमरनाथ यात्रा का ऐतिहासिक समापन और साल के अंतिम चंद्र ग्रहण का एक साथ बनना इस तिथि को धार्मिक पंचांग और खगोलीय इतिहास के लिहाज से बेहद खास और दुर्लभ बना देता है। हालांकि इस खगोलीय घटना का सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू यह है कि यह ग्रहण भारत की भौगोलिक सीमा में बिल्कुल भी दिखाई नहीं देगा, जिसकी वजह से देश के भीतर सभी सामान्य धार्मिक अनुष्ठान, पर्व और रक्षाबंधन से जुड़ी पारंपरिक रीतियाँ बिना किसी रुकावट के पंचांग के नियमों के अनुसार पूरी आस्था के साथ निभाई जा सकेंगी और श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आएगी।

सवाल-जवाब

अमरनाथ यात्रा 2026 का समापन किस दिन हो रहा है?
अमरनाथ यात्रा का समापन 28 अगस्त 2026 को सावन पूर्णिमा के दिन हो रहा है।
क्या 28 अगस्त को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
नहीं, भारत में दिन का समय होने और चंद्रमा के क्षितिज के नीचे रहने के कारण यह ग्रहण यहाँ दिखाई नहीं देगा।
क्या चंद्र ग्रहण के कारण भारत में सूतक काल मान्य होगा?
भारत में ग्रहण दिखाई न देने के कारण इसका कोई भी सूतक काल यहाँ मान्य नहीं होगा।
सावन पूर्णिमा के दिन कौन सा प्रमुख त्योहार मनाया जा रहा है?
सावन पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार भी मनाया जा रहा है।
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