आर्थिक तंगी को पछाड़ बिहार के मोहम्मद अयान ने नीट यूजी में पाई 2695वीं रैंक, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर की तैयारीअसम में IVF तकनीक से जन्मी लखीमी नस्ल की दुनिया की पहली बछड़ी, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बताई बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि1966 से जौहरी बाजार में जमी टेबल: 76 साल के नारायण शर्मा रोलेक्स से लेकर एचएमटी तक को देते हैं नई सांसगणेश चतुर्थी से पहले हैदराबाद का धूलपेट बना विशाल वर्कशॉप, 20 फीट तक की बप्पा की मूर्तियों की दक्षिण भारत में बढ़ी मांगसंयुक्त राष्ट्र पहुंचे ब्रिटेन के 70 से अधिक सांसद, पीओके में हिंसा रोकने और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए एंटोनियो गुटेरेस को लिखा पत्रमैके में पहले दिन गेंदबाजों का कहर, 18 विकेटों के पतझड़ के बीच ऑस्ट्रेलिया ने बनाई 101 रन की बढ़तउत्तर प्रदेश के बरेली में आयुष्मान भारत योजना के फर्जी कार्ड बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, पांच जालसाज सलाखों के पीछेप्रयागराज के विद्यालयों का नोडल अधिकारी करेंगे निरीक्षण, डीएम मनीष कुमार वर्मा ने सीएवी इंटर कॉलेज में छात्रों को दिए सफलता के मंत्रपैकेट बंद चिप्स को कहें अलविदा: घर पर ऐसे बनाएं कच्चे केले के स्वादिष्ट और कुरकुरे स्नैक्स, सेहत और बचत दोनों का मिलेगा फायदाबिना खोया के घर पर बनाएं रसीले ब्रेड गुलाब जामुन, जानें बनाने का तरीका
संतान प्राप्ति की मनोकामना के लिए 23 अगस्त को रखें श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत, पढ़ें पौराणिक कथा और शुभ मुहूर्तत्योहार
22 अग॰ 2026, 1:05 pm (1 घंटे पहले)· 1

संतान प्राप्ति की मनोकामना के लिए 23 अगस्त को रखें श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत, पढ़ें पौराणिक कथा और शुभ मुहूर्त

श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। संतान सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ व्रत कथा सुनना अनिवार्य माना जाता है।

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है और वर्ष भर में आने वाली चौबीस एकादशियों में से दो एकादशियों को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। ये दो एकादशियां पौष माह और श्रावण माह के शुक्ल पक्ष में पड़ती हैं। साल 2026 में सावन माह की श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को पूरी श्रद्धा के साथ रखा जाएगा। सनातन मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र व्रत का पालन करने से दंपतियों को सुयोग्य संतान की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। जिन निसंतान दंपतियों को लंबे समय से संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ है, उन्हें यह व्रत नियमपूर्वक रखने की सलाह दी जाती है। केवल संतान प्राप्ति ही नहीं, बल्कि जो भक्त जीवन में ऐश्वर्य, भौतिक सुख, स्वर्ग और मोक्ष प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए भी यह एकादशी अति फलदायी बताई गई है। इस व्रत की पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक कि श्रद्धापूर्वक पुत्रदा एकादशी की पौराणिक कथा का पाठ न किया जाए।

पुत्रदा एकादशी की संपूर्ण पौराणिक व्रत कथा

प्राचीन काल की पौराणिक कथा के अनुसार, भद्रावती नाम के एक अत्यंत समृद्ध नगर में राजा सुकेतु शासन करते थे। उनकी रानी का नाम शैव्या था। राजा सुकेतु बहुत ही धर्मनिष्ठ, प्रजापालक और न्यायप्रिय शासक थे। वे अपनी प्रजा का ध्यान अपने बच्चों की तरह रखते थे। हालांकि, राज्य में सब कुछ होने के बावजूद राजा और रानी के जीवन में कोई संतान नहीं थी। संतान न होने का दुख राजा को अंदर ही अंदर निरंतर सताता रहता था। उन्हें हर समय यही चिंता बनी रहती थी कि उनके जाने के बाद उनके वंश का नाम कौन आगे बढ़ाएगा और उनके पूर्वजों को पिंड दान कौन देगा।

ये भी पढ़ें

इन्हीं दुखों से व्याकुल होकर राजा सुकेतु एक दिन जंगल की ओर चले गए। जंगल में घूमते हुए वे एक आश्रम के पास पहुंचे, जहां कई तेजस्वी ऋषि-मुनि एकत्र होकर प्रभु भजन और कीर्तन कर रहे थे। चूंकि राजा धर्मनिष्ठ व्यक्ति थे और साधु-संतों के प्रति उनके मन में अगाध श्रद्धा थी, इसलिए वे मुनियों के समीप पहुंचे और उन्हें आदरपूर्वक प्रणाम किया। ऋषियों ने अपने ज्ञान और तपोबल से राजा के चेहरे पर छाई उदासी को तुरंत भांप लिया।

जब ऋषियों ने राजा से उनकी चिंता का कारण पूछा, तो सुकेतु ने अपनी संतानहीनता की पीड़ा उनके समक्ष व्यक्त की। राजा की व्यथा सुनकर विद्वान मुनियों ने उन्हें पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। मुनियों ने बताया कि इस पावन तिथि पर पूर्ण निष्ठा से व्रत रखने पर निसंदेह पुत्र सुख प्राप्त होगा। ऋषियों के निर्देशानुसार राजा सुकेतु ने एकादशी के दिन नियमपूर्वक व्रत का पालन किया, भगवान विष्णु की विधिवत पूजा अर्चना की और सुयोग्य संतान का वरदान मांगा। भगवान विष्णु ने राजा की प्रार्थना स्वीकार कर ली। व्रत के प्रभाव से कुछ समय पश्चात् रानी शैव्या ने एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया। इसके बाद राजा ने पूरे राज्य में पुत्रदा एकादशी व्रत की महिमा का प्रसार किया।

श्रावण पुत्रदा एकादशी 2026 के लिए शुभ मुहूर्त और समय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए पूजा अर्चना शुभ मुहूर्त में की जानी चाहिए। 23 अगस्त 2026 को मनाए जाने वाले श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत के लिए शुभ समय सारिणी इस प्रकार है।

  • एकादशी तिथि का प्रारंभ: 23 अगस्त 2026 को तड़के 02:00 बजे
  • एकादशी तिथि का समापन: 24 अगस्त 2026 को सुबह 04:18 बजे
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:51 बजे से सुबह 05:36 बजे तक
  • प्रातः संध्या समय: सुबह 05:13 बजे से सुबह 06:21 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:16 बजे से दोपहर 01:06 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:47 बजे से दोपहर 03:38 बजे तक

व्रत का महत्व और पूजा नियम

पुत्रदा एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद पूरे दिन फलाहार रहकर भगवान की भक्ति में समय बिताना चाहिए। संध्या काल में या पूजा के तय मुहूर्त के दौरान भगवान विष्णु के समक्ष दीपक जलाकर पुत्रदा एकादशी की कथा अवश्य पढ़नी या सुननी चाहिए। माना जाता है कि जो भक्त निष्कपट भाव से इस कथा का श्रवण करते हैं, उनकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

सवाल-जवाब

साल 2026 में श्रावण पुत्रदा एकादशी किस तारीख को है?
साल 2026 में श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।
पुत्रदा एकादशी का व्रत क्यों रखा जाता है?
यह व्रत मुख्य रूप से संतान प्राप्ति और संतान के सुख-समृद्धि की मनोकामना के लिए रखा जाता है।
23 अगस्त 2026 को एकादशी तिथि कब शुरू और समाप्त होगी?
एकादशी तिथि 23 अगस्त 2026 को तड़के 02:00 बजे शुरू होगी और 24 अगस्त 2026 को सुबह 04:18 बजे समाप्त होगी।
पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा में किस राजा का वर्णन है?
व्रत कथा में भद्रावती नगर के राजा सुकेतु और उनकी रानी शैव्या का वर्णन है।
23 अगस्त 2026 को पूजा के लिए अभिजित मुहूर्त का समय क्या है?
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:16 बजे से दोपहर 01:06 बजे तक रहेगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR