उत्तर प्रदेश के आठ शहरों में सत्रह रियल एस्टेट योजनाओं को हरी झंडी, 4844 करोड़ रुपये से बनेंगे 5726 मकान और दुकानेंब्रह्मपुरा में महिला से झपटी गई सोने की चेन का मामला सुलझा, तीन धरे गए और पिघलाया सोना बरामदसोलन के धर्मपुर में पीएनबी एटीएम तोड़ने वाला राजस्थान से पकड़ा गया, साथी की तलाश जारीचीन के केंद्रीय बैंक ने डॉलर के मुकाबले युआन की दैनिक संदर्भ दर 6.7180 तय कीअक्टूबर में चीन का सर्विसेज पीएमआई घटकर 50.8 पर आया, सुस्त आंकड़ों के बाद भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में बढ़तअसम में पुलिस हिरासत से भागने के प्रयास के दौरान गोलीबारी में होटल हत्याकांड का मुख्य अभियुक्त घनकांत गोगोई ढेरबुरहानपुर के बसाड गांव में केले के रेशे से बदली ग्रामीण महिलाओं की तकदीर, 15 से अधिक बनीं लखपति दीदीशैक्षणिक संस्थानों में राजनीति और हड़ताल पर केरल हाईकोर्ट सख्त, छात्रों पर निलंबन की लटकी तलवाररांची में 800 से ज्यादा नी रिप्लेसमेंट कर चुके सर्जन ने बताया, ऑपरेशन के बाद फिजियोथेरेपी क्यों है सबसे जरूरीअसम में बहुविवाह करने वाले सरकारी कर्मचारियों पर गिरी गाज, सेवा से होंगे बर्खास्त
कार्तिक माह में रमा एकादशी 5 नवंबर को, जानिए सम्पूर्ण पूजन विधान और पारण मुहूर्तधर्म
4 नव॰ 2026, 8:34 am (5 मिनट पहले)· 0

कार्तिक माह में रमा एकादशी 5 नवंबर को, जानिए सम्पूर्ण पूजन विधान और पारण मुहूर्त

कार्तिक कृष्ण पक्ष की एकादशी का उपवास 5 नवंबर को रखा जाएगा। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना का विशेष विधान है।

कार्तिक मास के दौरान जगत के पालनहार श्रीहरि विष्णु की आराधना का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि इस पावन महीने में किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठान, तप और साधना से साधक को अक्षय पुण्यों का आशीष मिलता है। कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को रमा एकादशी के नाम से जाना जाता है, जो दिवाली से कुछ दिन पहले आती है। इस पावन अवसर पर नारायण के साथ माता लक्ष्मी की उपासना करने से परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और वैभव का वास होता है। इस वर्ष कार्तिक माह की इस पहली एकादशी का व्रत 5 नवंबर को श्रद्धापूर्वक रखा जा रहा है।

रमा एकादशी पूजन की प्रामाणिक विधि

एकादशी के पावन दिन पर सुबह सबेरे सूर्योदय से पूर्व शैया त्यागकर दैनिक नित्यकर्मों से निवृत्त होना चाहिए। इसके उपरांत स्नान ध्यान करके स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा है। भगवान विष्णु को पीतांबर प्रिय होने के कारण पीले रंग का प्रयोग उत्तम फलदायी माना जाता है। स्नान के बाद अपने आराध्य देव के सम्मुख खड़े होकर अंजलि में शुद्ध जल एवं अक्षत लेकर दिनभर उपवास रखने का दृढ़ संकल्प लेना चाहिए। इसके पश्चात घर के पूजा स्थल अथवा मंदिर को भलीभांति गंगाजल या स्वच्छ जल से पवित्र करें और वहां लकड़ी का एक साफ पाटा स्थापित करें।

ये भी पढ़ें

उस पवित्र चौकी पर साफ पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु तथा माता महालक्ष्मी की प्रतिमा अथवा सुंदर चित्रपट को प्रतिष्ठापित करना चाहिए। प्रतिमा के समक्ष शुद्ध देसी घी का दीपक प्रज्वलित करें और सुगंधित धूपबत्ती जलाएं। इसके बाद नारायण को पीत चंदन, रोली, अक्षत, पीले पुष्प, मौसमी फल और शुद्ध नैवेद्य श्रद्धाभाव से अर्पित करें। साथ ही माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए सोलह श्रृंगार की पूजन सामग्री भेंट करनी चाहिए।

वैष्णव परंपरा में भगवान विष्णु के भोग में तुलसी दल को सम्मिलित करना अनिवार्य नियम है। ऐसा माना जाता है कि बिना तुलसी पत्र के श्रीहरि किसी भी भोग या नैवेद्य को ग्रहण नहीं करते हैं। संपूर्ण पूजन संपन्न करने के पश्चात एकादशी व्रत महात्म्य की पवित्र कथा का श्रवण अथवा पठन अवश्य करें। कथा के समापन पर नारायण की धूप, दीप और कपूर से मंगल आरती उतारें तथा पवित्र वैदिक मंत्रों का एकाग्रचित्त होकर जाप करें।

रमा एकादशी 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग की गणनाओं के आधार पर कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 4 नवंबर को पूर्वाह्न 11 बजकर 3 मिनट पर हो जाएगी। इस तिथि का विस्तार अगले दिन यानी 5 नवंबर को प्रातः काल 10 बजकर 35 मिनट तक बना रहेगा। सूर्योदयव्यापिनी उदया तिथि की मान्यता के अनुसार व्रत का अनुष्ठान 5 नवंबर को ही किया जाना शास्त्रसम्मत है।

पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाने वाला ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 5 बजे से लेकर प्रातः 5 बजकर 50 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके उपरांत दोपहर के समय विजय और सफलता प्रदान करने वाला अभिजित मुहूर्त पूर्वाह्न 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। वहीं संध्या वंदन और दीपदान के लिए उपयुक्त गोधूलि मुहूर्त शाम को 6 बजकर 3 मिनट से शाम 6 बजकर 29 मिनट की अवधि में रहेगा। इन निर्धारित शुभ मुहूर्तों में की गई पूजा विशेष फल प्रदान करती है।

विष्णु कृपा प्राप्ति के लिए कल्याणकारी मंत्र

एकादशी के दिन मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रभु के इन पावन मंत्रों का तुलसी माला से कम से कम 108 बार जाप करना अत्यंत शुभकारी माना गया है

  • नारायण मंत्र: ॐ नमोः नारायणाय॥
  • वासुदेव मंत्र: ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
  • विष्णु गायत्री मंत्र: ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

पारण के नियम और द्वादशी का सही समय

किसी भी एकादशी व्रत की पूर्णता उसके शास्त्रीय पारण से ही संभव होती है। पारण का सीधा अर्थ व्रत के उपरांत अन्न जल ग्रहण करके उपवास को विधिपूर्वक संपन्न करना है। इस वर्ष रमा एकादशी व्रत का पारण 6 नवंबर 2026 के दिन संपन्न किया जाएगा। व्रत खोलने के लिए सबसे प्रशस्त समय प्रातः काल 6 बजकर 41 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 57 मिनट के मध्य रहेगा।

शास्त्रों के कड़े निर्देश के अनुसार एकादशी व्रत का पारण हर हाल में द्वादशी तिथि के समाप्त होने से पूर्व कर लेना अनिवार्य है। 6 नवंबर को द्वादशी तिथि का समापन प्रातः काल 10 बजकर 30 मिनट पर हो जाएगा। धार्मिक नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि द्वादशी अवधि बीत जाने के बाद पारण करना घोर दोष अथवा पाप के समान माना जाता है। इसके अतिरिक्त यदि किसी कारणवश द्वादशी तिथि सूर्योदय से पूर्व ही पूरी हो चुकी हो, तो उस स्थिति में साधक को सूर्योदय के पश्चात ही पारण करना चाहिए। अतः व्रतियों को समय सीमा का ध्यान रखते हुए प्रातः काल शुभ वेला में ही अपने व्रत का उद्यापन करना चाहिए।

सवाल-जवाब

रमा एकादशी का व्रत किस तारीख को रखा जाएगा?
रमा एकादशी का व्रत 5 नवंबर को उदया तिथि के आधार पर रखा जाएगा।
एकादशी तिथि कब से कब तक रहेगी?
एकादशी तिथि 4 नवंबर को पूर्वाह्न 11 बजकर 3 मिनट से शुरू होकर 5 नवंबर को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगी।
पूजा के लिए सबसे शुभ मुहूर्त कौन से हैं?
प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:00 से 5:50 बजे तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:59 से 12:45 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:03 से 6:29 बजे तक रहेगा।
रमा एकादशी व्रत का पारण कब और किस समय किया जाएगा?
व्रत का पारण 6 नवंबर 2026 को सुबह 6 बजकर 41 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 57 मिनट के बीच किया जाएगा।
पारण के लिए द्वादशी तिथि समाप्त होने का समय क्या है?
द्वादशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगी, जिससे पहले पारण करना आवश्यक है।
भगवान विष्णु के भोग में किस चीज का होना अनिवार्य माना गया है?
भगवान विष्णु के भोग में तुलसी के पत्ते का होना अनिवार्य माना जाता है, क्योंकि इसके बिना भोग स्वीकार नहीं होता।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp