भगवान शिव की आराधना को समर्पित अत्यंत पवित्र सावन का महीना 30 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पूरा महीना आध्यात्मिक साधना और शिव पूजा के लिए अत्यधिक शुभ माना जाता है। इस दौरान भक्त रोजाना मंदिरों में जाकर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक जैसे पवित्र अनुष्ठान करते हैं। सावन सोमवार के व्रत का इस महीने में एक बहुत ही विशेष महत्व होता है। श्रद्धालु पूरे भक्ति भाव से भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, ताकि उनके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहे, बेहतर स्वास्थ्य मिले और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकें।
सावन में दो खगोलीय घटनाएं
हालांकि, 2026 के सावन महीने में दो प्रमुख खगोलीय घटनाएं भी होने वाली हैं, जिसने शुरुआत में भक्तों के बीच पूजा के नियमों को लेकर कुछ गंभीर चिंताएं पैदा कर दी थीं। हिंदू पंचांग के अनुसार, 12 अगस्त को अमावस्या की तिथि पर एक सूर्य ग्रहण लगने वाला है। इसके ठीक 16 दिन बाद, 28 अगस्त को एक पूर्ण चंद्र ग्रहण भी लगेगा। एक ही पवित्र महीने के भीतर दो बड़े ग्रहणों के योग ने यह सवाल खड़ा कर दिया था कि क्या इसका असर व्रत, पूजा-पाठ और मंदिरों के दर्शन के समय पर पड़ेगा।
सूतक काल का वास्तविक प्रभाव
इन सभी सवालों का जवाब देते हुए अयोध्या के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम ने स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया है। उनके अनुसार, "इस साल लगने वाले दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे।"
हिंदू शास्त्रों और मान्यताओं में ग्रहण के दृश्य होने या न होने का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सूतक काल एक ऐसा समय होता है जब पूजा-पाठ और शुभ कार्य वर्जित होते हैं। यह सूतक काल केवल उन्हीं जगहों पर मान्य होता है जहां ग्रहण को आसमान में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। चूंकि 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण दोनों ही भारत में पूरी तरह से अदृश्य रहेंगे, इसलिए देश के किसी भी हिस्से में सूतक काल के कड़े नियम लागू नहीं होंगे।
निर्बाध पूजा और व्रत के नियम
हालांकि शास्त्रों में ग्रहण के दौरान सामान्य शारीरिक और मानसिक सावधानी बरतने का जिक्र है, लेकिन जो विशेष धार्मिक प्रतिबंध बताए गए हैं, वे मुख्य रूप से उन क्षेत्रों के लिए होते हैं जहां ग्रहण का सीधा प्रभाव पड़ता है। भारत में इनके अदृश्य रहने के कारण देश भर में होने वाले सावन के आयोजनों, बड़े मंदिरों की पूजा व्यवस्था या सोमवार के कठिन व्रत पर इसका कोई भी नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
देश के सभी छोटे-बड़े मंदिरों के कपाट सामान्य दिनों की तरह ही खुले रहेंगे और दर्शनार्थियों के लिए कोई रुकावट नहीं होगी। जलाभिषेक और रुद्राभिषेक सहित सभी धार्मिक गतिविधियां अपने पूर्व निर्धारित समय के अनुसार बिना किसी बदलाव के जारी रहेंगी।
शिवलिंग पर अभिषेक और मंत्र जाप
श्रद्धालु बिना किसी भ्रम या संशय के भगवान शिव की अपनी दैनिक नियमित पूजा और सावन सोमवार का व्रत कर सकते हैं। पंडित कल्कि राम ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सावन का यह पूरा महीना शिव आराधना के लिए हर तरह से शुभ और मंगलकारी बना रहेगा। उन्होंने सभी भक्तों को सलाह दी है कि वे पूरी श्रद्धा और दृढ़ विश्वास के साथ अपना व्रत जारी रखें। शिवलिंग पर नियमित रूप से शुद्ध जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करना चाहिए।
इसके साथ ही, पूरे सावन महीने में 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का निरंतर जाप करना भी बेहद फलदायी बताया गया है। इन सभी नियमों का शुद्धता के साथ पालन करने से भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है, जिससे व्यक्ति के जीवन में हमेशा अपार सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।




















