रामनगरी अयोध्या में सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद से घाटों का पूरा स्वरूप ही बदल गया है। नदी का पानी लगातार ऊपर उठते हुए अब सीधे घाटों की सीढ़ियों तक पहुंच गया है, जिससे कई सीढ़ियां पूरी तरह जलमग्न हो चुकी हैं। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जरूरी कदम उठाए हैं। नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण पारंपरिक रूप से होने वाली सरयू आरती के स्थान में भी बदलाव किया गया है। जिस जगह पर रोजाना नियमित रूप से आरती का आयोजन किया जाता था, वहां पानी पहुंच जाने के कारण फिलहाल वहां आरती करना संभव नहीं रह गया है।
आरती स्थल बदलने के मुख्य कारण
सरयू आरती के प्रधान पुजारी ने इस बदलाव के पीछे की वजहों को स्पष्ट करते हुए बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ने से पुराने स्थल पर पानी का भराव हो गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और संरक्षा को ध्यान में रखते हुए उस जगह पर आयोजन जारी रखना जोखिम भरा हो सकता था, इसलिए आरती के स्थान में बदलाव किया गया है। पुजारी के अनुसार, स्थान परिवर्तन के पीछे एक और मुख्य वजह आरती घाट पर वर्तमान में चल रहा निर्माण कार्य भी है। घाट को एक नया और भव्य स्वरूप देने के लिए विकास कार्य कराए जा रहे हैं। ऐसे में बढ़ते जलस्तर और चल रहे निर्माण कार्यों, दोनों ही परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फिलहाल पुराने स्थान पर आरती का संचालन रोक दिया गया है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
प्रशासन की अपील और श्रद्धालुओं की सतर्कता
नदी के पानी के घाटों तक पहुंचने के बाद से अयोध्या आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए सामान्य दिनों की तरह आवाजाही करना थोड़ा कठिन हो गया है। हालांकि, देश-विदेश से आने वाले भक्त अभी भी घाटों पर पहुंचकर मां सरयू के दर्शन कर रहे हैं और अपनी आस्था के अनुसार पूजा-अर्चना में लगे हुए हैं, लेकिन उन्हें अब अत्यधिक सावधानी बरतनी पड़ रही है। प्रशासन की तरफ से लगातार अनाउंसमेंट और चेतावनियों के जरिए लोगों को सतर्क किया जा रहा है। अधिकारियों और स्थानीय सुरक्षाकर्मियों द्वारा लगातार यह अपील की जा रही है कि कोई भी श्रद्धालु नदी के बेहद करीब न जाए और पानी के अंदर उतरने का जोखिम बिल्कुल न उठाए।
धार्मिक परंपराओं और सुरक्षा के बीच संतुलन
सरयू के जलस्तर में हुई इस वृद्धि ने न सिर्फ घाटों के भौतिक स्वरूप को बदला है, बल्कि धार्मिक आयोजनों के तौर-तरीकों को भी प्रभावित किया है। हालांकि, पुजारियों और आयोजकों ने यह सुनिश्चित किया है कि लोगों की आस्था और सनातन परंपराओं में कोई बाधा न आए। परंपरा को अनवरत बनाए रखते हुए अब एक सुरक्षित और ऊंचे स्थान पर पूरी भव्यता के साथ आरती का आयोजन किया जा रहा है। प्रशासनिक अमला भी स्थिति पर लगातार अपनी नजर बनाए हुए है ताकि बढ़ते पानी के बीच किसी भी श्रद्धालु को असुविधा या खतरे का सामना न करना पड़े।



















