सस्ते कबाड़ के झांसे में 9 लाख की डकैती, 12 जिलों में 1300 किमी पीछा कर दबोचे गए 7 बदमाशपितृ पक्ष में लोहे के बर्तनों और दान से क्यों बचना चाहिए, जानिए धार्मिक कारणशारदीय नवरात्र से पूर्व उत्तराभाद्रपद में शनि का प्रवेश, सप्तम भाव के गोचर से साझेदारी और कारोबार पर असरसपोटरा के गज्जूपुरा में राज्य स्तरीय खो-खो टूर्नामेंट का आगाज, 86 टीमों की 1032 छात्राएं दिखाएंगी दमउत्तर भारत से मानसून की विदाई तेज, पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों में भारी बारिश का अलर्टनोंगस्टोइन स्टाफ नर्स भर्ती विवाद: वीपीपी ने एमडीसी के हस्तक्षेप को ठहराया सही, निष्पक्ष जांच की उठाई मांगअजमेर में बस चालक से मारपीट पर रोडवेज कर्मियों का फूटा गुस्सा, अंबेडकर सर्किल पर बसें रोक लगाया जामबालाघाट में रहस्यमयी बीमारी के बाद हरकत में प्रशासन, 50 गांवों में 43 हजार से अधिक लोगों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षणवोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के नियमों में बदलाव, कई राज्यों में फॉर्म-6 से हटी एसआईआर घोषणापंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से अमरिंदर सिंह राजा वारिंग की हो सकती है छुट्टी, विजय इंदर सिंगला सबसे आगे
दुर्गूकोंदल के तुडगे गांव में तीन परिवारों की धर्म वापसी, तिलक लगाकर हुआ स्वागतधर्म
20 जुल॰ 2026, 3:23 am (73 दिन पहले)· 1

दुर्गूकोंदल के तुडगे गांव में तीन परिवारों की धर्म वापसी, तिलक लगाकर हुआ स्वागत

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के तुडगे गांव में तीन परिवारों के 17 सदस्यों ने रविवार को ईसाई धर्म छोड़कर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अपने मूल धर्म में वापसी की, इस मौके पर सभापति देवेन्द्र टेकाम भी मौजूद रहे।

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में दुर्गूकोंदल विकासखंड के तुडगे गांव में 19 जुलाई 2026, रविवार को एक भावुक और सामाजिक रूप से अहम मौका देखने को मिला, जब तीन परिवारों के 17 सदस्यों ने ईसाई धर्म को छोड़कर अपने पुराने धर्म में वापसी की। यह पूरा आयोजन गांव के पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच संपन्न हुआ।

विधि-विधान से हुई घर वापसी

पूरे गांव में इस मौके को लेकर उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम को स्थानीय परंपराओं के मुताबिक आयोजित किया गया, जिसमें गांव के गायता, पटेल और समाज के प्रमुख लोग मौजूद रहे। बड़ी तादाद में ग्रामीणों के साथ-साथ जनप्रतिनिधि भी इस पल के गवाह बने। लौटने वाले सभी 17 सदस्यों का स्वागत देवी-देवताओं की विधिवत पूजा के साथ किया गया। समाज के बुजुर्गों ने इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई और परिवारों के सदस्यों को तिलक लगाकर, फूलों की माला पहनाकर सम्मान दिया गया। इस दौरान उन्हें आने वाले समय के लिए शुभकामनाएं भी दी गईं। समाज के लोगों ने खुशी जताई कि ये परिवार फिर से उनके बीच लौट आए हैं और उन्हें मुख्यधारा में शामिल करते हुए आपसी एकता का संदेश दिया गया।

ये भी पढ़ें

सभापति देवेन्द्र टेकाम बोले, जड़ों से जुड़े रहना जरूरी

इस मौके पर जिला पंचायत सदस्य एवं सभापति देवेन्द्र टेकाम भी कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने घर वापसी करने वाले परिवारों का स्वागत करते हुए मौजूद लोगों को संबोधित किया। टेकाम ने कहा, "समाज की मजबूती के लिए अपनी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों से जुड़े रहना बहुत जरूरी है।" उनका कहना था कि कोई भी समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब वह अपनी जड़ों से जुड़ा रहे। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे समाज के तय नियम-कायदों का पालन करें और आपसी भाईचारे, प्रेम व सौहार्द के साथ रहें। सभापति ने सामाजिक एकजुटता बनाए रखने और अपनी सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखने पर खास जोर दिया।

अगली पीढ़ी तक पहुंचेगी परंपरा, एकता का लिया संकल्प

कार्यक्रम के दौरान इस बात पर भी बात हुई कि समाज की रीति-रिवाज और संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक कैसे पहुंचाया जाए। समाज के प्रमुख लोगों ने कहा कि किसी भी समुदाय की पहचान उसकी परंपराओं से बनती है और इन मूल्यों को बचाए रखना हर सदस्य की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के अंत में वहां मौजूद सभी लोगों ने आपस में मिलकर एकता और भाईचारा बनाए रखने का संकल्प लिया।

सवाल-जवाब

तुडगे गांव में यह कार्यक्रम कब हुआ?
यह कार्यक्रम रविवार, 19 जुलाई 2026 को हुआ।
कितने लोगों ने अपने मूल धर्म में वापसी की?
तीन परिवारों के कुल 17 सदस्यों ने ईसाई धर्म छोड़कर अपने मूल धर्म में वापसी की।
तुडगे गांव किस जिले और विकासखंड में स्थित है?
यह गांव छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के दुर्गूकोंदल विकासखंड में स्थित है।
कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल हुए?
गांव के गायता, पटेल, समाज प्रमुख, बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और जिला पंचायत सदस्य एवं सभापति देवेन्द्र टेकाम कार्यक्रम में शामिल हुए।
घर वापसी करने वाले सदस्यों का स्वागत कैसे किया गया?
उन्हें देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के साथ तिलक लगाकर और फूलों की माला पहनाकर सम्मानित किया गया।
देवेन्द्र टेकाम ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि समाज की मजबूती के लिए अपनी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों से जुड़े रहना बहुत जरूरी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp