दीपावली का पावन पर्व 8 नवंबर 2026 को पूरे उल्लास के साथ मनाया जाएगा। धार्मिक परंपराओं में इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की विधिवत उपासना का विधान है। ऐसी मान्यता है कि दीप पर्व के अवसर पर धन की देवी माता लक्ष्मी स्वयं पृथ्वी लोक का भ्रमण करती हैं और अपने साधकों पर कृपा बरसाती हैं। इस पावन अवसर पर देवी की कृपा पाने के लिए घरों को सुंदर झालरों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है। पूजा कक्ष से लेकर घर के आंगन तक विशेष स्वच्छता और सजावट की जाती है, ताकि मां लक्ष्मी का स्वागत पूरे सम्मान और वैदिक रीति से हो सके।
लक्ष्मी पूजन में कमल पुष्प का धार्मिक महत्व
मां लक्ष्मी की पूजा में कमल के फूल को अनिवार्य सामग्री माना जाता है, क्योंकि यह पुष्प देवी को अत्यंत प्रिय है। हिंदू पौराणिक ग्रंथों में मां लक्ष्मी को 'कमला' और 'कमलासना' नामों से भी संबोधित किया गया है, जिसका सीधा अर्थ कमल पर आसीन होने वाली देवी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी लक्ष्मी का प्राकट्य भी कमल पुष्प से ही हुआ था। इसी कारण लक्ष्मी पूजन के समय 'अष्टकमल' यानी 8 कमल के फूल अर्पित करने की विशेष परंपरा मानी गई है। यदि किसी कारणवश 8 कमल पुष्प उपलब्ध न हो सकें, तो साधक श्रद्धापूर्वक 1 कमल का फूल भी चढ़ा सकते हैं। माना जाता है कि दीपावली पर माता को कमल अर्पित करने से परिवार में सुख, समृद्धि, शांति और परस्पर प्रेम बना रहता है।
मुरझाए और बासी फूल अर्पित करने से बचें
दीपावली की पूजा के दौरान पुष्प चयन में अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। मां लक्ष्मी के पूजन में कभी भी बासी अथवा मुरझाए हुए कमल के फूल का प्रयोग नहीं करना चाहिए। पूजा की थाली में केवल वही कमल शामिल करें, जो पूरी तरह से ताजा हो और जिसकी पंखुड़ियां स्वाभाविक रूप से खिली हुई हों। निष्प्राण या मुरझाए फूल चढ़ाने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।
कटे-फटे और खंडित फूलों का न करें चयन
बाजार से पूजन सामग्री लाते समय कमल के फूल की बनावट को भली-भांति जांच लेना आवश्यक है। यह सुनिश्चित करें कि फूल की पंखुड़ियां कहीं से फटी या कटी हुई न हों। इसके अतिरिक्त फूल के भीतर किसी प्रकार का कीट या कीड़ा मौजूद न हो, यह भी ध्यानपूर्वक देखना चाहिए। धार्मिक विधान में खंडित अथवा दोषयुक्त फूल को अशुद्ध माना जाता है, इसलिए ऐसे पुष्प देवी के चरणों में अर्पित करने से बचना चाहिए।
जल से शुद्धिकरण और पवित्र स्थान पर रखना
कमल का फूल बाजार से घर लाने के पश्चात उसे सीधे पूजन स्थल पर नहीं रखना चाहिए। सबसे पहले स्वच्छ और पवित्र जल से फूल का प्रक्षालन करें। धोने के उपरांत ही इसे पूजा घर के किसी शुद्ध स्थान पर स्थापित करें। बिना धुले या अशुद्ध स्थान पर रखे गए पुष्प को पूजा में उपयोग करना अनुचित माना जाता है, इसलिए शुद्धिकरण का नियम अवश्य अपनाएं।
पवित्र भाव और अर्पण करने की सही विधि
मां लक्ष्मी की साधना में बाह्य स्वच्छता के साथ-साथ आंतरिक भाव का शुद्ध होना भी बेहद आवश्यक है। कमल पुष्प चढ़ाते समय साधक का मन पूर्णतया शांत, एकाग्र और भक्तिभाव से परिपूर्ण होना चाहिए। अत्यंत श्रद्धा के साथ यह पुष्प माता लक्ष्मी के श्रीचरणों में समर्पित करें। इसे देवी के आसन के निकट सजाया जा सकता है अथवा उनके करकमलों में सुशोभित किया जा सकता है।


















