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दान पात्रों से रकम चोरी की अफवाह पर राम मंदिर ट्रस्ट सख्त, सीएम योगी को पत्र लिखकर मांगी SIT जांचधर्म
13 जून 2026, 5:15 pm (136 दिन पहले)· 1

दान पात्रों से रकम चोरी की अफवाह पर राम मंदिर ट्रस्ट सख्त, सीएम योगी को पत्र लिखकर मांगी SIT जांच

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दान पात्रों से धनराशि चोरी की सोशल मीडिया अफवाहों को निराधार बताते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ से SIT जांच की मांग की है, ताकि साजिश रचने वालों का पर्दाफाश हो सके।

अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही श्रद्धालुओं का जो जनसैलाब उमड़ रहा है, उसी के बीच एक ऐसी अफवाह ने सिर उठाया है जिसने मंदिर ट्रस्ट को तुरंत हरकत में ला दिया। दावा यह किया जा रहा था कि मंदिर परिसर में रखे दान पात्रों से चढ़ावे की रकम चोरी हो रही है। यह बात सोशल मीडिया और कुछ अन्य माध्यमों पर तेजी से फैलने लगी, और इसी को रोकने तथा सच्चाई सामने लाने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने अब तक के सबसे कड़े कदमों में से एक उठाया है।

देश-विदेश से रोजाना करोड़ों भक्त रामलला के दरबार में पहुंच रहे हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान पात्रों में नकद राशि के साथ-साथ सोने-चांदी के आभूषण भी दिल खोलकर अर्पित कर रहे हैं। ऐसे माहौल में चोरी की खबर ने भक्तों के बीच बेचैनी पैदा कर दी, लेकिन ट्रस्ट ने इसे शुरू से ही पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत बताया है।

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ट्रस्ट का रुख और सीएम योगी से संपर्क

मंदिर की सुरक्षा और व्यवस्थाओं की देखरेख करने वाले इस ट्रस्ट ने साफ कर दिया है कि वह इन खबरों को महज एक सामान्य अफवाह मानकर खामोश बैठने वाला नहीं है। ट्रस्ट का कहना है कि करोड़ों रामभक्तों का भरोसा और मंदिर की पारदर्शी छवि दांव पर है, इसलिए पूरे मामले की तह तक जाना जरूरी है। इसी सोच के तहत ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधा संपर्क साधा।

ट्रस्ट की ओर से मुख्यमंत्री को एक आधिकारिक पत्र भेजा गया है, जिसमें अनुरोध किया गया है कि दान पात्रों से चोरी से जुड़ी सभी अफवाहों और दावों की पड़ताल के लिए एक विशेष जांच दल यानी SIT (Special Investigation Team) गठित किया जाए। ट्रस्ट का तर्क है कि एक उच्च स्तरीय SIT जांच दो काम करेगी — एक तो इस पूरे दुष्प्रचार के पीछे छिपे चेहरे बेनकाब होंगे, और दूसरा देश के सामने यह सच्चाई आएगी कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे की एक-एक पाई पूरी पारदर्शिता के साथ बैंक खातों में जमा होती है।

सुरक्षा इतनी पुख्ता कि चोरी असंभव

ट्रस्ट के मुताबिक मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था अभेद्य है। दान पात्रों और उनके आसपास का पूरा इलाका चौबीसों घंटे सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी में रहता है। इतना ही नहीं, चढ़ावे की गिनती भी एक सुरक्षित ‘काउंटिंग रूम’ में होती है, जहां बैंक अधिकारी और ट्रस्ट के सदस्य मौजूद रहते हैं और पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है। ऐसे बहुस्तरीय इंतजामों के बीच रकम की चोरी तकनीकी और व्यावहारिक, दोनों ही लिहाज से लगभग नामुमकिन है।

क्या इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश है?

ट्रस्ट इस पूरे प्रकरण को एक आम अफवाह से कहीं ज्यादा गंभीर मान रहा है। उसका मानना है कि यह रामनगरी और राम मंदिर की साख को बट्टा लगाने के मकसद से कुछ शरारती तत्वों या नकारात्मक ताकतों की रची हुई एक सोची-समझी डिजिटल साजिश हो सकती है। यही वजह है कि ट्रस्ट ने सीएम योगी से सिर्फ चोरी के दावों की जांच की ही मांग नहीं की, बल्कि यह भी कहा है कि सोशल मीडिया पर इस अफवाह को सबसे पहले फैलाने और हवा देने वाले ‘टूलकिट’ या गिरोह को भी ढूंढ निकाला जाए और उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

सवाल-जवाब में पूरा मामला

विवाद किस बात पर खड़ा हुआ?

राम मंदिर परिसर के दान पात्रों में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली धनराशि की चोरी होने का दावा करते हुए सोशल मीडिया और कुछ अन्य माध्यमों पर भ्रामक अफवाहें फैलाई जा रही हैं।

ट्रस्ट ने इसके जवाब में क्या किया?

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन सभी अफवाहों को पूरी तरह निराधार बताते हुए सच सामने लाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले की SIT जांच कराने का अनुरोध किया है।

दान की रकम की सुरक्षा और गिनती कैसे होती है?

दान पात्र चौबीसों घंटे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रहते हैं, और चढ़ावे की गिनती बैंक अधिकारियों तथा ट्रस्ट सदस्यों की देखरेख में सुरक्षित कमरों में वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ की जाती है।

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