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कार्तिक उत्सवों की पूरी समयसारणी: धनतेरस, लक्ष्मी पूजन और महापर्व छठ की सही तिथियांधर्म
1 नव॰ 2026, 11:22 am (1 घंटे पहले)· 0

कार्तिक उत्सवों की पूरी समयसारणी: धनतेरस, लक्ष्मी पूजन और महापर्व छठ की सही तिथियां

वर्ष 2026 के ग्यारहवें महीने में दीपों के महापर्व और सूर्योपासना समेत कई बड़े धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। अहोई अष्टमी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा और गुरु नानक जयंती तक के प्रमुख दिवसों की तारीखें तय हो चुकी हैं।

धार्मिक दृष्टिकोण से साल 2026 का नवंबर माह अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होने जा रहा है, क्योंकि सनातन पंचांग के कई भव्य उत्सव इसी समयावधि में पड़ रहे हैं। महीने के शुरुआती चरण में ही माताओं द्वारा संतान की दीर्घायु के लिए रखा जाने वाला व्रत संपन्न होगा, जिसके तुरंत बाद दीपोत्सव की पांच दिवसीय श्रृंखला और लोक आस्था के महापर्व का क्रम आरंभ हो जाएगा। पंचांगीय गणना के आधार पर तैयार की गई इस समयसारणी के जरिए श्रद्धालु अपने पूजा अनुष्ठान और व्रत संबंधी आयोजनों की पूर्व तैयारी सुगमता से कर सकते हैं।

प्रारंभिक पखवाड़े के व्रत और दीपोत्सव का कार्यक्रम

माह का शुभारंभ 1 नवंबर 2026 को अहोई अष्टमी, कालाष्टमी और पवित्र राधा कुंड स्नान के साथ हो रहा है। इसके पश्चात 5 नवंबर 2026 को रमा एकादशी तथा गोवत्स द्वादशी का संयोग बनेगा। धन संपदा और आरोग्य की कामना से जुड़ा धनतेरस का पर्व 6 नवंबर 2026 को शुक्र प्रदोष व्रत के साथ मनाया जाएगा। अगले दिन यानी 7 नवंबर 2026 को काली चौदस और मासिक शिवरात्रि का पूजन रहेगा।

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रोशनी का सबसे विशाल उत्सव नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली, दीपावली और मां लक्ष्मी की आराधना के रूप में 8 नवंबर 2026 को संपन्न होगा। सनातन मान्यताओं के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व तमस पर प्रकाश के विजय भाव को दर्शाता है। इसके अनंतर 10 नवंबर 2026 को प्रकृति पूजन का प्रतीक गोवर्धन पूजा की जाएगी और 11 नवंबर 2026 को यम द्वितीया यानी भाई दूज का स्नेह पर्व संपन्न होगा।

लोक आस्था का महापर्व छठ और अंतिम पखवाड़े के पावन दिवस

पूर्वी भारत के भूभागों, विशेषकर बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अत्यंत भक्तिभाव से मनाया जाने वाला सूर्योपासना का अनुष्ठान अब देश के लगभग हर हिस्से में विस्तृत रूप ले चुका है। कड़े नियमों और आत्मसंयम के लिए विख्यात इस महापर्व का आरंभ 13 नवंबर 2026 को नहाय-खाय विधि से होगा। इसके अगले चरण में 14 नवंबर 2026 को खरना का प्रसाद ग्रहण किया जाएगा। अस्ताचलगामी सूर्य को 15 नवंबर 2026 को संध्या अर्घ्य अर्पित होगा, जबकि 16 नवंबर 2026 को उषा अर्घ्य के साथ उगते सूर्य को नमन कर व्रत का पारण संपन्न होगा।

छठ पर्व के तत्काल बाद 17 नवंबर 2026 को गोपाष्टमी तथा 18 नवंबर 2026 को आमलकी अथवा अक्षय नवमी का पुण्यकाल रहेगा। चातुर्मास की समाप्ति और मांगलिक कार्यों की पुनः शुरुआत का सूचक देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी 20 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी, जिस दिन श्रीहरि विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं। अगले दिन 21 नवंबर 2026 को तुलसी विवाह का आयोजन होगा। अंत में 23 नवंबर 2026 को वैकुण्ठ चतुर्दशी और 24 नवंबर 2026 को देव दीपावली, कार्तिक पूर्णिमा तथा गुरु नानक जयंती एक साथ मनाए जाएंगे।

सवाल-जवाब

वर्ष 2026 में दीपावली और लक्ष्मी पूजा किस तारीख को है?
साल 2026 में दीपावली, नरक चतुर्दशी और लक्ष्मी पूजा का पर्व 8 नवंबर को मनाया जाएगा।
धनतेरस का व्रत और पूजन किस दिन पड़ेगा?
धनतेरस और शुक्र प्रदोष व्रत 6 नवंबर 2026 को संपन्न होगा।
छठ पूजा 2026 की शुरुआत किस दिन से हो रही है?
छठ महापर्व का आरंभ 13 नवंबर 2026 को नहाय-खाय के साथ होगा और समापन 16 नवंबर को उषा अर्घ्य के साथ होगा।
मांगलिक कार्यों की शुरुआत कराने वाली देवउठनी एकादशी कब है?
देवउठनी अथवा प्रबोधिनी एकादशी 20 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।
कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली की तिथि क्या है?
कार्तिक पूर्णिमा, देव दीपावली और गुरु नानक जयंती 24 नवंबर 2026 को एक साथ मनाई जाएगी।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

नवंबर 2026 के इन त्योहारों की तारीखें देखकर बचपन में दिवाली और छठ की तैयारियों की भागदौड़ याद आ गई। मां कैसे दीये गिनने और प्रसाद की लिस्ट बनाने में जुट जाती थीं, वो माहौल ही अलग था।

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·1 घंटे पहले

करण, सच कहा! नहाय-खाय से लेकर उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक की वो पूरी भागदौड़ ही तो इन त्योहारों की असली रौनक है।

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