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ब्रज के बरसाना में स्थापित प्रियेश्वर धाम की अनूठी पौराणिक कथा जब शिवजी ने धारण किया था गोपी रूपधर्म
15 अग॰ 2026, 11:02 am (46 दिन पहले)· 0

ब्रज के बरसाना में स्थापित प्रियेश्वर धाम की अनूठी पौराणिक कथा जब शिवजी ने धारण किया था गोपी रूप

मथुरा जिले के बरसाना में प्रिया कुंड तट पर स्थित प्रियेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना द्वापर युग में राधा रानी द्वारा की गई थी, जहां भगवान शिव गोपी रूप में पधारे थे।

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित बरसाना और नंदगांव समेत पूरे ब्रज क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा की दिव्य लीलाओं की गूंज आज भी स्पष्ट सुनाई देती है। ब्रज भूमि के हर कोने में पौराणिक गाथाएं और द्वापर युग की स्मृतियां रची-बसी हैं। इसी पवित्र नगरी बरसाना में एक अत्यंत दुर्लभ और पावन स्थल विद्यमान है, जिसे प्रियेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अद्वितीय मंदिर में स्थापित शिवलिंग की स्थापना स्वयं राधा रानी ने अपने कर-कमलों से की थी। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि भगवान शिव और राधा रानी के बीच के अगाध भक्ति भाव और परस्पर सम्मान का प्रतीक भी है। द्वापर युग की महान परंपराओं को संजोए यह मंदिर आज भी बरसाना के प्रसिद्ध प्रिया कुंड के किनारे स्थित है और देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए असीम आस्था का केंद्र बना हुआ है।

प्रिया कुंड का पावन इतिहास और राधा रानी की स्मृतियां

बरसाना में स्थित प्रिया कुंड वह स्थान है, जहां द्वापर युग में राधा रानी अपनी प्रिय सखियों के साथ विचरण करने और स्नान ध्यान के लिए आया करती थीं। स्थानीय मान्यताओं और पौराणिक कथाओं के अनुसार, राधा रानी स्नान के पश्चात अपने हाथों में लगी मेहंदी को भी इसी कुंड के स्वच्छ जल में धोया करती थीं। इसी कारण इस कुंड को प्रिया कुंड नाम मिला और यह जल स्रोत अत्यंत पवित्र माना जाने लगा। भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की बाल लीलाओं से जुड़ा यह सरोवर आज भी अपनी प्राचीनता और आध्यात्मिकता को बनाए हुए है। इसी कुंड के सुरम्य तट पर प्रियेश्वर महादेव मंदिर स्थित है, जो सदियों से ब्रज की पावन भूमि पर द्वापर युग की जीवंत निशानी के रूप में मौजूद है।

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राधा रानी के दर्शन हेतु महादेव का गोपी रूप धारण करना

प्रियेश्वर महादेव मंदिर के पीछे एक अत्यंत मनमोहक और भावपूर्ण पौराणिक प्रसंग जुड़ा हुआ है। मान्यताओं के अनुसार, एक बार देवाधिदेव भगवान शिव के मन में राधा रानी के प्रत्यक्ष दर्शन करने की तीव्र अभिलाषा जागृत हुई। अपनी इसी मनोकामना को पूर्ण करने के लिए महादेव कैलाश से यात्रा करते हुए ब्रज के बरसाना स्थित प्रिया कुंड के समीप पहुंचे। हालांकि, जब वे वहां पहुंचे, तो राधा रानी अपनी सखियों संग कुंड पर स्नान कर रही थीं। स्त्री मर्यादा और उस पावन स्थल की गरिमा का पूर्ण सम्मान करते हुए भगवान शिव ने अपने मूल रूप में वहां जाना उचित नहीं समझा। इसलिए, महादेव ने एक गोपी का रूप धारण कर लिया। वे राधा रानी के स्नान स्थल की ओर अपनी पीठ करके बैठ गए और अत्यंत तन्मयता से वहां बैठकर ध्यान और आराधना करने लगे।

शीश झुकाकर मांगा आशीर्वाद और मिला प्रियेश्वर नाम

जब राधा रानी अपने स्नान ध्यान के पश्चात वहां से गुजर रही थीं, तो उनकी दृष्टि गोपी वेश में बैठे एक अद्भुत बाल योगी पर पड़ी जो ईश्वर की गहन साधना में लीन था। राधा रानी ने उत्सुकतावश उस बाल योगी के समीप जाकर उनका परिचय पूछा। तब भगवान शिव ने अपने वास्तविक स्वरूप को प्रकट किया और राधा रानी के अलौकिक दर्शन पाकर स्वयं को कृतार्थ महसूस किया। महादेव ने अत्यंत श्रद्धापूर्वक अपना शीश राधा रानी के चरणों में झुका दिया और उनसे दिव्य आशीर्वाद की याचना की। भगवान शिव की इस निष्छल भक्ति और मर्यादा भाव से प्रसन्न होकर राधा रानी ने उन्हें सहर्ष आशीर्वाद प्रदान किया। इसके साथ ही राधा रानी ने भगवान शिव को यह वचन भी दिया कि इस पावन धाम पर उन्हें हमेशा राधा रानी के नाम से यानी प्रियेश्वर महादेव के रूप में पूजा जाएगा।

सपरिवार साधना मुद्रा में विराजमान हैं भगवान शिव

मंदिर के प्राचीन इतिहास और परंपरा के विषय में जानकारी देते हुए मंदिर के पुजारी बृजभूषण शास्त्री ने बताया कि यह स्थान द्वापर कालीन मान्यताओं से परिपूर्ण है। पुजारी बृजभूषण शास्त्री के अनुसार, राधा रानी ने भगवान शिव की भक्ति से द्रवित होकर उन्हें अपने नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था, जिसके बाद से ही इस स्थान का नाम प्रियेश्वर महादेव पड़ा। इस मंदिर की एक और बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव अकेले नहीं, बल्कि अपने संपूर्ण शिव परिवार के साथ विराजमान हैं। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित सभी प्रतिमाएं ध्यान और साधना की मुद्रा में दृष्टिगोचर होती हैं। द्वापर युग से जुड़ी इन प्राचीन प्रतिमाओं के दर्शन के लिए वर्षभर भक्तों का तांता लगा रहता है और यह मंदिर ब्रज की पावन संस्कृति का एक अनमोल स्तंभ माना जाता है।

सवाल-जवाब

प्रियेश्वर महादेव मंदिर उत्तर प्रदेश में कहां स्थित है?
यह मंदिर मथुरा जिले के बरसाना क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रिया कुंड के तट पर स्थित है।
प्रियेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना से जुड़ी क्या मान्यता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना द्वापर युग में स्वयं राधा रानी ने अपने हाथों से की थी।
भगवान शिव ने बरसाना में गोपी रूप क्यों धारण किया था?
राधा रानी के दर्शन करने पहुंचे भगवान शिव ने स्नान स्थल की मर्यादा का सम्मान करते हुए गोपी वेश धारण कर ध्यान लगाया था।
प्रिया कुंड का नाम प्रिया कुंड कैसे पड़ा?
मान्यता है कि राधा रानी अपनी सखियों संग यहां स्नान करने आती थीं और अपने हाथों की मेहंदी धोती थीं, जिससे इस कुंड का नाम प्रिया कुंड पड़ा।
प्रियेश्वर महादेव मंदिर में प्रतिमाओं की क्या विशेषता है?
इस मंदिर में भगवान शिव अपने पूरे परिवार के साथ साधना और ध्यान की मुद्रा में विराजमान हैं।
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