राजस्थान के भरतपुर शहर में स्थित बिहारीजी के मंदिर में भगवान की प्रतिमा पर चढ़ाए गए एक हीरे को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शहर के रंजीत नगर में रहने वाले एक व्यापारी परिवार का कहना है कि करीब 3.65 लाख रुपये कीमत का यह हीरा अब प्रतिमा पर नहीं दिख रहा और उसकी जगह कांच जैसा एक टुकड़ा नजर आ रहा है। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के लिए मुख्यमंत्री, देवस्थान विभाग और इलाके के विधायक तक शिकायत पहुंचाई है।
2024 में श्रद्धा से चढ़ाया गया था हीरा
व्यापारी प्रवीण बंसल की मां मीरा बंसल ने साल 2024 में भगवान बिहारीजी के प्रति अपनी आस्था जताते हुए यह हीरा भेंट किया था। यह हीरा प्रतिमा की नथ में जड़ा गया था, ताकि भगवान का श्रृंगार और भव्य हो सके। परिवार के लिए यह दान सिर्फ एक भेंट नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही आस्था और भगवान के प्रति सम्मान का प्रतीक था।
श्रद्धालुओं ने पहले जताई आशंका, फिर परिवार खुद पहुंचा मंदिर
कुछ समय बीतने के बाद मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं और परिवार के परिचितों ने बंसल परिवार को बताया कि प्रतिमा में लगा पत्थर पहले जैसा नहीं दिखता और उसमें हीरे वाली चमक भी गायब है। यह सुनकर परिवार खुद मंदिर पहुंचा और प्रतिमा को करीब से देखा। मीरा बंसल की बहू कृपाली ने बताया कि जो पत्थर वहां अभी लगा है, वह उस हीरे जैसा बिल्कुल नहीं लगता जो पहले चढ़ाया गया था। इसी के बाद परिवार को शक हुआ कि कहीं असली हीरा बदल तो नहीं दिया गया।
रसीद और रिकॉर्ड मांगे तो विभाग से नहीं मिला जवाब
परिवार का दावा है कि उन्होंने देवस्थान विभाग से कई बार दान किए गए हीरे की रसीद और उससे जुड़ा रिकॉर्ड मांगा, लेकिन उन्हें कोई ठोस दस्तावेज नहीं दिया गया। परिवार ने विभाग के अधिकारियों से यह भी कहा कि प्रतिमा पर लगे पत्थर की जांच करवाई जाए, ताकि सच सामने आ सके, लेकिन इस मांग पर भी उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इससे परिवार की चिंता और बढ़ गई।
टालमटोल की कोशिश, लेकिन परिवार की मांग नहीं बदली
परिवार का आरोप है कि बाद में विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनसे बातचीत कर मामले को शांत करने की कोशिश की। लेकिन परिवार का कहना है कि उनकी मांग बिल्कुल साफ है, यह पता चलना चाहिए कि भगवान को चढ़ाया गया असली हीरा अभी भी प्रतिमा में मौजूद है या नहीं। परिवार के पास हीरे की खरीद का बिल, प्रमाण-पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज सुरक्षित हैं। उनका कहना है कि वे किसी को दोषी नहीं ठहरा रहे, बल्कि सिर्फ पारदर्शी जांच के जरिए सच्चाई जानना चाहते हैं। परिवार ने अभी तक पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है और पहले विभागीय जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा है।
आयुक्त बोले, हीरा है या कांच, अभी कहना मुश्किल
देवस्थान विभाग के आयुक्त मुकेश कुमार मीणा ने इस मामले पर कहा कि जिस समय यह हीरा मंदिर में दान किया गया था, उस वक्त उनकी तैनाती वहां नहीं थी, इसलिए उस समय अपनाई गई प्रक्रिया या रसीद से जुड़ी जानकारी उनके पास नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज हीरा दान की तारीख और परिवार द्वारा बताई गई तारीख में अंतर पाया गया है। आयुक्त के मुताबिक अभी यह पूरी तरह साफ नहीं है कि प्रतिमा में लगा पत्थर असली हीरा है या कांच का टुकड़ा, और बिना जांच के इसकी पुष्टि करना संभव नहीं है।
जांच के लिए समिति गठित, रिपोर्ट पर टिकीं सबकी निगाहें
पूरे प्रकरण की तह तक जाने के लिए विभाग ने एक समिति बना दी है। यह समिति अपनी जांच पूरी करने के बाद रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद ही यह तय हो पाएगा कि भगवान को श्रद्धा से चढ़ाया गया असली हीरा प्रतिमा में मौजूद है या नहीं। मंदिर से जुड़ा यह विवाद अब भरतपुर के श्रद्धालुओं के बीच भी चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। फिलहाल हर किसी की नजर उस जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो इस पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकती है।











