दरभंगा में इस वर्ष महिलाओं के लिए जितिया पर्व दो दिनों तक चलने वाला है। माताएं अपनी संतान की दीर्घायु और उन्नति की कामना के लिए इस कठिन व्रत को रखती हैं। इस व्रत से जुड़ी कई ऐसी अनूठी परंपराएं हैं जो लोगों को हैरान कर देती हैं। आम तौर पर किसी भी बड़े व्रत या त्योहार से पहले लोग मांसाहार छोड़ देते हैं और एक दिन पहले लहसुन व प्याज का सेवन भी वर्जित माना जाता है। इसके विपरीत, यह एक ऐसा खास व्रत है जिसकी शुरुआत ही मछली के सेवन के साथ होती है।
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के आचार्य की जानकारी
इस विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलानुशासक और ज्योतिषाचार्य डॉ. कुणाल कुमार झा ने बताया कि इस साल जितिया पर्व 3 अक्टूबर 2026 को आयोजित किया जाएगा। डॉ. झा के अनुसार, शनिवार 3 अक्टूबर की रात को महिलाएं इस व्रत को धारण करेंगी और अगले दिन रविवार 4 अक्टूबर को व्रत का पारण संपन्न होगा। यह पारण नवमी तिथि के दौरान किया जाएगा। सुबह 7:38 के बाद जैसे ही नवमी तिथि का प्रवेश होगा, उसके पश्चात ही व्रत का पारण किया जाएगा।
मिथिलांचल में परंपरा और ओठगन का शुभ मुहूर्त
चूंकि इस बार अष्टमी तिथि चंद्रोदय व्यापिनी है, इसलिए यह व्रत मिथिलांचल क्षेत्र में जितिया के नाम से और अन्य क्षेत्रों में महालक्ष्मी व्रत के रूप में जाना जाता है। उन्होंने आगे बताया कि 3 अक्टूबर से एक दिन पहले मिथिलांचल में विशेष रूप से माछ और मरुआ का भोग अर्पित किया जाता है। इस दिन स्नान-ध्यान के पश्चात व्रत रखने वाली महिलाएं मछली और मरुआ का भोजन ग्रहण करती हैं, जिसे स्थानीय बोलचाल में नहाय-खाय कहा जाता है। इसके उपरांत, रात के अंतिम पहर में विशेष भोजन करने का विधान है जिसे ओठगन कहा जाता है। ओठगन का यह शुभ मुहूर्त रात्रि के अंतिम पहर में निर्धारित किया गया है, जिसके तहत सूर्योदय से पहले सुबह 5:54 बजे से पूर्व ओठगन पूरा कर लिया जाएगा।



















