सस्ते कबाड़ के झांसे में 9 लाख की डकैती, 12 जिलों में 1300 किमी पीछा कर दबोचे गए 7 बदमाशपितृ पक्ष में लोहे के बर्तनों और दान से क्यों बचना चाहिए, जानिए धार्मिक कारणसपोटरा के गज्जूपुरा में राज्य स्तरीय खो-खो टूर्नामेंट का आगाज, 86 टीमों की 1032 छात्राएं दिखाएंगी दमउत्तर भारत से मानसून की विदाई तेज, पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों में भारी बारिश का अलर्टशारदीय नवरात्र से पूर्व उत्तराभाद्रपद में शनि का प्रवेश, सप्तम भाव के गोचर से साझेदारी और कारोबार पर असरअजमेर में बस चालक से मारपीट पर रोडवेज कर्मियों का फूटा गुस्सा, अंबेडकर सर्किल पर बसें रोक लगाया जामबालाघाट में रहस्यमयी बीमारी के बाद हरकत में प्रशासन, 50 गांवों में 43 हजार से अधिक लोगों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षणवोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के नियमों में बदलाव, कई राज्यों में फॉर्म-6 से हटी एसआईआर घोषणापंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से अमरिंदर सिंह राजा वारिंग की हो सकती है छुट्टी, विजय इंदर सिंगला सबसे आगेदीपावली पर पटाखों पर नहीं लगेगा पूर्ण प्रतिबंध, सुप्रीम कोर्ट तलाशेगा आस्था और सेहत के बीच संतुलन
बछ बारस पर संतान की लंबी उम्र की मन्नत के साथ क्यों पढ़ी जाती है गणेश जी की कथाधर्म
9 सित॰ 2026, 1:15 am (22 दिन पहले)· 2

बछ बारस पर संतान की लंबी उम्र की मन्नत के साथ क्यों पढ़ी जाती है गणेश जी की कथा

बछ बारस के मौके पर महिलाएं अपनी संतान के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करती हैं। इस दिन गाय और बछड़े की पूजा के साथ गणेश जी की विशेष कथा सुनने का भी विधान है।

गोवत्स द्वादशी का यह पवित्र पर्व विशेष रूप से माताओं द्वारा अपनी संतान की लंबी उम्र और सुखद जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। इस अवसर पर देशभर में गौ माता और उनके बछड़ों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस व्रत के अनुष्ठान में शुभ मुहूर्त के दौरान गोवत्स द्वादशी की पौराणिक कथा सुनने की परंपरा है। हालांकि बहुत कम लोग यह जानते हैं कि इस दिन गणेश जी की कथा सुनना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसके बिना पूजा का पूर्ण फल अधूरा माना जाता है।

एक अनूठी लोक कथा और गणेश जी का चमत्कार

धार्मिक परंपराओं में प्रचलित इस कथा के अनुसार एक गांव में एक मां और उसकी बेटी रहती थीं। एक दिन जब गांव के सभी लोग गणेश मेला देखने जाने लगे, तो बेटी की भी वहां जाने की तीव्र इच्छा हुई। उसने अपनी मां से मेले में जाने की जिद की। मां ने उसे समझाया कि मेले में भारी भीड़ के कारण वहां जाना सुरक्षित नहीं है और गिरने से चोट लग सकती है। लेकिन लड़की के न मानने पर मां ने उसे विदा करते हुए दो लड्डू और थोड़ा सा पानी दिया। मां ने निर्देश दिया कि एक हिस्सा भगवान गणेश को अर्पित करना है और बाकी खुद ग्रहण करना है।

ये भी पढ़ें

मेले में रुकी लड़की और भगवान की परीक्षा

लड़की मेला स्थल पर पहुंच गई, लेकिन उत्सव समाप्त होने के बाद जब सभी ग्रामीण अपने घरों को लौट आए, तो वह लड़की वापस नहीं लौटी। वह वहीं गणेश जी की मूर्ति के पास बैठी रही और रात भर यही दोहराती रही कि एक हिस्सा गणेश जी के लिए और एक उसके अपने लिए है। पूरी रात बीतने के बाद गणेश जी ने विचार किया कि यदि उन्होंने वह प्रसाद ग्रहण नहीं किया, तो यह बालिका घर नहीं जाएगी और उसकी मां घर पर अत्यंत चिंतित हो रही होगी।

वरदान प्राप्ति और माता का मिलन

इस स्थिति को देखकर गणेश जी ने एक बालक का रूप धारण किया और लड़की के पास आकर उसका दिया हुआ प्रसाद स्वीकार कर लिया। इसके बाद उन्होंने बालिका से अपनी इच्छा के अनुसार वर मांगने को कहा। लड़की असमंजस में पड़ गई कि वह अन्न मांगे, धन मांगे, उत्तम वर मांगे या कोई बड़ा महल मांगे। भगवान ने उसके मन की दुविधा को भांपते हुए उसे तुरंत घर जाने को कहा और आश्वासन दिया कि उसकी हर मनोकामना पूर्ण होगी। जब वह घर पहुंची और अपनी मां को पूरी घटना सुनाई, तो शीघ्र ही उसके मन में आए सभी सपने सच साबित हो गए।

सवाल-जवाब

बछ बारस का व्रत क्यों रखा जाता है?
यह व्रत स्त्रियां अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए रखती हैं।
बछ बारस के दिन किसकी पूजा की जाती है?
इस दिन विशेष रूप से गायों और बछड़ों की पूजा की जाती है।
गणेश जी की कथा सुनने का क्या महत्व है?
ऐसी मान्यता है कि बछ बारस के दिन गणेश जी की कहानी सुनने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
कथा में लड़की मेले में क्या लेकर गई थी?
लड़की मेले में अपनी मां द्वारा दिए गए दो लड्डू और थोड़ा पानी लेकर गई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp