पटना में चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की इच्छा रखने वाले युवाओं के जेहन में अक्सर यह सवाल घूमता रहता है कि कठिन परीक्षाओं और लंबी ट्रेनिंग का दौर पार करने के बाद करियर में आगे क्या अवसर मिलते हैं और वित्तीय लिहाज से कितनी कमाई हो सकती है। छात्रों के मन में उठने वाली इन तमाम जिज्ञासाओं का समाधान पटना के सीए अभिषेक मिश्रा ने किया है। उन्होंने विस्तार से समझाते हुए बताया है कि सीए की डिग्री हासिल करने के बाद केवल नौकरी का ही विकल्प नहीं होता, बल्कि खुद की प्रैक्टिस यानी फर्म शुरू करने का रास्ता भी पूरी तरह खुला रहता है। उन्होंने इस पेशे से जुड़े करियर विकल्पों, कॉर्पोरेट जगत में जॉब के अवसरों और कमाई के गणित को लेकर अहम जानकारियां साझा की हैं।
अभिषेक मिश्रा के अनुसार सीए की परीक्षा पास करने के बाद मुख्य रूप से दो प्रमुख रास्ते सामने आते हैं। पहला रास्ता अपनी खुद की प्रैक्टिस शुरू करने का है और दूसरा रास्ता किसी प्रतिष्ठित कंपनी या कॉर्पोरेट सेक्टर में नौकरी करने का होता है। प्रैक्टिस के मामले में कोई भी पेशेवर अपना खुद का फर्म स्थापित कर सकता है या फिर किसी मौजूदा फर्म के साथ जुड़कर काम कर सकता है। वहीं नौकरी के मोर्चे पर छोटी कंपनियों से लेकर देश-विदेश की बड़ी कॉर्पोरेट और मल्टीनेशनल कंपनियों तक में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए ढेरों अवसर मौजूद रहते हैं。
कॉर्पोरेट जगत से लेकर सार्वजनिक क्षेत्र तक में नौकरी के अवसर
अभिषेक मिश्रा बताते हैं कि सीए के लिए कॉर्पोरेट सेक्टर में कई विविधतापूर्ण अवसर उपलब्ध होते हैं। इसके अलावा द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया यानी आईसीएआई की तरफ से आयोजित होने वाले कैंपस प्लेसमेंट के माध्यम से भी रोजगार के शानदार अवसर मिल सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न कंपनियों में समय-समय पर निकलने वाली रिक्तियों के लिए सीधे आवेदन करके और इंटरव्यू प्रक्रिया को पास करके भी नौकरी हासिल की जा सकती है। केवल निजी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पब्लिक सेक्टर की सरकारी कंपनियों में भी चार्टर्ड अकाउंटेंट के लिए लगातार वेकेंसी निकलती रहती हैं। उन्होंने कोल इंडिया, एनटीपीसी और इंडियन ऑयल जैसी प्रमुख कंपनियों का विशेष तौर पर उदाहरण देते हुए बताया कि ऐसी बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में भी सीए के लिए बेहतरीन अवसर मिल सकते हैं।
सीए बनने के बाद कितनी मिल सकती है सैलरी
वेतन और कमाई को लेकर अभिषेक मिश्रा का स्पष्ट कहना है कि नौकरी के क्षेत्र में जाने के बाद आय की कोई एक निश्चित सीमा तय नहीं होती है। नए सीए के लिए शुरुआती स्तर पर लगभग दो से तीन लाख रुपये प्रतिमाह तक के पैकेज के अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, वास्तविक वेतन पूरी तरह से कंपनी के स्तर, पद की गरिमा, उम्मीदवार के विषयगत ज्ञान, व्यावहारिक कार्य अनुभव और अन्य योग्यताओं पर निर्भर करता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है और करियर आगे बढ़ता है, वैसे-वैसे कमाई भी काफी ऊंचाई तक जा सकती है। कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का सालाना पैकेज बढ़कर करोड़ों रुपये के आंकड़े तक भी पहुंच जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि सीए बनने के बाद कमाई का स्तर एक जैसा नहीं रहता, बल्कि यह चुने गए कार्यक्षेत्र और अनुभव के साथ लगातार बदलता रहता है।
खुद की प्रैक्टिस में कमाई का क्या है पूरा गणित
यदि कोई चार्टर्ड अकाउंटेंट पारंपरिक नौकरी के रास्ते पर चलने के बजाय अपनी खुद की प्रैक्टिस शुरू करने का फैसला करता है, तो वहां कमाई का कोई फिक्स आंकड़ा नहीं होता है। अभिषेक मिश्रा ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस क्षेत्र में सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका क्लाइंट बेस की होती है। शुरुआती दौर में आय थोड़ी कम हो सकती है, खासकर तब जब आपके पास पहले से कोई क्लाइंट मौजूद न हो। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, क्लाइंट्स की संख्या बढ़ती है, प्रैक्टिस मजबूत होती है और अनुभव में इजाफा होता है, वैसे-वैसे आय में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज होने लगती है। अभिषेक मिश्रा बताते हैं कि अपनी प्रैक्टिस से होने वाली कमाई इस बात पर भी काफी हद तक निर्भर करती है कि सीए ने अपना काम किस जगह पर शुरू किया है, शुरुआती चरण में उनके पास कितने क्लाइंट हैं और क्या उनके परिवार में पहले से कोई सीए है या नहीं। संक्षेप में कहें तो नौकरी में जहां एक तय वेतन का ढांचा मिलता है, वहीं खुद की प्रैक्टिस में कमाई पूरी तरह से क्लाइंट्स की संख्या और काम के दायरे पर निर्भर करती है।



















