दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व की शुरुआत धनतेरस के पावन अवसर से होती है। इस विशेष दिन की तैयारियां लोग काफी पहले से शुरू कर देते हैं, जिसके तहत घरों की गहन साफ-सफाई, नए घरेलू सामानों और सजावटी वस्तुओं की खरीदारी के साथ-साथ स्वादिष्ट मिठाइयों और व्यंजनों को पकाने का काम किया जाता है। धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की संयुक्त पूजा का सबसे अधिक महत्व माना जाता है। इस पावन अवसर पर दो प्रमुख तिथियों का शुभ संयोग बनता है, जिनमें त्रयोदशी तिथि और प्रदोष काल एक साथ उपस्थित रहते हैं।
धनतेरस 2026 की सही तारीख और पंचांग की गणना
दीपावली उत्सव की शुरुआत शुभ मुहूर्त के निर्धारण पर टिकी होती है, जिसके चलते अक्सर धनतेरस की सही तिथि को लेकर असमंजस पैदा हो जाता है। वर्ष 2026 के संदर्भ में 5 नवंबर, 6 नवंबर या 7 नवंबर जैसी कई संभावित तारीखों को लेकर चर्चाएं देखने को मिलती हैं, क्योंकि इनमें से कोई एक तारीख दीपोत्सव का आगाज करती है। हालांकि, तय पंचांग और पंचांग गणना के आधार पर धनतेरस मनाने की बिल्कुल सही और निर्धारित तारीख 6 नवंबर 2026 है। इसी दिन से आधिकारिक तौर पर दीपोत्सव का शुभारंभ होगा। पिछले साल धनतेरस का पर्व अक्टूबर महीने के मध्य में मनाया गया था।
दीपावली के पांच दिवसीय पर्व का पूरा कार्यक्रम
धनतेरस के संपन्न होने के बाद दीपोत्सव के अन्य पर्व सिलसिलेवार तरीके से मनाए जाते हैं। धनतेरस के अगले दिन 7 नवंबर को छोटी दिवाली मनाई जाएगी। इसके बाद 8 नवंबर को मुख्य अथवा बड़ी दिवाली का आयोजन होगा, जिस दिन देवी लक्ष्मी का विधि-विधान से पूजन करना सबसे अधिक फलदायी और शुभ माना जाता है। पांच दिनों के इस महापर्व के शेष दो दिनों में 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा की जाएगी और 11 नवंबर को भाई दूज का पर्व श्रद्धा एवं उल्लास के साथ संपन्न होगा।
धनतेरस शब्द का अर्थ और धार्मिक महत्व
धार्मिक परंपरा में धनतेरस शब्द दो अलग-अलग शब्दों के मेल से बना है, जिसमें 'धन' का तात्पर्य समृद्धि और संपत्ति से है, जबकि 'तेरस' का अर्थ तेरहवीं तिथि से होता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की 13वीं तिथि को हिंदू श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ भगवान कुबेर और मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं। इसके अतिरिक्त देश के कई क्षेत्रों में धनतेरस को 'धन्वंतरि जयंती' के तौर पर भी श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। भगवान धन्वंतरि को हिंदू आस्था में आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है, जिनका अवतरण इसी पावन तिथि पर हुआ था।
प्रदोष काल और लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त
धनतेरस का आयोजन रोशनी के महापर्व दिवाली से ठीक दो दिन पहले किया जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपने परिवार में सुख-समृद्धि, खुशहाली और आरोग्य की कामना को लेकर देवी लक्ष्मी का आह्वान करते हैं। परंपरा के अनुसार, इस दिन लक्ष्मी पूजन का विधान प्रदोष काल के भीतर ही पूरा किया जाना चाहिए, जो सूर्यास्त के बाद लगभग ढाई घंटे तक प्रभावी रहता है। 6 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे मंगलकारी और शुभ मुहूर्त शाम 06:02 बजे से शुरू होकर रात 07:57 बजे तक रहेगा। इस शुभ अवधि की कुल अवधि 1 घंटा 56 मिनट की होगी, जिसके दौरान पूजन कार्य संपन्न करना सर्वोत्तम माना गया है।
धनतेरस के दिन क्या करें
धनतेरस के मंगल अवसर पर कई धार्मिक और व्यावहारिक नियमों का पालन करना अत्यंत शुभ फल देने वाला माना जाता है
- धातु की नई वस्तुएं खरीदें: धनतेरस के दिन किसी नई धातु की वस्तु को घर लाना दशकों पुरानी पारंपरिक प्रथा है। इस साल भी शुभ मुहूर्त के दौरान सोने, चांदी या तांबे से बनी वस्तुएं खरीदने के पर्याप्त और बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं।
- घर की चौखट पर दीये जलाएं: अपने आवास के मुख्य प्रवेश द्वार और घर की सभी दहलीजों पर मिट्टी के दीये अवश्य प्रज्वलित करें, ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का स्वागत हो सके।
- प्रार्थना और मंत्रों का जाप करें: विधिवत पूजा-आरती करें और उत्तम स्वास्थ्य, धन-धान्य तथा प्रचुरता का आशीर्वाद पाने के लिए पवित्र मंत्रों का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
- दान-पुण्य और सेवा कार्य करें: इस पावन तिथि पर जरूरतमंद लोगों को खाद्यान्न, नकद राशि या अन्य आवश्यक जीवनोपयोगी वस्तुएं भेंट कर सत्कर्म अर्जित करें।
- पूजा स्थल की स्वच्छता सुनिश्चित करें: धनतेरस की सुबह जागने के बाद सबसे पहले अपने घर के पूजा स्थल को पूरी तरह स्वच्छ और बेदाग बनाएं, जिससे प्रार्थना के समय मन और शरीर की आंतरिक पवित्रता बनी रहे।
- पवित्र भाव से अनुष्ठान संपन्न करें: पूरे उत्सव के दौरान अपने हृदय में शुद्ध विचार रखें और शांत मन एवं सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सभी धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा करें।
धनतेरस पर किन गलतियों से बचें
इस पावन दिन पर कुछ कार्यों को करने से बचने की सख्त सलाह दी जाती है ताकि घर में किसी प्रकार का वास्तु दोष या नकारात्मक प्रभाव न आए
- इलेक्ट्रॉनिक सामान और प्लास्टिक खरीदने से बचें: धनतेरस के मौके पर घरेलू उपकरण, मूल्यह्रास वाली संपत्तियां या मोबाइल गैजेट्स जैसी वस्तुएं खरीदना पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार पूरी तरह से अशुभ माना जाता है।
- दीपक जलाना न भूलें: दिवाली का मूल अर्थ प्रकाश और समृद्धि से जुड़ा है, जो दिव्य ऊर्जा और उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है। इसलिए धनतेरस के पावन क्षण में घर को सुगंधित और साफ रखें तथा सौभाग्य और सकारात्मकता को आकर्षित करने के लिए दीये जलाना कभी न छोड़ें।
- परोपकार की उपेक्षा न करें: जरूरतमंदों के साथ भोजन, अनाज या धन साझा करना सद्भावना और पुण्य का सर्वोत्तम कार्य माना जाता है, इसलिए दान देने से कभी पीछे न हटें।
- जल्दबाजी या तनाव में पूजा न करें: पूजा और अनुष्ठान के दौरान किसी भी प्रकार की हड़बड़ाहट से बचें और पूजा स्थल पर पूरी तरह से शांत, एकाग्र और आध्यात्मिक वातावरण बनाए रखें।


















