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बुरहानपुर में 30 लाख की जमीन दान देकर बनवाया विट्ठल रुक्मिणी मंदिर, मन्नत पूरी होने पर चढ़ता है गोपाल काला प्रसादधर्म
27 जुल॰ 2026, 12:48 pm (65 दिन पहले)· 0

बुरहानपुर में 30 लाख की जमीन दान देकर बनवाया विट्ठल रुक्मिणी मंदिर, मन्नत पूरी होने पर चढ़ता है गोपाल काला प्रसाद

बुरहानपुर के लालबाग क्षेत्र में मास्टर फराटे ने सूरदास महाराज से प्रेरित होकर 30 लाख रुपये की जमीन दान दी थी, जहां 40 साल पुराना विट्ठल रुक्मिणी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में स्थित लालबाग क्षेत्र में चार दशक पहले दी गई एक अनूठी दानगाथा आज भी आस्था का केंद्र बनी हुई है। संत सूरदास महाराज की आध्यात्मिक प्रेरणा से प्रभावित होकर मास्टर फराटे ने मंदिर निर्माण के उद्देश्य से अपनी लगभग 30 लाख रुपये की कीमती जमीन दान में दे दी थी। इस पावन भूमि पर स्थापित हुआ श्री विट्ठल रुक्मिणी मंदिर आज दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र है।

चार दशक पुराना इतिहास और संगमरमर की मूर्तियां

विट्ठल रुक्मिणी मंदिर का निर्माण 40 वर्ष पूर्व स्थानीय निवासियों और मंदिर प्रबंधन समिति के संयुक्त प्रयासों से संपन्न हुआ था। मंदिर परिसर के भीतर भगवान विट्ठल और माता रुक्मिणी की अत्यंत मनमोहक संगमरमर की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। मंदिर के पुजारी हरीश महाराज के अनुसार दान में मिली इसी भूमि पर पूरे क्षेत्र के सहयोग से इस भव्य धाम का ढांचा तैयार किया गया था। आज भी यहां प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए एकत्र होते हैं।

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संतान प्राप्ति और विवाह की मन्नतें

इस मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था जुड़ी हुई है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार जो भी दंपत्ति यहां संतान प्राप्ति या शीघ्र विवाह संपन्न होने की मन्नत मांगते हैं, उनकी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं। मन्नत पूरी होने के उपरांत भक्त आभार स्वरूप भगवान को गोपाल काला का विशेष प्रसाद अर्पित करते हैं। दूर-दूर से आने वाले कई ऐसे परिवार हैं जिनकी पुरानी इच्छाएं यहां पूरी हुई हैं और वे प्रतिवर्ष नियमित रूप से दर्शन करने आते हैं।

वारकरी संप्रदाय का प्रभाव और धार्मिक आयोजन

यह पवित्र स्थल सीधे तौर पर वारकरी संप्रदाय की परंपराओं से जुड़ा हुआ है। इसी कारण मध्य प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से भी भारी संख्या में वारकरी भक्त बुरहानपुर पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में वर्ष भर कई धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जिनमें गुरु पूजन और अखाड़ी ग्यारस सबसे प्रमुख हैं। इन विशेष अवसरों पर विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रसादी ग्रहण करते हैं।

सवाल-जवाब

बुरहानपुर के विट्ठल रुक्मिणी मंदिर के लिए जमीन किसने दान दी थी?
संत सूरदास महाराज से प्रेरित होकर मास्टर फराटे ने मंदिर निर्माण के लिए लगभग 30 लाख रुपये मूल्य की अपनी जमीन दान में दी थी।
लालबाग का श्री विट्ठल रुक्मिणी मंदिर कितना पुराना है?
इस मंदिर का निर्माण दान में मिली भूमि पर स्थानीय निवासियों और समिति के सहयोग से लगभग 40 वर्ष पूर्व कराया गया था।
मन्नत पूरी होने पर मंदिर में कौन सा प्रसाद चढ़ाया जाता है?
संतान प्राप्ति या विवाह से जुड़ी मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु मंदिर में भगवान को गोपाल काला प्रसाद अर्पित करते हैं।
महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में क्यों आते हैं?
यह मंदिर वारकरी संप्रदाय से जुड़ा हुआ है, इसलिए अखाड़ी ग्यारस और गुरु पूजन जैसे पर्वों पर महाराष्ट्र से हजारों वारकरी भक्त यहां पहुंचते हैं।
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